अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने वनडे विश्व कप 2027 की रूपरेखा सामने रख दी है, जिसका आधिकारिक कार्यक्रम 1 अक्टूबर को जारी किया गया था। इस बड़े टूर्नामेंट की तारीखें स्पष्ट होने के बाद दुनिया भर की टीमें अपनी योजनाओं को अंतिम रूप देने में जुट गई हैं। राष्ट्रीय दल में जगह बनाने की उम्मीद पाले खिलाड़ी हर मुकाबले को अपनी दावेदारी साबित करने के अवसर के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि, भारतीय घरेलू मैदानों पर चल रही प्रतिस्पर्धा के बीच रुतुराज गायकवाड़, साई सुदर्शन और देवदत्त पडिक्कल अहम अवसरों का फायदा उठाने में नाकाम रहे हैं।
घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ लगातार दो मुकाबलों में नाकामी
यह तीनों युवा बल्लेबाज इस समय भारतीय धरती पर आयोजित हो रही वनडे सीरीज में इंडिया ए की ओर से खेल रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ चल रही इस द्विपक्षीय सीरीज के शुरुआती दोनों मुकाबलों में इन तीनों का बल्ला पूरी तरह खामोश नजर आया। लगातार दो मैचों में खराब प्रदर्शन करने की वजह से आगामी वैश्विक टूर्नामेंट के लिए तैयार होने वाले भारतीय संभावित दल से इनकी दूरी बढ़ती दिखाई दे रही है। किसी भी राष्ट्रीय चयन प्रक्रिया में ऐसे द्विपक्षीय ए-टीम दौरों का प्रदर्शन बेहद निर्णायक माना जाता है।
सीरीज के शुरुआती दो मैचों में तीनों बल्लेबाजों के आंकड़े
अगर ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ खेले गए पहले दो मैचों के व्यक्तिगत आंकड़ों पर नजर डालें तो तीनों ही बल्लेबाज रन बनाने के लिए संघर्ष करते दिखे हैं। शीर्ष क्रम में खेलने वाले साई सुदर्शन पहले मुकाबले में केवल 1 रन बनाकर पवेलियन लौट गए थे, जबकि दूसरे मैच में वह 16 रन ही बना सके। देवदत्त पडिक्कल की स्थिति और भी अधिक निराशाजनक रही, जहां पहले मैच में वह खाता भी नहीं खोल सके और शून्य पर आउट हुए, वहीं दूसरे मैच में उनके बल्ले से सिर्फ 1 रन निकला। इस सीरीज में इंडिया ए का नेतृत्व संभाल रहे कप्तान रुतुराज गायकवाड़ भी आगे बढ़कर उदाहरण पेश करने में असफल रहे। गायकवाड़ ने पहले मुकाबले में 15 रन का योगदान दिया था और दूसरे मैच में वह 12 रन बनाकर अपना विकेट गंवा बैठे।
विश्व कप टीम में चयन की उम्मीदों पर असर और आगे की राह
इस लचर प्रदर्शन के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह तीनों खिलाड़ी विश्व कप टीम की दौड़ में बने रह पाएंगे। सीधे तौर पर इन्हें मुख्य टीम का प्रबल दावेदार नहीं माना जा रहा है, लेकिन मेगा इवेंट शुरू होने में अभी एक साल का वक्त बाकी है। इस एक साल की अवधि में यदि कोई नियमित दावेदार चोटिल हो जाता है या किसी अन्य कारण से चयन के लिए उपलब्ध नहीं रहता, तो चयनकर्ता बैकअप विकल्पों के रूप में इन तीनों पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, इस तरह की संभावना तभी वास्तविकता में बदल सकती है जब सुदर्शन, पडिक्कल और गायकवाड़ मिले हुए हर मौके को भुनाएं और आगामी मुकाबलों में खुद को ठोस पारियों के दम पर साबित करें।



















