बांग्लादेश के खिलाफ खेले जा रहे दो मैचों की सीरीज के पहले टेस्ट मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई टीम गंभीर संकट से जूझ रही है। कप्तान पैट कमिंस की अगुवाई में मैदान पर उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए शुरुआती दो दिनों का खेल किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है। मैच में पहले बल्लेबाजी का मौका मिलने के बाद ऑस्ट्रेलिया का पहला दांव बेहद निराशाजनक रहा। टीम का शीर्ष क्रम और मध्य क्रम दोनों ही बांग्लादेशी गेंदबाजों के सामने ताश के पत्तों की तरह बिखर गए। इसके बाद जब ऑस्ट्रेलिया को अपनी गेंदबाजी के दम पर वापसी की उम्मीद थी, तब भी उसके प्रमुख गेंदबाज प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक बांग्लादेशी बल्लेबाजों ने मैच पर पूरी तरह अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। अब अगर ऑस्ट्रेलिया को इस मुकाबले को बचाना है या जीत दर्ज करनी है, तो उसे करीब 16 साल पुराने एक ऐतिहासिक करिश्मे को दोहराना होगा।
बांग्लादेश का पहली पारी में दबदबा और 153 रनों की मजबूत बढ़त
दूसरे दिन के खेल में बांग्लादेश के बल्लेबाजों ने अनुशासित और आक्रामक बल्लेबाजी का बेहतरीन प्रदर्शन किया। ऑस्ट्रेलियाई आक्रमण को बेअसर करते हुए बांग्लादेश ने बोर्ड पर रनों का विशाल पहाड़ खड़ा कर दिया। दिन का खेल समाप्त होने तक बांग्लादेश की टीम ने पहली पारी में 6 विकेट गंवाकर 351 रन बना लिए हैं। मैदान पर इस समय मेहदी हसन मिराज 32 रन बनाकर टिके हुए हैं, जबकि उनका साथ हसन महमूद 13 रन बनाकर दे रहे हैं। दो दिनों के खेल के बाद स्थिति यह है कि बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया पर 153 रनों की विशाल बढ़त हासिल कर ली है। तीसरे दिन जब खेल दोबारा शुरू होगा, तो बांग्लादेश की कोशिश इस बढ़त को और अधिक बढ़ाकर ऑस्ट्रेलिया को पूरी तरह दबाव में डालने की होगी।
16 साल पुराना इतिहास: 2010 के पाकिस्तान मैच का करिश्मा
क्रिकेट आंकड़ों के लिहाज से देखें तो पहली पारी में 100 से अधिक रनों से पिछड़ने के बाद टेस्ट मैच जीतना किसी भी टीम के लिए बेहद कठिन माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया का अपना इतिहास गवाह है कि जब भी उसने पहली पारी में 100 से अधिक रनों की बढ़त गंवाई है, उसे अधिकांश मुकाबलों में हार का ही सामना करना पड़ा है। ऑस्ट्रेलियाई टीम ने आखिरी बार ऐसी परिस्थिति से उबरकर जीत साल 2010 में दर्ज की थी। तब पाकिस्तान के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई टीम पहली पारी के आधार पर 100 से ज्यादा रनों से पीछे चल रही थी, लेकिन दूसरी पारी में शानदार खेल दिखाते हुए उसने उस मुकाबले को अपने नाम किया था। 2010 के बाद से पिछले 16 सालों में कंगारू टीम जब भी 100 से अधिक रनों से पिछड़ी, वह मैच हार गई। अब पैट कमिंस की टीम को इस शर्मनाक रिकॉर्ड को टूटने से बचाने के लिए 2010 वाले इतिहास को फिर से जिंदा करना होगा, जो मौजूदा परिस्थितियों में कतई आसान नहीं दिखता।
दूसरी नई गेंद का जलवा: 11 रन में गिरे 3 विकेट
दूसरे दिन के खेल के आखिरी सत्र में ऑस्ट्रेलिया के लिए राहत की एक छोटी सी किरण देखने को मिली। जब बांग्लादेशी बल्लेबाज आसानी से रन बना रहे थे और एक बहुत बड़े स्कोर की तरफ बढ़ रहे थे, तब पैट कमिंस ने दूसरी नई गेंद लेने का फैसला किया। यह रणनीति ऑस्ट्रेलिया के हक में साबित हुई। नई लाल गेंद मिलते ही ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों को स्विंग और उछाल मिलने लगा, जिसके सामने बांग्लादेश का मध्यक्रम डगमगा गया। ऑस्ट्रेलिया ने महज 11 रन देकर बांग्लादेश के 3 अहम विकेट चटका लिए। इस झटके के कारण बांग्लादेश का स्कोर 351 रन पर 6 विकेट हो गया, वरना मेजबान टीम इससे भी अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच सकती थी।
तीसरे दिन की सुबह का प्लान और ऑस्ट्रेलिया का आगे का रास्ता
मैच का तीसरा दिन दोनों ही टीमों के लिए निर्णायक साबित होने वाला है। सुबह का पहला सत्र इस टेस्ट मैच की दिशा तय करेगा। ऑस्ट्रेलिया की रणनीति होगी कि वह तीसरे दिन के पहले घंटे में ही बांग्लादेश के बचे हुए 4 विकटों को जल्द से जल्द समेट दे, ताकि मेजबान टीम की बढ़त को सीमित रखा जा सके। वहीं दूसरी ओर, क्रीज पर मौजूद मेहदी हसन मिराज और हसन महमूद की जोड़ी बांग्लादेश की बढ़त को और आगे ले जाने के इरादे से मैदान में उतरेगी। अगर बांग्लादेश बड़ी बढ़त बनाने में सफल हो जाता है, तो ऑस्ट्रेलिया के लिए दूसरी पारी में बल्लेबाजी करना और मैच में वापसी करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।



















