चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान में एक बेहद उन्नत और अनोखी टनलिंग मशीन तैयार की गई है, जो कठिन पहाड़ी इलाकों में सुरंग बनाने के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है। शियांगलोंग नाम की यह मशीन दुनिया की पहली ऐसी हाइब्रिड प्रणाली है, जो पारंपरिक टनल बोरिंग और बारूदी धमाकों (ड्रिल-एंड-ब्लास्ट) दोनों तकनीकों को एक ही ढांचे में मिलाती है। हालांकि इस निर्माण को तकनीकी मोर्चे पर एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन भूमिगत सुरंगों के भीतर भारी बिजली और विस्फोटक सामग्री के एक साथ इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है।
इंजीनियरिंग का अनोखा मेल: कैसे काम करती है शियांगलोंग?
पहाड़ों के सीने में सुरंग खोदने के लिए आमतौर पर दो अलग-अलग इंजीनियरिंग पद्धतियों का प्रयोग किया जाता है। पहली पद्धति पारंपरिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) की है, जिसमें एक विशाल गोल कटर घूम-घूमकर चट्टानों को धीरे-धीरे पीसता है और मलबा बाहर निकालता है। दूसरी पद्धति 'ड्रिल-एंड-ब्लास्ट' की है, जिसके तहत चट्टानों में गहरे छेद करके विस्फोटक सामग्री भरी जाती है और धमाके के जरिए रास्ता बनाया जाता है। शियांगलोंग मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसने इन दोनों तकनीकों को एक ही 4.5 मीटर व्यास वाले ढांचे में समायोजित कर दिया है।
इस विशालकाय उपकरण का विकास प्रतिष्ठित सिंघुआ यूनिवर्सिटी और सरकारी स्वामित्व वाली दिग्गज कंपनी 'चाइना रेलवे ग्रुप' की एक विशेषज्ञ इकाई द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। हुबेई प्रांतीय सरकार के आधिकारिक बयानों के अनुसार, इसका निर्माण कार्य वुहान शहर में पूरा किया गया। पारंपरिक TBM जब बहुत ज्यादा कठोर या दरार वाली कमजोर चट्टानी परतों से टकराती हैं, तो उनके कटर की गति बेहद धीमी हो जाती है या मशीनें बीच रास्ते में ही फंस जाती हैं। इससे कई परियोजनाएं महीनों और सालों तक बाधित रहती हैं। शियांगलोंग इस समस्या का समाधान प्रस्तुत करती है, क्योंकि अत्यधिक सख्त सतह आते ही यह मशीन तुरंत ड्रिल-एंड-ब्लास्ट मोड में परिवर्तित हो जाती है, जिससे खुदाई की कुल गति में 30% तक का इजाफा देखा गया है।
सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता: क्यों जताया जा रहा है बड़ा जोखिम?
इंजीनियरिंग के नजरिए से शियांगलोंग को भले ही एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा हो, लेकिन भूमिगत सुरक्षा के जानकारों का मानना है कि यह तकनीक बेहद संवेदनशील और जोखिम भरी साबित हो सकती है। एक ही मशीन के अंदर उच्च-वोल्टेज वाली हैवी मशीनरी, भारी ड्रिलिंग उपकरणों और नियंत्रित बारूदी धमाकों की व्यवस्था को एक साथ संचालित करना किसी बड़े खतरे से खाली नहीं है। जरा सी तकनीकी खामी या मानवीय भूल किसी भयानक हादसे को जन्म दे सकती है।
सुरक्षा के मोर्चे पर तीन मुख्य खतरे रेखांकित किए गए हैं
- बिजली और बारूद का एक साथ मौजूद होना: एक ही जगह पर भारी विद्युत प्रवाह और विस्फोटक सामग्री का होना किसी भी वक्त चिंगारी या शार्ट सर्किट के कारण भीषण हादसे का कारण बन सकता है।
- ज्वलनशील प्राकृतिक गैसों का खतरा: पहाड़ों के भीतर अक्सर मीथेन जैसी विस्फोटक गैसों के गुप्त भंडार मौजूद होते हैं। ड्रिलिंग के दौरान पैदा होने वाला घर्षण और अंदर मौजूद बारूद अगर अनियंत्रित समय पर इन गैसों के संपर्क में आ जाए, तो पूरी मशीन एक विशाल बम की तरह फट सकती है।
- सुरंग के धंसने का अंदेशा: पहाड़ों के अंदर अनियंत्रित या तीव्र धमाके पूरी चट्टानी संरचना को खोखला और कमजोर कर सकते हैं। इससे पूरी सुरंग जमींदोज हो सकती है और भीतर काम कर रहे सैकड़ों मजदूरों की जान बचाना असंभव हो जाएगा।
सीमावर्ती इलाकों और सामरिक परियोजनाओं में उपयोग
वर्तमान समय में कठिन और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में त्वरित बुनियादी ढांचे का निर्माण एक प्राथमिकता बना हुआ है। इसमें बुलेट ट्रेन नेटवर्क का विस्तार, विशाल हाइड्रोपावर डैम परियोजनाएं और सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण सुरंगों का निर्माण शामिल है। तिब्बत और भारत से लगे हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों में अत्यधिक कठोर और अनिश्चित पर्वतीय संरचनाओं के कारण सुरंग निर्माण हमेशा से एक बेहद जटिल चुनौती रहा है।
शियांगलोंग जैसी हाइब्रिड मशीन के निर्माण का सीधा संदेश है कि दुर्गम से दुर्गम पर्वतीय बाधाओं को तेजी से पार करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। जब पारंपरिक मशीनें अत्यधिक सख्त पत्थरों के सामने बेबस हो जाती हैं, तब यह मशीन बारूदी धमाकों के जरिए रास्ता साफ करती है और मलबे को हटाकर तेजी से आगे बढ़ जाती है। हालांकि, निर्माण की इस अभूतपूर्व गति के साथ-साथ संभावित पर्यावरणीय और मानवीय जोखिम भी काफी बढ़ जाते हैं।



















