भारतीय क्रिकेट टीम के प्रमुख ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या 11 अक्टूबर को 33 वर्ष के हो गए हैं। गुजरात के चोर्यासी में 11 अक्टूबर 1993 को एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि वाले परिवार में जन्मे हार्दिक पांड्या आज वैश्विक क्रिकेट पटल पर एक बड़े सितारे के रूप में स्थापित हैं। विलासितापूर्ण जीवनशैली, करोड़ों रुपये मूल्य की घड़ियों और महंगी गाड़ियों के मालिक बन चुके हार्दिक खेल प्रेमियों के बीच एक खास पहचान रखते हैं, हालांकि चोट की वजह से वह पिछले कुछ महीनों से प्रतिस्पर्धी क्रिकेट मैदान से दूर चल रहे हैं।
इस विशेष अवसर पर उनकी गर्लफ्रेंड माहिका शर्मा ने सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर एक लंबा और विस्तृत संदेश साझा किया है। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने हार्दिक के बचपन के दिनों, घरेलू क्रिकेट में झेली गई उपेक्षा, चयन प्रक्रियाओं में राजनीति और अनजाने में एक घातक तेज गेंदबाज बनने की उनकी पूरी दास्तान दुनिया के सामने रखी है।
19 साल की उम्र तक सिर्फ बल्लेबाज थे हार्दिक पांड्या
माहिका शर्मा के अनुसार, जीवन के शुरुआती 19 वर्षों तक हार्दिक बड़ौदा की टीम में केवल चौथे नंबर के विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में खेल रहे थे। मैदान पर उनकी आमद किसी पूर्व निर्धारित योजना के तहत नहीं, बल्कि एक नटखट और चंचल छोटे भाई के रूप में इत्तेफाकन हुई थी। उनकी अत्यधिक चंचलता और असीमित ऊर्जा को सही दिशा देने का एकमात्र माध्यम क्रिकेट ही साबित हुआ। औपचारिक स्कूली शिक्षा नाममात्र की होने के कारण क्रिकेट का मैदान ही उनके लिए अपनी भावनाओं और व्यक्तित्व को व्यक्त करने का सबसे बड़ा जरिया बन गया था।
कई वर्षों तक बल्ले से लगातार शानदार प्रदर्शन दर्ज करने के बावजूद बड़ौदा की टीम में उनकी जगह सुरक्षित नहीं हो पा रही थी। माहिका ने बताया कि खेल के मैदान से बाहर सामाजिक मेलजोल और जोड़-तोड़ वाली राजनीति में खुद को न ढाल पाने के कारण हार्दिक को उनके हक के चयन से वंचित रखा जाता रहा। आम बल्लेबाजों के विपरीत उनमें तेज दौड़ने की जबरदस्त क्षमता थी और वह घोड़ों की तरह लगातार कठोर परिश्रम करने में विश्वास रखते थे, जो बाद में उनके करियर का सबसे बड़ा गुप्त हथियार साबित हुआ।
नेट्स में साथियों को कराते थे गेंदबाजी अभ्यास
माहिका ने हार्दिक के उन दिनों को भी याद किया जब नेट्स में मुख्य अभ्यास सत्र समाप्त हो जाता था। सहानुभूति जैसे जटिल शब्दों से अनजान हार्दिक अपनी बल्लेबाजी खत्म होने के बाद भी मैदान पर अकेले डटे रहते थे। वह बाकी बल्लेबाज साथियों को बल्लेबाजी का अभ्यास कराने के लिए घंटों गेंद फेंकते रहते थे। स्कूल छोड़ चुके हार्दिक के पास न तो कोई महंगे शौक पूरे करने के साधन थे और न ही घर पर करने के लिए कोई दूसरा काम, इसलिए वह अपना पूरा वक्त मैदान पर ही बिताते थे।
शुरुआत में उनका मकसद कभी भी गेंदबाज या ऑलराउंडर बनने का नहीं था। वह संवेदनशील युवा मन से सिर्फ एक बल्लेबाज ही बने रहना चाहता था। क्रिकेट ही उनकी जिंदगी का वह अकेला कोना था, जिसने उन्हें इस बात का एहसास कराया कि दुनिया में उन्हें भी अपनाया गया है। इसी बीच उनके खेल जीवन में एक अप्रत्याशित मोड़ आया जब एक सीनियर कोच ने नेट्स में उनकी गेंदबाजी देखी और वह हैरान रह गए, क्योंकि वह अब तक केवल हार्दिक नाम के बल्लेबाज से ही वाकिफ थे।
बिना गेंदबाजी वाले जूतों के किया था डेब्यू, झटके 5 विकेट
इस अप्रत्याशित बदलाव के कुछ ही समय बाद हार्दिक पांड्या ने एक ऑलराउंडर के रूप में आधिकारिक मैच में पदार्पण किया। अपने जीवन में पहली बार किसी औपचारिक मुकाबले में गेंदबाजी करते हुए उन्होंने सीधे 5 विकेट चटकाकर सनसनी मचा दी। उस समय उनके पास गेंदबाजी के लिए जरूरी विशेष जूतों की एक जोड़ी तक उपलब्ध नहीं थी।
इस मैच के करीब 2 साल बाद उनकी पसंदीदा आईपीएल टीम ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें एक तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर के रूप में अपने साथ जोड़ लिया। इसके महज 6 महीने के भीतर ही हार्दिक को भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण करने का ऐतिहासिक मौका मिल गया। माहिका ने अपने संदेश के अंत में लिखा कि जर्सी नंबर 33 ने जिस अविश्वसनीय पटकथा को जिया है, उसे शब्दों में समेटना असंभव है और उनका यह पत्र हार्दिक के विशाल सफर का महज 3 प्रतिशत हिस्सा ही बयां कर पाया है।


















