ताजे फूलों की कोमलता और प्राकृतिक रंग हर किसी का मन मोह लेते हैं, मगर समय के साथ उनकी ताजगी मुरझा जाना स्वाभाविक माना जाता है। राजधानी दिल्ली के बाबा खड़क सिंह मार्ग पर आयोजित ग्रैंड एक्सपो में इसी धारणा को बदलकर फूलों की खूबसूरती को गहनों के रूप में सहेजकर पेश किया गया है। प्रदर्शनी में विक्रेता सोनू प्राकृतिक फूलों से तैयार की गई विशेष ज्वेलरी के साथ पहुंचे हैं। इन आभूषणों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें असली फूलों की बनावट और रंगों को ज्यों का त्यों संभालकर झुमके, इयररिंग्स और पेंडेंट तैयार किए जाते हैं, जिससे फूलों का आकर्षण लंबे समय तक बरकरार रहता है।
पहाड़ों और कश्मीर के प्राकृतिक फूलों का चयन
इस अनूठी ज्वेलरी की बनावट और उसमें प्रयुक्त सामग्री के बारे में सोनू बताते हैं कि गहनों को तैयार करने के लिए ज्यादातर पहाड़ी इलाकों के फूलों का उपयोग किया जाता है। इनमें खासतौर पर कश्मीर और अन्य पहाड़ी घाटियों से लाए गए फूल शामिल रहते हैं। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक देसी भारतीय फूलों को भी गहनों का आधार बनाया जाता है। कारीगरी की शुरुआत में हर फूल की पंखुड़ियों को बेहद सावधानीपूर्वक अलग किया जाता है, जिसके बाद उन्हें विशेष तकनीक से प्रेस करके सुखाया जाता है ताकि शिल्पकार उन्हें मनचाहे आभूषण के ढांचे के अनुसार संतुलित आकार दे सकें।
रेजिन की मदद से तैयार होती है टिकाऊ बनावट
फूलों को गहनों में तब्दील करने की पूरी प्रक्रिया काफी बारीक और व्यवस्थित है। सबसे पहले चुने हुए फूलों को प्रेस करने के बाद आवश्यकतानुसार काटा जाता है। इसके पश्चात इन पंखुड़ियों को पारदर्शी रेजिन के भीतर सुरक्षित ढंग से व्यवस्थित किया जाता है। फ्रेम के डिजाइन के मुताबिक उन्हें अंतिम रूप दिया जाता है, जिससे फूल का मूल प्राकृतिक स्वरूप कांच जैसी चमक में सुरक्षित बंद हो जाता है। सोनू के अनुसार, इस पूरी कलाकारी में काफी समय लगता है और किसी एक प्रदर्शनी के लिए पर्याप्त स्टॉक तैयार करने में ही लगभग 3 से 4 महीने तक का समय लग जाता है।
₹150 से शुरुआत और इयररिंग्स की सर्वाधिक पसंद
कीमत के लिहाज से यह ज्वेलरी आम खरीदारों की जेब के काफी अनुकूल रखी गई है। स्टॉल पर गहने मुख्य रूप से ₹150, ₹250 और ₹350 के दाम में उपलब्ध हैं। कुछ बेहद बारीक और विशेष डिजाइन वाले आभूषणों की कीमत ₹350 से ₹400 तक भी जाती है। सोनू बताते हैं कि आने वाले खरीदारों में सबसे ज्यादा रुझान इयररिंग्स की ओर देखने को मिलता है। प्रकृति का सीधा जुड़ाव होने के कारण यह सामान्य कृत्रिम गहनों से एकदम अलग दिखते हैं। हालांकि, ग्राहकों की व्यक्तिगत पसंद और खरीदारी के समय होने वाले मोलभाव के अनुसार कीमतों में हल्का बदलाव भी संभव रहता है।
देशभर की प्रमुख प्रदर्शनियों तक सीधी पहुंच
सोनू अपने इन शिल्पों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए प्रमुख व्यापारिक आयोजनों पर भरोसा करते हैं। वह दिल्ली हाट, सूरजकुंड मेला, प्रगति मैदान और भारत के अलग-अलग शहरों में आयोजित होने वाले सरकारी व सांस्कृतिक एक्सपो में अपनी दुकानें लगाते हैं। वर्तमान में उनका कारोबार पूरी तरह प्रत्यक्ष प्रदर्शनियों पर ही आधारित है और वह ऑनलाइन माध्यमों से बिक्री नहीं करते हैं। सोनू के अनुसार, इस पूरे कार्य में मुनाफे का दायरा करीब 60 फीसदी तक रहता है, जो आभूषण के डिजाइन, निर्माण में आई लागत और ग्राहकों को दी जाने वाली छूट के आधार पर तय होता है।

















