उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से हलचल तेज हो गई है। भारतीय क्रिकेट टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और उनके परिवार के चुनावी राजनीति में कदम रखने की चर्चाओं के बीच उनकी पत्नी हसीन जहां ने भी बड़ा ऐलान कर दिया है। हसीन जहां ने स्पष्ट किया है कि उनके पति या उनके जेठ मोहम्मद हबीब जिस भी विधानसभा क्षेत्र से अपनी किस्मत आजमाएंगे, वह सीधे तौर पर उसी सीट से उनके खिलाफ पर्चा भरेंगी।
चुनावी मैदान में सीधी टक्कर की तैयारी
अमरोहा सदर विधानसभा क्षेत्र को लेकर राजनीतिक हलकों में लंबे समय से अटकलें चल रही हैं कि मोहम्मद शमी या उनके भाई मोहम्मद हबीब इस सीट से चुनावी अखाड़े में उतर सकते हैं। इन चर्चाओं के सामने आने के बाद हसीन जहां ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि चाहे उन्हें किसी राजनीतिक दल का समर्थन और टिकट मिले या फिर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरना पड़े, वह अपने शौहर और उनके परिवार को चुनावी मंच पर सीधी चुनौती देंगी।
हसीन जहां का मानना है कि राजनीति में उतरने की बातें केवल जनता और मीडिया का ध्यान भटकाने की एक चाल हैं। उन्होंने कहा कि वह अमरोहा की जनता के बीच जाकर उनके परिवार के रसूख और घमंड का सामना करेंगी। इसी कानूनी और व्यक्तिगत संघर्ष को मजबूती से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से वह कोलकाता छोड़कर अब देश की राजधानी दिल्ली में बस चुकी हैं।
मॉडलिंग से विवादित पारिवारिक संघर्ष तक का सफर
हसीन जहां एक समय ग्लैमर जगत और मॉडलिंग की दुनिया में सक्रिय थीं। इसके अलावा उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग में कोलकाता नाइट राइडर्स टीम के लिए बतौर चीयरलीडर भी काम किया था। इसके बाद 6 जून 2014 को उनका निकाह तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के साथ हुआ था। शादी के कुछ वर्षों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन इसके बाद दोनों के रिश्ते में गहरी खटास आ गई।
वर्ष 2018 में यह पारिवारिक विवाद खुलकर जनता के सामने आया, जब हसीन जहां ने अपने पति पर गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों में घरेलू हिंसा, विवाहेतर संबंध और यहां तक कि मैच फिक्सिंग जैसी गंभीर शिकायतें शामिल थीं। इन आरोपों के कारण खेल जगत और प्रशासनिक हलकों में काफी खलबली मची थी। हालांकि, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने मैच फिक्सिंग से जुड़े आरोपों की गहन जांच की और बाद में मोहम्मद शमी को पूरी तरह से क्लीन चिट दे दी थी।
अदालतों में चल रही लंबी कानूनी लड़ाई
विवाद सामने आने के बाद दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक विवाद, भरण पोषण और तलाक से जुड़े कई मामले अदालतों की चौखट तक पहुंच गए। जनवरी 2023 में एक जिला अदालत ने आदेश पारित करते हुए मोहम्मद शमी को निर्देश दिया था कि वह हसीन जहां को 50 हजार रुपये और अपनी बेटी की परवरिश के लिए 80 हजार रुपये प्रति माह का अंतरिम गुजारा भत्ता दें।
इसके बाद जुलाई 2025 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस गुजारा भत्ते की राशि में बड़ा इजाफा किया। उच्च न्यायालय ने क्रिकेटर को निर्देश दिया कि वह हसीन जहां के लिए 1.50 लाख रुपये और बेटी के भरण पोषण के लिए 2.50 लाख रुपये का भुगतान करें। इस प्रकार कुल अंतरिम भरण पोषण राशि बढ़कर 4 लाख रुपये प्रति माह तय की गई। यह आदेश मुख्य मामले के अंतिम निस्तारण तक प्रभावी रहने के लिए जारी किया गया था।
हालिया अदालती फैसले और दिल्ली ट्रांसफर की मांग
कानूनी विवादों का सिलसिला वर्ष 2026 में भी बदस्तूर जारी रहा। फरवरी 2026 में देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने हसीन जहां की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने सभी घरेलू हिंसा और गुजारा भत्ते से जुड़े मुकदमों को कोलकाता से दिल्ली की अदालतों में स्थानांतरित करने की गुहार लगाई थी।
इसी बीच मई 2026 में एक अन्य वित्तीय मामले में मोहम्मद शमी को राहत मिली। अलीपुर कोर्ट ने 1 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में क्रिकेटर को सभी आरोपों से बरी कर दिया। यह चेक बाउंस का मुकदमा भी हसीन जहां की तरफ से ही दायर किया गया था। अब अदालती जंग के साथ-साथ यह पारिवारिक तकरार अमरोहा की राजनीतिक जमीन पर भी एक नए टकराव का रूप लेती दिखाई दे रही है।



















