अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट के मैदान पर तीसरे नंबर की बल्लेबाजी पोजिशन को किसी भी टीम के संतुलन के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। जब सलामी जोड़ी सस्ते में पवेलियन लौट जाती है, तो तीसरे क्रम पर उतरने वाले खिलाड़ी पर नई चमकती गेंद का सामना करने और पारी को संभालने की दोहरी चुनौती होती है। वहीं, अगर ओपनिंग पार्टनरशिप बेहतरीन शुरुआत देती है, तो इसी बल्लेबाज के पास स्कोरबोर्ड को विशाल रूप देने का शानदार अवसर रहता है। भारतीय क्रिकेट इतिहास में इस महत्वपूर्ण स्थान पर कई महान खिलाड़ियों ने अपनी काबिलियत साबित की है, लेकिन जब बाएं हाथ के बल्लेबाजों के आंकड़ों पर नजर डालते हैं तो विनोद कांबली का नाम सबसे ऊपर दिखाई देता है।
कांबली के नाम दर्ज है शीर्ष स्थान
भारत के लिए तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए सबसे ज्यादा टेस्ट शतक लगाने का कीर्तिमान विनोद कांबली के खाते में दर्ज है। अपने छोटे लेकिन बेहद असरदार टेस्ट करियर के दौरान कांबली ने तीसरे क्रम पर उतरकर 4 बार शतकीय पारियां खेलीं। उनकी बल्लेबाजी शैली में जबरदस्त आक्रामकता के साथ-साथ मैदान के चारों तरफ रचनात्मक शॉट्स खेलने की अदभुत क्षमता शामिल थी। विपरीत परिस्थितियों में क्रीज पर उतरकर उन्होंने कई बार भारतीय टीम के स्कोर को मजबूती प्रदान की। इस सूची में पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली 3 शतकों के साथ दूसरे स्थान पर मौजूद हैं। सौरव गांगुली ने भी तीसरे नंबर पर जिम्मेदारी संभालते हुए भारतीय टीम के लिए कई यादगार पारियां खेली हैं।
गॉल टेस्ट में देवदत्त पडिक्कल का नया कारनामा
इस विशिष्ट क्लब में सबसे ताजा प्रविष्टि युवा बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल की हुई है। श्रीलंका के खिलाफ गॉल स्टेडियम में खेले जा रहे टेस्ट मुकाबले में पडिक्कल ने तीसरे नंबर की जिम्मेदारी निभाते हुए अपने टेस्ट करियर का पहला शतक जड़ा। उन्होंने मैदान पर उत्कृष्ट तकनीक और असाधारण धैर्य का परिचय देते हुए अपनी शतकीय पारी पूरी की। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत पडिक्कल उन चुनिंदा भारतीय बाएं हाथ के बल्लेबाजों के समूह में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में तीसरे स्थान पर बल्लेबाजी करते हुए शतकीय आंकड़ा छुआ है। उनकी इस पारी ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह लंबी अवधि के प्रारूप में भारतीय टीम के लिए इस महत्वपूर्ण क्रम पर एक मजबूत विकल्प बन सकते हैं।
इस खास क्लब में शामिल अन्य भारतीय दिग्गज
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में तीसरे नंबर पर शतक जड़ने वाले बाएं हाथ के बल्लेबाजों की सूची बहुत लंबी नहीं है, लेकिन इसमें शामिल हर नाम का अपना एक विशेष महत्व रहा है। पडिक्कल और गांगुली से पहले भी कई दिग्गजों ने इस क्रम पर अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया है। इस पूरी सूची पर नजर डालें तो विनोद कांबली 4 शतकों के साथ सबसे आगे बने हुए हैं। उनके बाद सौरव गांगुली 3 शतकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इनके अलावा सलिम दुर्रानी ने तीसरे क्रम पर 1 शतक बनाया था। बापू नाडकर्णी के नाम भी इस स्थान पर 1 शतक दर्ज है। पूर्व कप्तान अजीत वाडेकर ने भी तीसरे नंबर पर 1 शतक लगाया था। एकनाथ सोलकर और सुरिंदर अमरनाथ ने भी अपने करियर में तीसरे स्थान पर बल्लेबाजी करते हुए 1-1 टेस्ट शतक जमाया था। अब 1 शतक के साथ देवदत्त पडिक्कल भी इस सूची में जुड़ चुके हैं।
तकनीक और धैर्य की कठिन परीक्षा
टेस्ट क्रिकेट में तीसरे नंबर की भूमिका किसी भी खिलाड़ी के संयम, तकनीक और मैच की परिस्थिति को समझने की क्षमता की असली परीक्षा लेती है। इस स्थान पर सफल होने के लिए बल्लेबाज को परिस्थितियों के अनुसार अपने खेल में बदलाव करना पड़ता है। यदि परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हों तो रक्षात्मक खेल अपनाना पड़ता है, और यदि पिच बल्लेबाजी के अनुकूल हो तो रन बनाने की गति बढ़ानी पड़ती है। विनोद कांबली का 4 शतकों वाला रिकॉर्ड लंबे समय से शीर्ष पर बरकरार है, जबकि सौरव गांगुली 3 शतकों के साथ दूसरे नंबर पर कायम हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या देवदत्त पडिक्कल अपने करियर की इस शानदार शुरुआत को आगे बढ़ाते हुए कांबली के इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड तक पहुंच पाते हैं या नहीं।



















