क्रिकेट में कुछ पल ऐसे होते हैं जो स्कोरकार्ड से कहीं ज्यादा याद रखे जाते हैं। धर्मशाला में भारत और अफगानिस्तान के बीच चल रहे पहले वनडे में ठीक ऐसा ही एक पल सामने आया, जब भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने पहली स्लिप में हवा में गोता लगाकर एक हाथ से ऐसी पकड़ बनाई कि देखने वाले हर शख्स की सांसें थम गईं। मैदान से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह एक ही चर्चा है — और कई लोग इसे सीधे-सीधे वनडे इतिहास का सबसे शानदार स्लिप कैच करार दे रहे हैं।
22वें ओवर में बदला मैच का मिजाज
यह पूरा वाकया अफगानिस्तान की पारी के 22वें ओवर का है। भारत के लिए इस मुकाबले में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच, यानी डेब्यू खेल रहे युवा स्पिनर हर्ष दुबे गेंदबाजी कर रहे थे। ओवर की चौथी गेंद पर उन्होंने रफ्तार थोड़ी कम रखी और गेंद को ऑफ-स्टंप से बाहर की ओर फ्लाइट देकर डाला। यही चालाकी काम कर गई।
दूसरे छोर पर खड़े अफगान बल्लेबाज अल्लाह गजनफर ने क्रीज से कुछ कदम पीछे हटकर इस गेंद पर ताकत से प्रहार करने की कोशिश की। मगर गेंद की धीमी गति और टर्न ने उन्हें छका दिया। बल्ला सही जगह नहीं पहुंच पाया और गेंद मोटे ऊपरी किनारे से लगकर बेहद तेज रफ्तार के साथ पहली स्लिप की बाईं ओर हवा में उछल गई।
पलक झपकने का भी वक्त नहीं था
गेंद इतनी तेजी से कटकर निकली थी कि किसी भी फील्डर के पास सोचने, यहां तक कि पलक झपकने तक का समय नहीं बचा था। ऐसे हालात में आमतौर पर कैच छूट जाते हैं। लेकिन गिल ने यहां चीते जैसी फुर्ती दिखाई। पल भर में उन्होंने अपनी बाईं ओर पूरी ताकत से हवा में छलांग लगाई, बाएं हाथ को जितना संभव था उतना आगे बढ़ाया और उसी एक हाथ से इस असंभव-सी दिखने वाली गेंद को थाम लिया।
इस कैच को असाधारण बनाने वाली बात सिर्फ छलांग नहीं थी, बल्कि उसके बाद का नियंत्रण था। जमीन पर गिरते वक्त भी गिल का अपने शरीर और गेंद, दोनों पर गजब का संतुलन बना रहा, जिसकी वजह से गेंद उनकी हथेली से जरा भी नहीं फिसली। यही वह बारीकी है जिसने इस पकड़ को साधारण अच्छे कैच से उठाकर ऐतिहासिक श्रेणी में पहुंचा दिया।
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैला वीडियो
जैसे ही इस कैच का वीडियो ऑनलाइन पहुंचा, यह कुछ ही पलों में आग की तरह फैल गया। फैंस के साथ-साथ दिग्गज क्रिकेटर भी गिल की फील्डिंग की तुलना दुनिया के महानतम स्लिप फील्डरों से करने लगे। टाइमलाइन इस एक ही क्लिप से भर गई और हर तरफ कप्तान की फुर्ती तथा एकाग्रता की तारीफ हो रही है। एक डेब्यू गेंदबाज की चतुराई और एक कप्तान की चीते जैसी छलांग ने मिलकर धर्मशाला के इस मुकाबले को यादगार बना दिया।













