चार दिवसीय प्रथम श्रेणी मुकाबले के पहले दिन भारत A की टीम ने शुरुआती संकट से उबरते हुए मजबूत वापसी की. कंगारू टीम के गेंदबाजों के सामने शीर्ष क्रम के जल्दी लड़खड़ाने के बावजूद घरेलू टीम ने पहले दिन का खेल समाप्त होने तक 257 रन का सम्मानजनक स्कोर खड़ा कर लिया. इस संघर्षपूर्ण दिन की सबसे बड़ी उपलब्धि चोट से उबरकर लौटे सलामी बल्लेबाज साई सुदर्शन, युवा विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार कुशाग्र और ऑलराउंडर तनुष कोटियन के संयमित अर्धशतक रहे, जिन्होंने ऑस्ट्रेलियाई आक्रमण का डटकर सामना किया.
चोट के बाद साई सुदर्शन की जुझारू पारी
पैर की चोट के कारण एक महीने से अधिक समय तक क्रिकेट मैदान से दूर रहे साई सुदर्शन ने बेहतरीन वापसी की. पैर में चोट लगने की वजह से वह श्रीलंका के हालिया टेस्ट दौरे और दलीप ट्रॉफी में हिस्सा नहीं ले पाए थे. नई दिल्ली में खेले जा रहे इस मुकाबले में सलामी बल्लेबाज के रूप में क्रीज पर उतरे बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने जबर्दस्त तकनीकी अनुशासन दिखाया. प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में एक महीने बाद अपनी पहली पारी खेलते हुए उन्होंने 85 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया. सुदर्शन ने कुल 103 गेंदों का सामना करते हुए 57 रनों की धैर्यपूर्ण पारी खेली. उन्होंने तीसरे विकेट के लिए शैख रशीद के साथ 58 रनों की अहम साझेदारी भी की. हालांकि, वह अपनी पारी को और बड़ा नहीं बना सके जब कोरी रॉकिचियोली की गेंद को फ्लिक करने के प्रयास में गेंदबाज ने अपनी ही गेंद पर उनका कैच लपक लिया.
शीर्ष क्रम का पतन और शुरुआती झटके
भारत A की शुरुआत काफी निराशाजनक रही थी. अमन मोखाडे सस्ते में पवेलियन लौट गए, जबकि टीम की अगुआई कर रहे देवदत्त पडिक्कल भी क्रीज पर ज्यादा देर नहीं टिक सके. श्रीलंका के खिलाफ पिछली टेस्ट श्रृंखला में दो अर्धशतक जड़कर श्रृंखला के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए पडिक्कल इस मैच में बल्ले से योगदान देने में नाकाम रहे. इन दोनों के जल्दी आउट होने के बाद स्कोर दो विकेट पर 78 रन हो गया था. इसके बाद मध्यक्रम भी तेजी से ढह गया और दिन के दूसरे सत्र के पहले आधे घंटे के खेल के भीतर ही मेजबान टीम ने महज 97 रन के स्कोर पर अपने 5 प्रमुख विकेट गंवा दिए थे.
कुशाग्र और कोटियन के बीच शतकीय साझेदारी
मुश्किल हालात में संकटमोचक की भूमिका निभाते हुए ऑलराउंडर तनुष कोटियन और 21 वर्षीय कुमार कुशाग्र ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को बैकफुट पर धकेल दिया. चेन्नई में आयोजित दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन की तरफ से शतक लगाने वाले झारखंड के बल्लेबाज कुशाग्र ने ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट गेंदबाजों ब्रेंडन डॉगेट और टॉड मर्फी की गेंदों का पूरे आत्मविश्वास से सामना किया. कुशाग्र ने अपनी पारी की शुरुआत स्पिनर कोरी रॉकिचियोली पर मिड-ऑफ से चौका जड़कर की और फिर 'वी' तथा कवर्स के क्षेत्र में दर्शनीय शॉट लगाते हुए 103 गेंदों में अपना पचासा पूरा किया. कुशाग्र और भारत A के नियमित सदस्य कोटियन ने छठे विकेट के लिए 138 रनों की ठोस साझेदारी की.
क्रैम्प्स से रिटायर्ड हर्ट हुए कुशाग्र, कोटियन क्रीज पर डटे
कुशाग्र शतक बनाने की ओर अग्रसर थे, लेकिन मांसपेशियों में खिंचाव (क्रैम्प्स) के कारण उन्हें 160 गेंदों पर 82 रन बनाने के बाद रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा. दूसरी तरफ कोटियन ने 90 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और दिन का खेल खत्म होने तक 68 रन बनाकर नाबाद लौटे. उन्होंने स्पिनर मर्फी को कवर्स के जरिए शानदार चौका लगाकर अपनी टाइमिंग और ताकत की नुमाइश की. पहले दिन स्टंप्स के समय कोटियन के साथ शम्स मुलानी 43 गेंदों में 10 रन बनाकर नाबाद रहे, जिससे टीम ने शुरुआती दबाव पूरी तरह समाप्त कर दिया.


















