अलवर जिले के रैणी उपखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले डगडगा गांव में शनिवार को शैक्षणिक अव्यवस्थाओं को लेकर ग्रामीणों का सब्र टूट गया। गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में लंबे समय से अध्यापकों के पद रिक्त होने के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप पड़ी थी। इस स्थिति से आक्रोशित ग्रामीणों और अभिभावकों ने एकजुट होकर विद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा था, जिसके चलते उन्हें यह कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
पांच महीनों से मुख्य विषयों के अध्यापकों का पद खाली
विद्यालय प्रबंधन और स्थानीय निवासियों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस सरकारी स्कूल में पिछले करीब पांच महीनों से गणित और विज्ञान जैसे दो अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों को पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है। शैक्षणिक सत्र के बीच में ही इन विषयों के शिक्षकों के न होने से विद्यार्थियों की दैनिक पढ़ाई पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गणित और विज्ञान किसी भी छात्र के बौद्धिक विकास और आगामी बोर्ड परीक्षाओं के दृष्टिकोण से सबसे महत्वपूर्ण विषय माने जाते हैं। अध्यापकों के अभाव में पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है, जिससे विद्यार्थियों के आने वाले परीक्षा परिणामों और उनके भविष्य पर गहरा संकट मंडरा रहा है।
शनिवार सुबह ग्रामीणों ने एकजुट होकर किया प्रदर्शन
लगातार उपेक्षा से तंग आकर ग्रामीणों और अभिभावकों ने शनिवार की सुबह स्कूल परिसर के बाहर एकत्र होकर शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने विद्यालय के मुख्य दरवाजे पर ताला जड़ दिया और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि जब तक उनके बच्चों को पढ़ाने के लिए स्थायी अध्यापकों की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक वे स्कूल के कपाट नहीं खुलने देंगे। ग्रामीणों का आरोप था कि अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद अधिकारियों ने दिया भरोसा
जैसे ही शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों और स्थानीय प्रशासनिक अमले को विद्यालय में हुई तालाबंदी और ग्रामीणों के भारी विरोध की सूचना मिली, विभाग में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदार अधिकारी तुरंत डगडगा गांव पहुंचे और धरना दे रहे लोगों से सीधी बातचीत शुरू की। अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और स्वीकार किया कि अध्यापकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच लगभग डेढ़ घंटे तक वार्ता का दौर चला, जिसमें समस्या का तत्काल समाधान निकालने पर चर्चा की गई।
सोमवार तक की समय सीमा और उग्र आंदोलन की चेतावनी
लंबे संवाद के बाद शिक्षा अधिकारियों ने ग्रामीणों को लिखित व मौखिक रूप से आश्वस्त किया कि आने वाले सोमवार तक विद्यालय में गणित और विज्ञान के शिक्षकों की नियुक्ति कर दी जाएगी या फिर कोई वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इस ठोस प्रशासनिक आश्वासन के बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने मुख्य द्वार का ताला खोलकर स्कूल का संचालन बहाल करने की अनुमति दी। हालांकि, ग्रामीणों ने जाते-जाते प्रशासन को सख्त अल्टीमेटम दिया है कि यदि सोमवार तक शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हुई, तो वे इससे भी बड़ा और व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जवाबदेही शासन और प्रशासन की होगी।



















