जापान के खिलाफ खेले गए एकमात्र टी20 मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम ने बेहद करीबी अंतर से रोमांचक जीत दर्ज की। आम तौर पर विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में पहचान रखने वाले ईशान किशन ने इस मुकाबले में बतौर फील्डर मैदान पर उतरकर अपने शानदार खेल से सबका ध्यान खींच लिया। जब टीम इंडिया बेहद कम स्कोर का बचाव कर रही थी, उस नाजुक मोड़ पर सीमा रेखा के करीब से ईशान किशन का एक हैरतअंगेज थ्रो मुकाबले का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बन गया। उनके इस सटीक निशाने ने न केवल एक जापानी ओपनर को पवेलियन भेजा, बल्कि भारतीय खेमे में नई ऊर्जा भी फूंक दी।
सीमा रेखा से सीधा प्रहार और जापानी ओपनर का विकेट
लक्ष्य का पीछा करने उतरी जापानी पारी के दौरान ओपनर बल्लेबाज लैकलन यामामोटो-लेक तेजी से रन चुराने का प्रयास कर रहे थे। उसी दौरान बाउंड्री पर मुस्तैद खड़े ईशान किशन ने तेजी से गेंद पर झपट्टा मारा और बिना कोई समय गंवाए सीधे विकेट पर रॉकेट की रफ्तार से थ्रो फेंक दिया। गेंद सीधे स्टंप्स से जा टकराई और गिल्लियां बिखर गईं। लैकलन यामामोटो-लेक ने खुद को रनआउट से बचाने के लिए पूरी डाइव भी लगाई, मगर उनका बल्ला क्रीज से थोड़ा पीछे रह गया। इस सटीक निशाने के चलते जापानी ओपनर मात्र 1 रन के निजी स्कोर पर आउट हो गए। यदि वह कुछ देर और मैदान पर टिककर उपयोगी रन जोड़ लेते, तो छोटे लक्ष्य वाले इस मुकाबले में भारतीय टीम के लिए हालात बेकाबू हो सकते थे।
बारिश की भेंट चढ़ा मुकाबला, 5-5 ओवर का रोमांचक खेल
दोनों देशों के बीच आयोजित यह एकमात्र टी20 मुकाबला मौसम की मार के कारण काफी देर से शुरू हो सका। भारी बारिश के चलते खेल को घटाकर प्रति पारी केवल 5-5 ओवर का कर दिया गया था। सिक्का उछलने के बाद भारत ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। हालांकि, पांच ओवरों के इस संक्षिप्त प्रारूप में भारतीय टीम खुलकर नहीं खेल पाई और निर्धारित 5 ओवर में 4 विकेट गंवाकर केवल 32 रन ही बना सकी। टी20 क्रिकेट में 30 गेंदों पर 33 रनों का लक्ष्य बहुत सामान्य माना जाता है, इसलिए भारतीय गेंदबाजों के कंधों पर बेहद कसा हुआ प्रदर्शन करने की कठिन चुनौती आ गई थी।
हाइब्रिड पिच पर स्पिन का चक्रव्यूह और बल्लेबाजों का संघर्ष
मैच के दौरान हाइब्रिड पिच पर भारतीय बल्लेबाजों को स्पिन गेंदबाजी के सामने टिकने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। बड़े शॉट लगाने की कोशिश में बल्लेबाज लगातार संघर्ष करते नजर आए। विस्फोटक सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा मैच की पहली ही गेंद पर बिना खाता खोले गोल्डन डक पर पवेलियन लौट गए। विकेटकीपर संजू सैमसन ने कुछ प्रयास किया, मगर वह भी 7 गेंदों का सामना करके केवल 9 रन ही जुटा पाए। मुश्किल हालात में कप्तान श्रेयस अय्यर ने सूझबूझ से पारी संभाली और 12 गेंदों में 16 रनों की बेहद महत्वपूर्ण पारी खेली। इस संघर्षपूर्ण पारी के सहारे भारत 32 रन के सम्मानजनक आंकड़े तक पहुंच पाया, जिसके चलते श्रेयस अय्यर को प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार दिया गया।
अंतिम गेंद तक खिंचा मुकाबला, 2 रन से बची प्रतिष्ठा
33 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जापानी टीम ने बेहतरीन जज्बा दिखाया और मैच को पूरी तरह अपनी मुट्ठी में करने की कगार पर पहुंचा दिया था। एक समय मुकाबला पूरी तरह भारत के हाथ से फिसलता दिख रहा था। लेकिन अंतिम ओवर की आखिरी गेंद तक चले इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मुकाबले में भारतीय गेंदबाज किसी तरह जापान को 5 ओवर में 30 रन पर रोकने में सफल रहे। इस तरह भारतीय टीम ने केवल 2 रनों के मामूली अंतर से जीत हासिल की और एक अप्रत्याशित उलटफेर का शिकार होने से बाल-बाल बच गई।



















