देश के शीर्ष भारतीय प्रबंधन संस्थानों यानी आईआईएम में एमबीए करने की इच्छा रखने वाले कई अभ्यर्थियों को लगता है कि कॉमन एडमिशन टेस्ट यानी कैट में बेहतरीन अंक हासिल कर लेने भर से उनका दाखिला पक्का हो जाएगा। जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है। विशेष रूप से आईआईएम अहमदाबाद, आईआईएम बेंगलुरु और आईआईएम कोलकाता जैसे शीर्ष संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए केवल कैट की परीक्षा पास कर लेना या ऊंचा परसेंटाइल ले आना ही पर्याप्त पैमाना नहीं माना जाता है।
उच्च परसेंटाइल के बाद भी क्यों छूट जाती है सीट
रांची के विशेषज्ञ आदित्य बताते हैं कि कई बार ऐसे छात्र आते हैं जिनका कैट स्कोर 99.9 परसेंटाइल तक होता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आईआईएम बेंगलुरु या अहमदाबाद में जगह नहीं मिल पाती। इसका मुख्य कारण यह है कि चयन प्रक्रिया के दौरान केवल परीक्षा का स्कोर नहीं देखा जाता, बल्कि उम्मीदवार के पूरे प्रोफाइल का बारीक मूल्यांकन किया जाता है। दाखिला पक्का करने के लिए उम्मीदवार के पास कार्य अनुभव, विभिन्न विषयों के सर्टिफिकेट कोर्स और एक बेहतरीन एकेडमिक रिकॉर्ड होना जरूरी है।
साक्षात्कार की मेज पर केवल एक उपलब्धि काफी नहीं
आदित्य के अनुसार जब कोई अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए बैठता है और उसके पास अपनी उपलब्धियों के तौर पर बताने के लिए सिर्फ 99 परसेंटाइल का कैट स्कोर होता है, तो चयन समिति के लिए यह कोई अनोखी बात नहीं होती क्योंकि ऐसे अंकों वाले कई दावेदार कतार में होते हैं। एक मजबूत प्रोफाइल वह माना जाता है जहां अभ्यर्थी के पास अपनी योग्यता दर्शाने के लिए कम से कम 6 से 7 अतिरिक्त पहलू मौजूद हों। इसमें विभिन्न शॉर्ट टर्म कोर्स, उनके प्रमाण पत्र, रुचियां यानी हॉबीज और सामाजिक कार्य यानी सोशल वर्क से जुड़े अनुभव शामिल हैं, जो प्रोफाइल को वजनदार बनाते हैं।
जब किसी उम्मीदवार के प्रोफाइल में विशेष योग्यताएं दर्ज होती हैं, तो साक्षात्कारकर्ता उसी दायरे में रहकर चर्चा करते हैं और उम्मीदवार अपनी विशेषज्ञता पर खुलकर जवाब दे पाता है। इसके विपरीत, यदि प्रोफाइल साधारण या खाली होगा तो साक्षात्कार विशेषज्ञ किसी भी अनपेक्षित क्षेत्र से सवाल पूछ सकते हैं, जिनका सटीक जवाब देना उम्मीदवार के लिए कठिन हो जाता है। हमेशा यही बेहतर रहता है कि साक्षात्कार की दिशा आपकी उपलब्धियों और खासियतों के इर्द-गिर्द घूमे।
दसवीं और बारहवीं के अंकों का बड़ा महत्व
आईआईएम की चयन प्रक्रिया में पिछली स्कूली शिक्षा के अंक बहुत मायने रखते हैं। दसवीं और बारहवीं कक्षा के बोर्ड परीक्षाओं का प्रतिशत अंतिम मूल्यांकन पर गहरा असर डालता है। इसलिए जो छात्र आगे चलकर आईआईएम अहमदाबाद, बेंगलुरु या कोलकाता जैसे प्रतिष्ठित कॉलेजों में प्रवेश पाना चाहते हैं, उन्हें स्कूल स्तर से ही अपने एकेडमिक प्रदर्शन को दुरुस्त रखना चाहिए।
विशेषज्ञों की सलाह है कि दसवीं और बारहवीं के बाद ग्रेजुएशन के दौरान भी छात्रों को खाली नहीं बैठना चाहिए। कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ सर्टिफिकेट कोर्स करने चाहिए, अपनी रुचियों को संवारना चाहिए और अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स को लगातार निखारना चाहिए। वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में सक्रिय भागीदारी से आत्मविश्वास बढ़ता है, जिससे साक्षात्कार के समय बातचीत का स्तर काफी प्रभावी हो जाता है।
शानदार पैकेज और कड़ा मुकाबला
शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में दाखिला लेना छात्रों की सर्वोच्च प्राथमिकता इसलिए भी होता है क्योंकि यहां देश और दुनिया की बड़ी कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के लिए पहुंचती हैं। इन संस्थानों से पास होने वाले छात्रों को औसतन 30 लाख से 37 लाख रुपये तक का सालाना पैकेज मिलता है। हालांकि अंतिम नौकरी और पैकेज छात्र की व्यक्तिगत क्षमता, प्रोफाइल और उसके प्रदर्शन पर ही निर्भर करता है।



















