झारखंड के पलामू जिले में आगामी दुर्गा पूजा महोत्सव की तैयारियां अत्यंत व्यापक स्तर पर संचालित की जा रही हैं। जिले भर में विभिन्न पूजा समितियां श्रद्धालुओं के स्वागत और दर्शन के लिए भव्य तथा अनूठे पूजा पंडालों का निर्माण करवा रही हैं। कई स्थानों पर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों और विख्यात मंदिरों की अनुकृतियां देखने को मिलेंगी, वहीं कई पंडाल अपनी विशिष्ट सजावट से लोगों का मन मोहने की तैयारी में हैं। इसी उत्सव के बीच मेदिनीनगर स्थित भारत माता चौक के समीप सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति की ओर से तिरुपति बालाजी मंदिर के वास्तुशिल्प पर आधारित एक विशाल पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है, जिसकी कुल निर्माण लागत करीब 20 लाख रुपये निर्धारित की गई है। समिति के अनुसार यह पंडाल इस बार क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए सबसे प्रमुख आकर्षण का केंद्र साबित होगा।
लागत दोगुनी कर तिरुपति बालाजी मंदिर का भव्य प्रारूप
सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार इस बार पंडाल के निर्माण पर पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग दोगुनी धनराशि खर्च की जा रही है। कारीगर पिछले डेढ़ महीने से लगातार इस निर्माण कार्य को पूरा करने में जुटे हुए हैं। पंडाल की कुल ऊंचाई तथा लंबाई लगभग 80 से 85 फीट रखी जा रही है। समिति का मुख्य उद्देश्य यह है कि स्थानीय श्रद्धालुओं को मेदिनीनगर के भीतर ही तिरुपति बालाजी मंदिर के दिव्य और भव्य स्वरूप के दर्शन प्राप्त हो सकें। समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि दो वर्ष पूर्व कोलकाता के विख्यात श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब द्वारा तैयार किए गए पंडाल के प्रारूप से प्रेरणा लेकर इस वर्ष मेदिनीनगर में तिरुपति बालाजी मंदिर का यह खास मॉडल तैयार कराया जा रहा है।
कपड़े के बिना बांस, प्लाई और गोल्डन पेंट से हो रही नक्काशी
इस अनूठे मंदिर प्रारूप के निर्माण में सामग्री का चयन भी काफी अलग ढंग से किया गया है। पूरे ढांचे को खड़ा करने के लिए करीब 2,000 मजबूत बांस तथा 800 सीएफटी लकड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही छह गुणा चार फीट आकार की लगभग 400 प्लाई शीटें लगाई जा रही हैं। पारंपरिक पंडालों के विपरीत इस बार मंदिर के बाहरी और भीतरी हिस्से में कपड़े का प्रयोग पूरी तरह बंद रखा गया है। इसके स्थान पर प्लाई बोर्ड पर सुनहरा पेंट और विशेष फोम मॉडलों की सहायता से बारीक नक्काशी उकेरी जा रही है, जिससे मंदिर को एक वास्तविक और चमकदार रूप मिल सके। इसके अतिरिक्त मुख्य प्रवेश द्वार के निकट एक बड़ी एलईडी स्क्रीन भी स्थापित की जा रही है, जो आने वाले भक्तों के लिए एक अलग अनुभव प्रस्तुत करेगी।
कोलकाता की मिट्टी से तैयार हो रही 15 फीट ऊंची प्रतिमा
समिति से जुड़े अनय सिंह ने बताया कि भव्य पंडाल के समानांतर इस बार मां दुर्गा की प्रतिमा भी अत्यधिक खास होगी। पंडाल के भीतर करीब 15 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा स्थापित की जा रही है, जिसे पारंपरिक रूपरेखा से हटकर एक अनूठा और विशिष्ट स्वरूप दिया जा रहा है। इस कार्य के लिए दक्ष मूर्तिकारों को विशेष निर्देश दिए गए हैं और प्रतिमा निर्माण के लिए मिट्टी खासतौर पर कोलकाता से मंगाई गई है। कारीगरों का प्रयास है कि प्रतिमा का भाव और शिल्पकला श्रद्धालुओं को पूरी तरह आकर्षित करे।
46 वर्षों की पूजा परंपरा और तीन दिवसीय महाभंडारा
अनय सिंह के अनुसार भारत माता चौक के पास स्थित इस स्थल पर वर्ष 1980 से निरंतर दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रकार समिति की इस धार्मिक परंपरा को वर्तमान में लगभग 46 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस वर्ष इस ऐतिहासिक अवसर और भव्य पंडाल के निर्माण के साथ-साथ तीन दिनों तक चलने वाले विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण कर सकेंगे। वर्तमान में समिति के सभी सदस्य दिन-रात एक करके निर्माण को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, ताकि पूजा के दिनों में श्रद्धालुओं को एक दिव्य और भव्य धार्मिक परिवेश की अनुभूति कराई जा सके।























