अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में किया 0.25% का इजाफा, 2023 के बाद पहली बार सख्त हुआ रुखकच्चे तेल में भारी उथल-पुथल: मिडिल ईस्ट सप्लाई और ग्लोबल तनाव के बीच ऊर्जा बाजार में दबावकन्नौज के रूह इत्र की महक क्यों बिकती है 50 लाख रुपये से भी ज्यादा मेंआईसीसी महिला टी20 रैंकिंग में चौथे पायदान पर पहुंचीं शेफाली वर्मा, मंधाना को हुआ नुकसानमहिंद्रा ने नए अवतार में उतारी थार ओजी, 10.32 लाख रुपये से शुरू हुई कीमतमहिला क्रिकेट में भारत के नाम हुआ स्वर्णिम पदक, रिंग और मैट पर भी जारी रहा दमदार प्रदर्शनबिली जीन किंग कप: चेक गणराज्य ने ग्रेट ब्रिटेन को थमाई 2-0 से शिकस्त, अंतिम चार में बनाई जगहमेष राशिफल 23 सितंबर: कार्यक्षेत्र में मिलेगा वरिष्ठों का भरोसा, वित्तीय मामलों में जल्दबाजी से बचेंभट्टा बस्ती में खूनी वारदात, पोते पर चाकू से दादी की जान लेने का आरोपहार्डवेयर की विफलता के बाद रैबिट का बड़ा बदलाव, अब फोन और कंप्यूटर पर काम करेगा नया एजेंटिक ओएस3
अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में किया 0.25% का इजाफा, 2023 के बाद पहली बार सख्त हुआ रुखव्यापार
22 सित॰ 2026, 10:27 pm (27 मिनट पहले)· 2

अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में किया 0.25% का इजाफा, 2023 के बाद पहली बार सख्त हुआ रुख

फेडरल रिजर्व ने मुद्रास्फीति पर लगाम कसने के लिए ब्याज दरें 0.25 प्रतिशत बढ़ा दी हैं, जिससे नया दायरा 3.75% से 4% हो गया है। वर्ष 2023 के बाद पहली बार नीतिगत दरों में यह बढ़ोतरी सर्वसम्मति से की गई है।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिदृश्य पर गहरा असर डालने वाले एक अहम कदम के तहत केंद्रीय बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है। इस ताजा फेरबदल के साथ फेडरल फंड्स रेट अब 3.75% से 4% के दायरे में पहुंच गया है। साल 2023 के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिकी नियामक ने दरों को बढ़ाने का रुख अपनाया है। केंद्रीय बैंक की नीति निर्धारक इकाई फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने लगातार बनी हुई जिद्दी महंगाई पर नियंत्रण पाने के मकसद से यह निर्णय लिया है।

महंगाई और आर्थिक रफ्तार का संतुलन

केंद्रीय बैंक की इस सख्त नीति के केंद्र में लगातार ऊंचे स्तर पर टिकी हुई महंगाई दर है। अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में उपभोक्ता मुद्रास्फीति दर 3.4 फीसदी दर्ज की गई थी, जो ठीक उससे पिछले महीने यानी जुलाई के स्तर के समान बनी हुई थी। हालांकि मुद्रास्फीति में मासिक आधार पर नई तेजी नहीं देखी गई, लेकिन यह अब भी नीति निर्धारकों के 2 फीसदी के तय दीर्घकालिक लक्ष्य से खासी ऊपर बनी हुई है।

नियामक ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि देश की सामान्य आर्थिक गतिविधियां काफी ठोस रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं। घरेलू स्तर पर उपभोक्ता खर्च मजबूत बना हुआ है, जबकि प्रोडक्टिविटी और पूंजीगत निवेश में भी सकारात्मक मजबूती देखने को मिली है। अर्थव्यवस्था के इन मजबूत बुनियादी पैमानों के बीच कीमतों को दोबारा काबू में लाने के उद्देश्य से उधार लागत बढ़ाने का रास्ता चुना गया।

