दक्षिण चीन सागर के सामरिक जलक्षेत्र में लगभग बारह महीने पहले घटे एक भीषण नौसैनिक हादसे का सच आखिरकार सामने आ गया है। 11 अगस्त 2025 को विवादित स्कारबोरो शोल के निकट एक आक्रामक अभियान के दौरान चीन का कोस्टगार्ड जहाज अपनी ही नौसेना के मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत से टकरा गया था। लंबे समय तक इस गंभीर घटना और इसमें हुए नुकसान पर पूरी तरह खामोशी साधे रखने के बाद अब चीन के सैन्य अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि इस हादसे में उनके दो कोस्टगार्ड जवानों की मृत्यु हो गई थी। इस खुलासे ने एक बार फिर चीनी सेना की गोपनीयता और हादसों को छुपाने की पुरानी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मरणोपरांत सैन्य सम्मान से सामने आई सच्चाई
चीन की अर्धसैन्य शाखा पीपुल्स आर्म्ड पुलिस (PAP) ने गुरुवार को अपने प्रतिष्ठित 'लॉयल गार्ड्स' सम्मानों की घोषणा की। इस आधिकारिक घोषणा के जरिए वर्ष 2025 में घटे हादसे में दो अधिकारियों की शहादत की सार्वजनिक पुष्टि हुई। मरणोपरांत प्रथम श्रेणी मेरिट उद्धरण से सम्मानित किए गए इन वीरों में 21 वर्षीय यी शिन्यू और 25 वर्षीय चेंग लोंग शामिल हैं। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, दोनों अधिकारी 11 अगस्त 2025 को दक्षिण चीन सागर में चलाए जा रहे एक समुद्री अधिकार संरक्षण अभियान के दौरान कर्तव्य निभाते हुए मारे गए थे। शानदोंग प्रांत के रहने वाले इन दोनों जवानों को देश का शीर्ष सैन्य सम्मान देकर सम्मानित किया गया है, जिसके बाद ही इस दबाए गए हादसे की हकीकत दुनिया के सामने आ सकी।
स्कारबोरो शोल के पास कैसे हुआ था भीषण हादसा
यह दुखद घटना उस समय घटी जब बीजिंग और मनिंला के बीच तीव्र दावों को लेकर विवादित स्कारबोरो शोल के पास चीनी कोस्टगार्ड का जहाज नान्यू, जिसे CCG कटार 3104 भी जाना जाता है, फिलीपीन कोस्टगार्ड के पोत BRP सुलुआन का आक्रामक रूप से पीछा कर रहा था। 11 अगस्त 2025 के दिन साफ धूप और शांत समंदर के बीच फिलीपीन जहाज को खदेड़ने की कोशिश में चीनी कोस्टगार्ड पोत अचानक अपनी ही नौसेना (PLAN) के टाइप 052D मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत गुइलिन की राह में आ गया और उनसे सीधे जा टकराया। यह टक्कर इतनी भयावह थी कि कोस्टगार्ड पोत का अगला हिस्सा (बो) पूरी तरह ध्वस्त हो गया था। दुर्घटना के तुरंत बाद ही हताहतों की प्रबल संभावना व्यक्त की गई थी, लेकिन चीन सरकार ने करीब एक साल तक किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि करने से इनकार कर दिया था।
सैन्य नुकसान छुपाने की बीजिंग की पुरानी नीति
ऑपरेशनल नाकामियों और अपने सैनिकों की मौत के आंकड़ों को दुनिया से छुपाना बीजिंग की रक्षा रणनीति का हिस्सा रहा है। इसका सबसे प्रमुख उदाहरण वर्ष 2020 में देखने को मिला था, जब लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय सेना के साथ हुई झड़प के दौरान चीन के 40 से अधिक सैनिक मारे गए थे। उस समय भी चीनी हुकूमत ने महीनों तक हकीकत को छुपाया और बाद में अंतरराष्ट्रीय साक्ष्यों के दबाव में आकर केवल कुछ ही मौतों को स्वीकार किया था। स्कारबोरो शोल के पास अपने ही दो जहाजों के आपस में टकराने की यह नई घटना साबित करती है कि दक्षिण चीन सागर में फिलीपीन जहाजों को डराने की आक्रामक कोशिशों के दौरान चीनी बलों के भीतर भारी अव्यवस्था है, जिसे छिपाने के लिए बीजिंग एक साल तक खामोश रहा।



















