साउथ अफ्रीका के खिलाफ केपटाउन में खेले गए निर्णायक मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को 176 रनों के बड़े अंतर से हार झेलनी पड़ी। इस पराजय के साथ ही ऑस्ट्रेलियाई टीम ने तीन मैचों की टेस्ट सीरीज भी 2-1 से गंवा दी। चौथी पारी में जीत दर्ज करने के लिए ऑस्ट्रेलिया के सामने 288 रनों का लक्ष्य था, लेकिन पूरी टीम महज 111 रनों के स्कोर पर सिमट गई। कंगारू टीम की इस शर्मनाक बल्लेबाजी में अनुभवी बल्लेबाज मार्नस लाबुशेन की विफलता सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गई है, जिन्होंने निर्णायक मुकाबले की दोनों पारियों को मिलाकर केवल 4 रन बनाए।
सीरीज में पूरी तरह बेअसर साबित हुआ बल्ला
तीसरे टेस्ट की दोनों पारियों में लाबुशेन की नाकामी ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम की कमजोरियों को पूरी तरह उजागर कर दिया। साउथ अफ्रीका दौरे की पूरी टेस्ट सीरीज में उनका प्रदर्शन लगातार गिरता रहा। समाप्त हुई इस तीन मैचों की सीरीज की 6 पारियों में लाबुशेन कुल मिलाकर केवल 131 रन ही जुटा सके। इस पूरे दौरे पर उनका सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर सिर्फ 39 रन रहा, जो एक शीर्ष क्रम के विशेषज्ञ बल्लेबाज के दर्जे के बिल्कुल विपरीत है।
लंबे समय से चला आ रहा संघर्ष अब बना मुसीबत
लाबुशेन का यह खराब दौर कोई अचानक आई गिरावट नहीं है, बल्कि वह पिछले तीन सालों से लगातार रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लंबे समय तक टीम प्रबंधन के भरोसे के बावजूद उनके बल्ले से कोई ठोस पारी नहीं निकल सकी है। लगातार तीन साल के निराशाजनक आंकड़ों और केपटाउन की करारी शिकस्त के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि अगली टेस्ट सीरीज में चयनकर्ता अब उन्हें मौका देने के मूड में नहीं हैं और उनका टेस्ट सफर यहीं समाप्त माना जा रहा है।



















