पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का इंग्लैंड दौरा बेहद निराशाजनक साबित हो रहा है। तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला के शुरुआती दो मुकाबलों में करारी हार झेलने के बाद मेहमान टीम श्रृंखला गंवा चुकी है। इस हार के साथ ही पाकिस्तानी क्रिकेट के इतिहास में एक ऐसा काला पन्ना दर्ज हो गया है, जो उसने पिछले 39 सालों में नहीं देखा था। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अब पाकिस्तान के नाम जीतने वाले मैचों से ज्यादा हारने वाले मैचों का रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। कप्तानी में बदलाव और बाबर आजम की वापसी के बावजूद टीम इस भारी गिरावट को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है।
इंग्लैंड दौरे पर बल्लेबाजी का घोर निराशाजनक प्रदर्शन
इंग्लैंड के खिलाफ चल रही इस श्रृंखला में पाकिस्तानी बल्लेबाजों का प्रदर्शन अत्यंत निराशाजनक रहा है। पूरी टीम चार पारियों में बल्लेबाजी करने के बावजूद एक बार भी 200 रन के आंकड़े को छूने में नाकाम रही। श्रृंखला के पहले टेस्ट मैच में मेजबान इंग्लैंड ने पाकिस्तान को एक पारी और 103 रन के विशाल अंतर से हराया था। उस मैच की पहली पारी में पाकिस्तानी टीम महज 117 रन पर ढेर हो गई थी, जबकि दूसरी पारी में भी पूरी टीम सिर्फ 135 रन ही बना सकी थी।
दूसरे टेस्ट मैच में भी स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख और इंग्लैंड ने 194 रन से शानदार जीत दर्ज की। इस मुकाबले की पहली पारी में पाकिस्तानी बल्लेबाजी पूरी तरह चरमरा गई और टीम केवल 110 रन पर ऑलआउट हो गई। हालांकि दूसरी पारी में टीम ने कुछ संघर्ष दिखाया, लेकिन पूरी टीम 194 रन बनाकर पवेलियन लौट गई। चार लगातार पारियों में 200 से कम का स्कोर पाकिस्तानी बल्लेबाजी क्रम की तकनीकी और मानसिक कमजोरियों को उजागर करता है।
39 साल बाद बिगड़ा जीत और हार का ऐतिहासिक संतुलन
इंग्लैंड के हाथों दूसरे टेस्ट मैच में मिली पराजय के बाद पाकिस्तानी टेस्ट टीम का समग्र रिकॉर्ड बेहद खराब स्थिति में पहुंच गया है। पाकिस्तान ने अपने संपूर्ण टेस्ट इतिहास में अब तक कुल 473 मुकाबले खेले हैं। इन 473 मैचों में से टीम को 153 मैचों में जीत हासिल हुई है, जबकि 154 मैचों में हार का सामना करना पड़ा है। वहीं 166 मुकाबले बिना किसी नतीजे के ड्रॉ पर समाप्त हुए हैं। इस तरह अब पाकिस्तान के नाम टेस्ट मैचों में जीत से एक अधिक हार दर्ज हो चुकी है।
पाकिस्तान क्रिकेट के इतिहास में ऐसा मौका लगभग चार दशक बाद आया है। इससे पहले साल 1987 में जब पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच ओवल के मैदान पर टेस्ट मैच खेला गया था, तब वह मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ था। उस समय तक पाकिस्तानी टीम ने 170 टेस्ट मैच खेले थे, जिनमें से उसने 39 मैच जीते थे और 40 मैचों में उसे हार मिली थी। 1987 के उस दौर के बाद से पाकिस्तान का जीत-हार का अनुपात हमेशा सकारात्मक या बराबरी पर रहा था, लेकिन अब इंग्लैंड की सरजमीं पर यह रिकॉर्ड फिर से शर्मनाक स्थिति में पहुंच गया है।
कप्तानी में बदलाव के बावजूद नहीं बदली टीम की किस्मत
श्रृंखला के दौरान पाकिस्तानी टीम के नेतृत्व में भी उथल-पुथल देखने को मिली। बाबर आजम को एक बार फिर से राष्ट्रीय टीम की कप्तानी सौंपी गई थी। हालांकि, चोटिल होने के कारण बाबर आजम श्रृंखला का पहला टेस्ट मैच नहीं खेल सके थे। उनकी गैरमौजूदगी में सलमान अली आगा ने पहले टेस्ट मैच में कप्तानी का जिम्मा संभाला था, जहां टीम को एक पारी और 103 रन से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी।
दूसरे टेस्ट मैच में कप्तान के रूप में बाबर आजम की मैदान पर वापसी हुई। समर्थकों को उम्मीद थी कि बाबर आजम की मौजूदगी से टीम का मनोबल बढ़ेगा और नतीजे में बदलाव आएगा। लेकिन मैदान पर परिस्थितियां नहीं बदलीं और पाकिस्तानी टीम को एक बार फिर 194 रन की भारी पराजय का सामना करना पड़ा। लगातार दो हार के बाद कप्तानी और टीम प्रबंधन की रणनीतियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।



















