चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व वाले प्रशासन ने विदेशों में स्थित ट्रस्टों में छिपाई गई संपत्ति पर कर कसने का कड़ा कदम उठाया है, जिससे देश के धनाढ्य वर्ग में जबर्दस्त घबराहट व्याप्त है। अनेक वर्षों से चीन के खरबपति अपनी घरेलू कमाई, कंपनियों में प्री-आईपीओ शेयरहोल्डिंग तथा पारिवारिक परिसंपत्तियों को कर की देनदारी से बचाने के लिए विदेशी ट्रस्ट संरचनाओं का सहारा लेते आ रहे थे। इस व्यवस्था पर पूर्ण विराम लगाने के लिए चीन के वित्त मंत्रालय एवं राष्ट्रीय कर प्राधिकरण ने 24 जुलाई को नए दिशा-निर्देश सार्वजनिक किए। इन दिशा-निर्देशों में ऑफशोर ट्रस्ट में मौजूद पूंजी तथा उससे होने वाली आय पर कर निर्धारण की सटीक विधि स्पष्ट की गई है। इस कानून का सबसे मारक पहलू यह है कि इसे भूतलक्षी प्रभाव यानी रेट्रोस्पेक्टिव आधार पर प्रभावी किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत विशेष मामलों में शासन को पिछली एक चौथाई सदी यानी 25 वर्षों तक का बकाया टैक्स वसूलने का कानूनी अधिकार मिल गया है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि इस सख्त अभियान के सफलता पूर्वक कार्यान्वयन से चीनी राजकीय कोष में खरबों डॉलर का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है।
टैक्स संरचना और 90 दिनों की अनिवार्यता
हालिया कर नियमावली के अनुसार, ऑफशोर ट्रस्ट के निर्माण, उसके द्वारा अर्जित लाभांश के वितरण तथा अंततः ट्रस्ट के समापन जैसे प्रत्येक चरण पर एकसमान 20% की दर से कर देय होगा। नए प्रावधानों के तहत उन सभी रईस परिवारों को अपनी विदेशी परिसंपत्तियों का ब्यौरा देना अनिवार्य कर दिया गया है, जिन्होंने वर्ष 2023 के आरंभ से अपनी संपत्तियां ऐसे ट्रस्टों में स्थानांतरित की हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पूरी बकाया देनदारी का हिसाब प्रस्तुत करने तथा कर चुकता करने के लिए 90 दिवस का समय दिया है, जिसकी अंतिम समय सीमा 22 अक्टूबर तय की गई है। कर अधिकारियों ने आगाह किया है कि नियत तिथि तक परिसंपत्तियों की स्पष्ट जानकारी न देने अथवा कर भुगतान में विलंब करने पर अतिरिक्त सरचार्ज एवं आर्थिक दंड अधिरोपित किया जाएगा। जैसे ही 22 अक्टूबर की समय सीमा घोषित की गई, सिंगापुर तथा हांगकांग के वित्तीय गलियारों में हड़कंप मच गया, क्योंकि अधिकांश चीनी उद्योगपति इन्हीं स्थानों में अपने ऑफशोर ट्रस्ट स्थापित करते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों एवं वेल्थ मैनेजरों में परामर्श की होड़
चीन सरकार के इस अप्रत्याशित कदम के कारण अमीर परिवारों, निजी बैंकों एवं कानूनी सलाहकारों के समक्ष गंभीर चुनौती उत्पन्न हो गई है। हांगकांग स्थित विधिक संस्थान झोंग लुन में बतौर पार्टनर कार्यरत क्लिफर्ड एनजी ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस निर्णय से "कई क्लाइंट, ट्रस्टी और सलाहकार अभी भी सदमे में हैं।" वहीं सिंगापुर की डेंटन्स रोडिक लीगल फर्म के वरिष्ठ पार्टनर एवं मुख्य परिचालन अधिकारी किया मेंग लोह ने स्थिति की गंभीरता उजागर करते हुए बताया कि उनके कार्यालय में धनकुबेर परिवारों, प्राइवेट बैंकिंग संस्थानों, ट्रस्ट कंपनियों तथा बीमा संस्थानों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि परामर्शदाता यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि नए नियमों से उनकी परिसंपत्तियां किस हद तक प्रभावित होंगी, उन पर कुल कितना वित्तीय दायित्व आएगा और 22 अक्टूबर की अवधि समाप्त होने से पूर्व भुगतान की प्रक्रिया कैसे पूरी होगी। संभावित कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए कई अमीर घराने तो अपनी कुछ संपत्तियों को बेचने की योजना बनाने लगे हैं ताकि कर भुगतान हेतु आवश्यक नकदी का प्रबंध किया जा सके।
