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मां दुर्गा की आराधना का महापर्व शुरू, भक्तिमय भजनों से गूंजेंगे घर और मंदिरधर्म
11 अक्तू॰ 2026, 7:39 am (2 घंटे पहले)· 1

मां दुर्गा की आराधना का महापर्व शुरू, भक्तिमय भजनों से गूंजेंगे घर और मंदिर

11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक चलने वाले नवरात्रि उत्सव के दौरान श्रद्धालु शक्ति स्वरूपा देवी के विविध रूपों की उपासना कर रहे हैं, जहां पारंपरिक गीतों और कीर्तनों से वातावरण पावन बना हुआ है।

अश्विन मास में देवी शक्ति की आराधना का विशेष उत्सव 11 अक्टूबर से आरंभ हो चुका है, जिसका समापन 19 अक्टूबर को होगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालु पूरे नियम और निष्ठा के साथ उपवास रखते हैं तथा देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करते हैं। देश भर में पूजा पंडालों, तीर्थ स्थलों और घरों में सुबह से देर रात तक आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है, जहां पारंपरिक भक्ति गीतों के जरिए देवी की महिमा का गुणगान किया जा रहा है।

पारंपरिक गीतों से भक्तिमय हुआ माहौल

इस पावन अवधि के दौरान घरों और सामूहिक स्थलों पर भजन कीर्तन का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु सुबह की पूजा और संध्या आरती के समय भक्ति रचनाओं को सुनकर अथवा गाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। ऐसे अवसरों पर लखबीर सिंह लक्खा और अन्य प्रसिद्ध गायकों द्वारा गाए गए देवी गीत अत्यंत लोकप्रिय रहते हैं। इन भजनों में मां के अलौकिक दरबार, ऊंचे पर्वतों पर स्थित उनके भवन और भक्तों की अटूट आस्था का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।

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इन गीतों में मैया के दरबार की भव्यता, उनके चरणों से बहती पावन धारा और लाल चुनरी व पुष्प मालाओं से सजे दिव्य रूप की स्तुति की जाती है। श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन और निष्कपट भाव से शीश नवाने वालों पर देवी की असीम कृपा बरसती है और वे अपने भक्तों की सूनी झोलियां खुशियों से भर देती हैं। इस कारण सामूहिक कीर्तनों में इन पारंपरिक रचनाओं का गायन निरंतर चलता रहता है।

नवदुर्गा के पावन स्वरूपों का स्मरण

नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां भगवती के अलग-अलग रूपों की पूजा का विधान है। उपासना के क्रम में प्रथम दिन नंदी बैल की सवारी करने वाली मां शैलपुत्री का ध्यान किया जाता है, जो दृढ़ता और साधना का प्रतीक मानी जाती हैं। इसके पश्चात सृष्टि की रचना करने वाली मां कूष्मांडा की अद्भुत लीलाओं और उनके तेज का स्मरण किया जाता है, जिन्हें ब्रह्मांड की आदि शक्ति कहा गया है।

साधना के अंतिम चरणों में मां कालरात्रि के रौद्र और विनाशक रूप का स्मरण होता है, जो महाप्रलय लाने वाली शक्ति के रूप में जानी जाती हैं और दुष्टों का संहार कर भक्तों को अभय प्रदान करती हैं। श्रद्धालु पूरे नौ दिन उपवास, मंत्र जप और कन्या पूजन की परंपराओं का निर्वाह करते हुए सुख, समृद्धि और आत्मिक शांति की कामना करते हैं।

सवाल-जवाब

नवरात्रि का यह पर्व किस तारीख से किस तारीख तक मनाया जा रहा है?
यह पावन पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक मनाया जा रहा है।
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु किस प्रकार की साधना करते हैं?
श्रद्धालु नौ दिनों तक विधि-विधान से देवी की पूजा-अर्चना करते हैं, उपवास रखते हैं और भजन कीर्तन का आयोजन करते हैं।
प्रथम दिन देवी के किस स्वरूप की आराधना की जाती है?
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जिनकी सवारी नंदी बैल है।
चौथी देवी के रूप में किनकी पूजा होती है?
चौथी देवी के रूप में मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है, जिनकी लीला को अत्यंत निराला और दिव्य माना गया है।
कालरात्रि देवी की क्या विशेषता बताई गई है?
मां कालरात्रि को महाप्रलय ढाने वाली और प्रचंड शक्ति स्वरूपा देवी के रूप में जाना जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·32 मिनट पहले

इन नौ दिनों में घर का पूरा माहौल ही बदल जाता है, सुबह-शाम भजनों की गूंज से एक अलग ही मानसिक शांति मिलती है। त्यौहार का यह समय काम के भागदौड़ से राहत देकर मन को पूरी तरह सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

Rohan Gupta@rohan-gupta·51 मिनट पहले

नवरात्रि के इन नौ दिनों में चारों तरफ भक्ति का माहौल और ये पारंपरिक भजन मन को बहुत शांति देते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·51 मिनट पहले

रोहन भाई, सच कहा आपने, सुबह-सुबह इन भजनों की आवाज़ सुनते ही सारा तनाव दूर हो जाता है और मन एकदम शांत हो जाता है।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·1 घंटे पहले

नवरात्र के नौ दिन तो पूरे हो गए, पर तारीखों का हिसाब थोड़ा उलझा हुआ लग रहा है।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·1 घंटे पहले

राजेश जी, तारीखों में क्या उलझन है? लेख में साफ लिखा है ग्यारह से उन्नीस अक्टूबर तक का समय है।

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