अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धाओं में जीत हासिल करने की होड़ कई बार खेल भावना और नैतिक सीमाओं को पीछे छोड़ देती है। आधुनिक क्रिकेट में हर हाल में जीत दर्ज करने की इसी मानसिकता का एक विवादित नजारा जापान के खिलाफ खेले गए मुकाबले में देखने को मिला। भारतीय टीम, उसके कप्तान श्रेयस अय्यर और स्पिनर अक्षर पटेल ने मैदान पर अंपायर के एक अहम फैसले के खिलाफ जिस आक्रामक अंदाज में विरोध दर्ज कराया, उसने क्रिकेट जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। विश्व चैंपियन का दर्जा रखने वाली भारतीय टीम को इस गैर-जरूरी बर्ताव के चलते सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना और उपहास का सामना करना पड़ रहा है।
अंतिम ओवर में अंपायर के फैसले पर खिलाड़ियों का कड़ा विरोध
यह पूरा विवाद पांच-पांच ओवर के सीमित मुकाबले के आखिरी ओवर के दौरान पैदा हुआ। मैच का रुख तय करने वाले इस निर्णायक ओवर की जिम्मेदारी अक्षर पटेल के हाथों में थी। ओवर के दौरान अक्षर ने एक गेंद फेंकी जो लेग स्टंप से काफी बाहर थी और पहली नजर में पूरी तरह अवैध लग रही थी। मैदानी अंपायर ने नियमों के अनुसार उसे तुरंत वाइड गेंद करार दे दिया। हालांकि, फैसला आते ही भारतीय खिलाड़ी अंपायर के फैसले को चुनौती देने आ पहुंचे। कप्तान श्रेयस अय्यर और गेंदबाज अक्षर पटेल अन्य साथियों के साथ मिलकर अंपायर के नजदीक पहुंच गए और अपने रसूख के दम पर फैसले पर दोबारा विचार करने का दबाव बनाने लगे।
भारतीय खेमे के इस कड़े विरोध और दबाव के बीच मैदानी अंपायर क्रिस थुरगेट और ब्राउन ने पिच के बीच आपस में विचार-विमर्श किया। दोनों अंपायरों ने बातचीत के बाद अपने मूल निर्णय को वापस ले लिया और उस गेंद को वैध डिलीवरी करार दे दिया। अंपायर के इस तरह झुकने और निर्णय पलटने के बाद यह गंभीर सवाल उठ खड़ा हुआ कि क्या विश्व चैंपियन जैसी दिग्गज टीम का एक उभरती हुई टीम के खिलाफ ऐसा आक्रामक रुख अपनाना खेल के मर्यादा के अनुकूल था।
मैच का रुख बदलने वाली पांचवें ओवर की तीसरी गेंद
इस पूरे नाटकीय घटनाक्रम का केंद्र पांचवें ओवर की तीसरी गेंद बनी। क्रीज पर जापान के बाएं हाथ के बल्लेबाज एलेकजेंडर शिराए मौजूद थे, जबकि सामने अक्षर पटेल मैच बचाने की जुगत में गेंदबाजी कर रहे थे। इस तीसरी गेंद से ठीक पहले भी अक्षर पटेल एक वाइड गेंद फेंक चुके थे, जिस पर बल्लेबाज एलेकजेंडर शिराए ने रिवर्स स्वीप शॉट खेलने का प्रयास किया था और अंपायर ने उसे बिना किसी हिचक के वाइड दिया था।
इसके बाद तीसरी गेंद पर बल्लेबाज ने फिर से रिवर्स स्वीप खेलने की कोशिश की। यह गेंद पिछली वाइड की तुलना में लेग स्टंप से कहीं अधिक बाहर निकल गई। जैसे ही अंपायर ने इसे वाइड घोषित करने का इशारा किया, भारतीय खेमे में खलबली मच गई। श्रेयस अय्यर और अक्षर पटेल ने फौरन अंपायर को घेर लिया और यह तर्क पेश किया कि बल्लेबाज ने अपना स्टांस बदलकर शॉट खेलने की कोशिश की थी, लिहाजा इसे वाइड नहीं माना जाना चाहिए। लगातार बढ़ते विरोध को देखते हुए अंपायरों ने अपना फैसला रद्द कर दिया। अंततः भारतीय टीम इस मुकाबले को केवल 2 रन के अंतर से जीतने में सफल रही। यदि वह फैसला वापस नहीं लिया जाता और अतिरिक्त रन जुड़ता, तो यह रोमांचक मैच टाई की स्थिति में पहुंच जाता।
आईसीसी का स्विच हिट नियम और तकनीकी हकीकत
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी आईसीसी के मौजूदा नियमों के अनुसार, यदि कोई बल्लेबाज गेंदबाज के हाथ से गेंद छूटने से ठीक पहले या उसी क्षण रिवर्स हिट अथवा स्विच हिट खेलने का प्रयास करता है, तो विकेट के दोनों किनारों (ऑफ और लेग) को नियमों की नजर में ऑफ-साइड जैसा ही दर्जा दिया जाता है। अंपायरों ने इसी नियम का हवाला देते हुए माना कि बल्लेबाज ने क्रीज पर अपनी स्थिति बदली थी, जिसके आधार पर लेग-साइड की वाइड गेंद को खारिज कर दिया गया।
हालांकि, वीडियो रीप्ले पर गौर करने से एक अलग ही तकनीकी पहलू सामने आता है। रीप्ले से स्पष्ट होता है कि बल्लेबाज ने अपनी ग्रिप में कोई बदलाव नहीं किया था, बल्कि उसने केवल सामान्य रिवर्स स्वीप शॉट खेलने का प्रयास किया था। विवाद को गहराने वाली बात यह भी रही कि इसी ओवर की पूर्ववर्ती गेंद पर भी बल्लेबाज ने बिल्कुल ऐसा ही रिवर्स स्वीप आजमाया था और उस वक्त अंपायर ने गेंद को वाइड करार दिया था। ऐसे में यह सवाल अनसुलझा रह जाता है कि एक जैसी परिस्थिति में एक गेंद वाइड और दूसरी पूरी तरह वैध कैसे मानी जा सकती है।
बिना डीआरएस के अंपायर पर दबाव बनाने को लेकर उठे सवाल
क्रिकेट विशेषज्ञों और खेल प्रेमियों के बीच मुख्य असहमति इस बिंदु पर है कि बल्लेबाज एलेकजेंडर शिराए ने शॉट खेलने के लिए अपनी शारीरिक मुद्रा गेंद हाथ से छूटने के काफी बाद में बदली थी। मुकाबले में डिसीजन रिव्यू सिस्टम यानी डीआरएस की तकनीक उपलब्ध नहीं थी। ऐसी स्थिति में केवल शारीरिक हाव-भाव और मौखिक दबाव के जरिए अंपायरों को निर्णय बदलने पर विवश करने को लेकर भारतीय टीम की भारी आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया मंच ट्विटर पर चल रही बहसों में प्रशंसकों का कहना है कि अंपायर की मानवीय त्रुटि अपनी जगह हो सकती है, लेकिन जापान जैसी बेहद कमजोर और अनुभवहीन टीम के खिलाफ भारतीय टीम द्वारा ऐसा दबाव बनाया जाना खेल भावना के सर्वथा विपरीत है।



