667 अरब डॉलर का ट्रस्ट क्षेत्र और कर वसूली का अनुमान
वैश्विक स्तर पर ऑफशोर ट्रस्ट व्यवसाय लंबे समय से चीनी पूंजी के भरोसे संचालित होता रहा है। केपीएमजी तथा हांगकांग ट्रस्टीज एसोसिएशन द्वारा जारी संयुक्त आंकड़े बताते हैं कि अकेले हांगकांग के ट्रस्टों में वर्ष 2023 तक 667 अरब डॉलर मूल्य की परिसंपत्तियां रखी गई थीं। इस विशालकाय धनराशि पर यदि 20 प्रतिशत की दर से कर निर्धारण किया जाता है, तो चीनी सरकार को लगभग 12.6 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम कर प्राप्ति हो सकती है। अध्ययन में यह तथ्य भी सामने आया कि हांगकांग के ट्रस्टों में केंद्रित कुल पूंजी का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा चीन तथा हांगकांग के घरेलू बाजारों में ही निवेशित था। इसके अतिरिक्त, चीन के अत्यंत धनाढ्य घराने अपनी संपत्तियों के कानूनी स्वामित्व के लिए सिंगापुर के अलावा ब्रिटिश वर्जिन द्वीपसमूह एवं केमैन द्वीपसमूह जैसे कर-अनुकूल क्षेत्रों को प्राथमिकता देते रहे हैं। वर्ष 2025 की केपीएमजी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था कि कई निवेशक हांगकांग की तुलना में सिंगापुर को राजनीतिक दृष्टि से अधिक सुरक्षित व कम जोखिम वाला मानते हैं।
सिंगापुर एवं हांगकांग के नियामकों का दृष्टिकोण
अमीरों द्वारा सिंगापुर को वरीयता दिए जाने के संदर्भ में मॉनेटरी अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर के प्रतिनिधि ने सीएनबीसी को जानकारी दी कि वैश्विक निवेशक कई कारणों से उनके देश का रुख करते हैं। इनमें उच्च स्तरीय विनियामक मानक, सुदृढ़ विधिक ढांचा तथा वेल्थ मैनेजमेंट एवं प्रोफेशनल्स का सशक्त तंत्र प्रमुख हैं। वहीं दूसरी ओर, हांगकांग के फाइनेंशियल सर्विसेज एंड ट्रेजरी ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि सरकार कर प्रोत्साहनों तथा फैमिली ऑफिसों को आकर्षित करने वाली नीतियों के जरिए अंतरराष्ट्रीय संपत्ति प्रबंधन केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को निरंतर मजबूत बनाए रखेगी।
आर्थिक मंदी, घटती जमीन बिक्री और टैक्स की दरकार
चीन में कर नियमों में यह कठोर बदलाव ऐसे नाजुक समय में किया गया है जब बीजिंग प्रशासन राजस्व बढ़ाने के वैकल्पिक मार्ग खोज रहा है। परंपरागत रूप से चीन में स्थानीय निकायों के बजट का मुख्य आधार सरकारी जमीन की नीलामी रहा है, किंतु रियल्टी क्षेत्र में जारी भीषण सुस्ती के कारण जमीन बिक्री से प्राप्त होने वाला राजस्व काफी गिर चुका है। ऐसी स्थिति में चीनी नागरिकों की विदेशी परिसंपत्तियां कर संग्रह का एक मुफीद जरिया बन चुकी हैं। केंद्रीय अध्यादेश आने से पूर्व ही शंघाई, शेन्ज़ेन और जियांगसू के प्रांतीय कर विभागों ने विदेशी ट्रस्टों की पड़ताल आरंभ कर दी थी तथा कुछ मामलों में 20% कर वसूलना भी शुरू कर दिया था। इस सख्ती का असर राजस्व आंकड़ों में दिखा है, जहां वर्ष 2026 की प्रथम छमाही के दौरान चीन के व्यक्तिगत आयकर संग्रह में 13.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि इस दौरान खुदरा बिक्री की रफ्तार बेहद सुस्त बनी रही।



