ऊर्जा की कीमतों, आयात शुल्कों और एआई बूम से बढ़ा दबाव

अमेरिकी बाजार में मूल्य वृद्धि के पीछे केवल सामान्य मांग ही नहीं, बल्कि कई वैश्विक और रणनीतिक कारक भी सक्रिय हैं। मध्य पूर्व में जारी रणनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इसके साथ ही अमेरिकी टैरिफ नीतियों और मजबूत उपभोक्ता मांग ने भी वस्तुओं के दामों पर लगातार दबाव बनाए रखा है।

इसके अतिरिक्त, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रहे पूंजी निवेश और उससे जुड़े उपकरणों व सेवाओं की तीव्र मांग को भी मुद्रास्फीति के दबावों का प्रमुख कारण माना जा रहा है। इन तमाम परिस्थितियों के चलते फेड के लिए महंगाई को वापस 2 फीसदी के सुरक्षित दायरे में समेटना एक जटिल चुनौती बन गया है।

फैसले के पक्ष में पड़े सभी 12 वोट

नीतिगत दरों में इस बढ़ोतरी को लेकर नीति निर्धारकों के बीच पूर्ण सहमति देखने को मिली और यह निर्णय 12-0 के एकतरफा मत से पारित हुआ। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उसका मुख्य एजेंडा मूल्य स्थिरता को बहाल करना है ताकि आर्थिक ढांचा सुरक्षित रहे। भविष्य में दरों के मार्ग को लेकर रुख पूरी तरह से आने वाले आर्थिक आंकड़ों और मुद्रास्फीति के नए पैमानों की समीक्षा पर टिका रहेगा।

घरेलू और उभरते बाजारों पर असर की संभावना

अमेरिका में लिए गए इस नीतिगत फैसले की गूंज दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में सुनाई देने के पूरे आसार हैं। भारतीय वित्तीय तंत्र के संदर्भ में यह बदलाव शेयर बाजार, विदेशी पूंजी प्रवाह और रुपये की विनिमय दर को सीधे प्रभावित कर सकता है। जब अमेरिका में संपत्तियों पर मिलने वाला प्रतिफल आकर्षक होने लगता है, तब विदेशी निवेशक अक्सर पूंजी को अमेरिकी संपत्तियों की ओर मोड़ते हैं, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर दबाव पैदा हो सकता है।

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सवाल-जवाब

अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कितनी बढ़ोतरी की है?
फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की है, जिसके बाद नया दायरा 3.75% से 4% हो गया है।
दरों में यह बढ़ोतरी कितने समय बाद हुई है?
यह 2023 के बाद पहली बार है जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों में इजाफा किया है।
अमेरिका में इस समय मुद्रास्फीति की क्या स्थिति है?
अगस्त में उपभोक्ता महंगाई दर 3.4 प्रतिशत रही, जो जुलाई के बराबर थी और फेड के 2 प्रतिशत के तय लक्ष्य से काफी अधिक बनी हुई है।
ब्याज दर बढ़ाने के फैसले पर नीति निर्धारकों का रुख क्या रहा?
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के सदस्यों ने इस फैसले का पूर्ण समर्थन किया और यह प्रस्ताव 12-0 के एकतरफा मत से पारित हुआ।
महंगाई बढ़ाने में किन प्रमुख कारणों की भूमिका रही है?
मध्य पूर्व में तनाव के कारण ऊर्जा की ऊंची कीमतें, टैरिफ नीतियां और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी मजबूत मांग प्रमुख कारण रहे हैं।
इस फैसले का भारतीय बाजारों पर क्या असर हो सकता है?
अमेरिकी दरें बढ़ने से विदेशी निवेशक डॉलर संपत्तियों की तरफ आकर्षित हो सकते हैं, जिससे भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर दबाव देखने को मिल सकता है।
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