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पलामू में अगस्त की भारी बारिश से अरहर फसल पर संकट, कृषि विशेषज्ञ ने बताए बचाव और रोग नियंत्रण के उपायझारखंड
22 अग॰ 2026, 3:04 pm (2 घंटे पहले)· 2

पलामू में अगस्त की भारी बारिश से अरहर फसल पर संकट, कृषि विशेषज्ञ ने बताए बचाव और रोग नियंत्रण के उपाय

पश्चिम बंगाल में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण पलामू में अगस्त महीने के दौरान करीब 313 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जिससे अरहर की फसल में जलजमाव और फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ गया है। कृषि विशेषज्ञों ने जल निकासी, पेंडीमेथालिन और कार्बेंडाजिम के प्रयोग से फसल सुरक्षित रखने के उपाय साझा किए हैं।

पलामू जिले में अगस्त माह के दौरान हुई मुसलाधार बारिश ने एक तरफ जहां सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे किसानों को राहत पहुंचाई है, वहीं दूसरी ओर कुछ विशेष फसलों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पश्चिम बंगाल के ऊपर बने लो-प्रेशर सिस्टम के असर से पलामू में इस महीने लगभग 313 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इस लगातार हुई वर्षा का सबसे प्रतिकूल प्रभाव उन दलहनी फसलों पर पड़ने की आशंका है, जो लंबे समय तक पानी के भराव को सहन नहीं कर पाती हैं। ऐसे में किसानों को अपनी अरहर की फसल को संभावित बीमारियों और सड़न से बचाने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे।

पलामू की पहचान और अत्यधिक जलजमाव का खतरा

पलामू जिला पूरे राज्य और आसपास के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण अरहर की खेती के लिए जाना जाता है। यहां उगाई जाने वाली स्थानीय प्रभेद की अरहर दाल अपनी विशेष खुशबू और उम्दा स्वाद के लिए प्रसिद्ध है, जिसके कारण अन्य जिलों और राज्यों में भी इसकी व्यापक मांग रहती है। इसी आर्थिक महत्व को देखते हुए इस साल भी पलामू के किसानों ने बड़े पैमाने पर अरहर की बुआई की थी। हालांकि, अगस्त में दर्ज की गई 313 मिलीमीटर बारिश के कारण खेतों में जलजमाव की स्थिति बन गई है। अगर अरहर के पौधों की जड़ों के पास कई दिनों तक पानी भरा रहता है, तो जड़ों में हवा का संचार बंद हो जाता है। इससे जड़ों के सड़ने और फफूंद जनित रोगों के फैलने की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है।

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किन खेतों पर सबसे अधिक जोखिम और किसे मिलेगी राहत

कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार ने स्थिति का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हुए बताया कि जिन किसानों ने बुआई के समय बीजों का उचित उपचार किया था और अरहर को मेड़ बनाकर ऊंचे स्थानों पर बोया था, उनकी फसल बारिश के इस प्रभाव से काफी हद तक सुरक्षित रहेगी। मेड़ पर खेती करने से अतिरिक्त पानी आसानी से ढलान की ओर बह जाता है और पौधे जलजमाव से बच जाते हैं। इसके विपरीत, जिन किसानों ने समतल या निचले खेतों में बिना बीज उपचार के सीधी बुआई की है, उनके पौधों पर बीमारी का सबसे अधिक खतरा बना हुआ है। ऐसे किसानों को बिना समय गंवाए अपने खेतों से पानी बाहर निकालने की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि जड़ों को तुरंत राहत मिल सके।

खरपतवार नियंत्रण और फफूंदनाशी छिड़काव के जरूरी उपाय

बारिश थमने के बाद खेतों में अत्यधिक नमी के कारण खरपतवार तेजी से पनपते हैं, जो मिट्टी के पोषक तत्वों को सोखकर अरहर के पौधों को कमजोर बना देते हैं। खरपतवार की रोकथाम के लिए किसान कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार पेंडीमेथालिन का छिड़काव कर सकते हैं। इसके साथ ही, नमी के कारण फैलने वाले फफूंद रोगों से बचाव के लिए कार्बेंडाजिम नामक फफूंदनाशक का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर पौधों पर छिड़काव करने का सुझाव दिया गया है। किसान चाहें तो मेनकोजेब या किसी अन्य प्रमाणित फफूंदनाशी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

खेती की देखरेख के दौरान केवल रसायनों का प्रयोग ही काफी नहीं है, बल्कि manual रूप से खरपतवार निकालना और नालियां बनाकर पानी की निकासी सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। बुआई के समय जिन किसानों ने पोटैशियम (पोटाश) की संतुलित मात्रा का उपयोग किया था, उनके पौधों में प्रतिकूल मौसम और रोगों से लड़ने की स्वाभाविक क्षमता अधिक होती है। कृषि विशेषज्ञ ने स्पष्ट किया है कि किसान किसी भी दवा या रसायन का छिड़काव अपने खेत की वास्तविक स्थिति देखकर और स्थानीय कृषि सलाहकारों से विमर्श करने के बाद ही करें।

सवाल-जवाब

अगस्त में पलामू में कितनी बारिश दर्ज की गई है?
पश्चिम बंगाल में बने लो-प्रेशर सिस्टम के कारण पलामू जिले में अगस्त के दौरान करीब 313 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।
अत्यधिक बारिश से अरहर की फसल को क्या नुकसान हो सकता है?
खेतों में पानी जमा रहने से अरहर की जड़ों में हवा का संचार रुक जाता है, जिससे जड़ सड़न और फफूंद जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
किन किसानों की अरहर फसल को नुकसान की संभावना कम है?
जिन किसानों ने बुआई से पहले बीज उपचार किया था और मेड़ पर अरहर की फसल लगाई थी, उनकी फसल को नुकसान कम होगा।
फफूंद जनित रोगों से अरहर फसल को बचाने के लिए किस दवा का प्रयोग करें?
फफूंदनाशक के तौर पर कार्बेंडाजिम को 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोलकर छिड़काव करने या मेनकोजेब का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
बारिश के बाद खरपतवार नियंत्रण के लिए क्या उपाय सुझाया गया है?
बारिश के बाद खरपतवार की रोकथाम के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह से पेंडीमेथालिन का छिड़काव और manual सफाई की जा सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

पलामू में अगस्त की इस बेमौसम भारी बारिश ने दलहन उत्पादन को बड़ा झटका दिया है, जिससे आने वाले दिनों में बाजार में अरहर दाल की कीमतों में भारी उछाल आने और स्थानीय किसानों के आर्थिक गणित के बिगड़ने की पूरी आशंका है। प्रशासन को तुरंत इस बात का आकलन करना चाहिए कि कितने रकबे में फसल डूबी है ताकि समय रहते राहत पहुंचाई जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह कृषि संकट अब सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कानून-व्यवस्था से जुड़ चुका है। फसल बर्बादी के बाद किसानों के कर्ज के बोझ तले दबने और ग्रामीण इलाकों में बढ़ते आर्थिक तनाव से साहूकारी विवाद या सामाजिक अशांति की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। जिला प्रशासन और कृषि विभाग को तुरंत यह सुनिश्चित करना होगा कि फसल नुकसान का पारदर्शी आकलन हो, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा मिल सके और ग्रामीण स्तर पर किसी भी संभावित वित्तीय अराजकता को रोका जा सके।

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