भारत ने अपने स्वदेशी एयर डिफेंस प्रोजेक्ट 'कुश' के तहत लंबी दूरी की इंटरसेप्टर मिसाइल का सफल परीक्षण करके रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। 23 जुलाई 2026 को ओडिशा स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किए गए इस परीक्षण में मिसाइल ने अत्यधिक ऊंचाई और तेज गति से आ रहे काल्पनिक लक्ष्यों को सटीक तरीके से ध्वस्त कर दिया। इस कामयाबी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के इस रक्षा कवच की सराहना हो रही है। चीनी मीडिया पोर्टल साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि इस स्वदेशी प्रगति से भारत की विदेशी सैन्य प्रणालियों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।
विदेशी मिसाइल प्रणालियों पर घटेगी निर्भरता
लंबे समय से भारत अपनी वायु रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भर रहा है। साल 2018 में भारत ने रूस के साथ लगभग 5.43 अरब डॉलर का एक समझौता किया था, जिसके तहत S-400 वायु रक्षा प्रणाली के पांच स्क्वाड्रन खरीदे जाने थे। इनमें से चार स्क्वाड्रन भारत को मिल चुके हैं और वे तैनात भी किए जा चुके हैं, जबकि पांचवें स्क्वाड्रन की आपूर्ति में यूक्रेन संघर्ष के कारण देरी हुई है। इसके अलावा भारत इजराइल की बराक मिसाइल प्रणाली का भी इस्तेमाल करता रहा है।
प्रोजेक्ट कुश के तहत तैयार की जा रही स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (LRSAM) प्रणाली इस स्थिति को पूरी तरह बदल देगी। इस रक्षा प्रणाली का मुख्य उद्देश्य विदेशी सैन्य हार्डवेयर की आवश्यकता को कम करना और भारत को लंबी दूरी के वायु रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। चीनी सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इस स्वदेशी मिसाइल के आने से भारत अपनी हवाई सीमाओं की सुरक्षा बिना किसी विदेशी आपूर्तिकर्ता पर निर्भर रहे कर सकेगा।
प्रोजेक्ट कुश की तकनीकी क्षमताएं और रेंज
प्रोजेक्ट कुश को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा देश की निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों के साथ साझेदारी में विकसित किया जा रहा है। इस मिसाइल प्रणाली को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों, स्टील्थ फाइटर जेट्स, ड्रोन और रणनीतिक बॉम्बर्स का मुकाबला कर सके।
इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत तीन अलग-अलग श्रेणियों की इंटरसेप्टर मिसाइलें विकसित की जा रही हैं
- M-1 इंटरसेप्टर: इसकी मारक क्षमता लगभग 150 किलोमीटर तक होगी।
- M-2 इंटरसेप्टर: यह लगभग 250 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य को भेद सकती है।
- M-3 इंटरसेप्टर: इसकी अधिकतम रेंज 350 से 400 किलोमीटर तक होगी।
ये मिसाइलें मैक 5.5 तक की हाइपरसोनिक गति से उड़ान भरने में सक्षम होंगी। उन्नत तकनीक के तौर पर इनमें डुअल एक्टिव रेडियो फ्रीक्वेंसी और इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर जैसी प्रणालियां शामिल की जा रही हैं। यह तकनीक मिसाइल को दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग प्रयासों को विफल करने और स्टील्थ विमानों को आसानी से ट्रैक करने की क्षमता देती है। इसके अलावा, गैलियम नाइट्राइड (GaN) पर आधारित AESA रडार प्रणाली इसकी निगरानी और लक्ष्य ट्रैकिंग को बेहद सटीक बनाती है।
'मिशन सुदर्शन चक्र' का मुख्य हिस्सा
यह एयर डिफेंस सिस्टम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 'मिशन सुदर्शन चक्र' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2035 तक पूरे देश में एक मजबूत, बहुस्तरीय राष्ट्रीय सुरक्षा कवच स्थापित करना है, जो रणनीतिक बुनियादी ढांचों को किसी भी प्रकार के हवाई खतरे से सुरक्षित रख सके।
इस बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचे में प्रोजेक्ट कुश सबसे बाहरी सुरक्षा परत के रूप में काम करेगा, जो 400 किलोमीटर दूर से ही आते खतरों को नष्ट कर सकता है। वहीं, मध्यम दूरी के इंटरसेप्टर और आकाश जैसी कम दूरी की वायु रक्षा प्रणालियां इसके अंदरूनी सुरक्षा घेरे को संभालेंगी। इस पूरे एकीकरण से भारत का हवाई सुरक्षा ढांचा दुनिया के सबसे मजबूत सुरक्षा तंत्रों में से एक बन जाएगा।



















