दत्ताचल क्षेत्रम: 650 साल पुराने स्वयंभू मंदिर में दूर होते हैं विवाह और राहु दोष के संकटरेजिन में सुरक्षित असली फूलों के गहने बने दिल्ली एक्सपो का आकर्षण, शुरुआती दाम ₹150त्योहारी सीजन में काली पड़ी पीतल की मूर्तियों को चमकाने के आसान उपाय, बिना अधिक झंझट लौटेगी सुनहरी चमककनॉट प्लेस में हस्तशिल्प और हथकरघा मेला, निःशुल्क प्रवेश के साथ 5 नवंबर तक सजेगा बाजारउत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के बीच दैनिक सुपरफास्ट सेवा शुरू, देखें पूरा कार्यक्रमराष्ट्रीय राजमार्ग टोल प्लाजा पर रियायती लोकल पास लागू, 20 किमी दायरे वाले निजी वाहन चालकों को राहतबांसवाड़ा के सूरजकुंड में 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला पर पैंथर का जानलेवा हमला, चेहरे पर आए 50 से अधिक टांकेकॉलेज अभियान से शुरू हुआ वीवॉइस लैब, कचरा प्रबंधन से तैयार किया 250 करोड़ रुपये का उद्यमत्योहारी सीजन में नई गाड़ी लेने से पहले प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन जरूर करें, इन जरूरी बातों पर रखें नजररामलीला मैदान में विपक्ष की महारैली के लिए राहुल गांधी ने दिल्लीवासियों को दिया न्योता
रेजिन में सुरक्षित असली फूलों के गहने बने दिल्ली एक्सपो का आकर्षण, शुरुआती दाम ₹150जीवनशैली
1 नव॰ 2026, 1:38 pm (3 मिनट पहले)· 1

रेजिन में सुरक्षित असली फूलों के गहने बने दिल्ली एक्सपो का आकर्षण, शुरुआती दाम ₹150

दिल्ली के बाबा खड़क सिंह मार्ग पर आयोजित ग्रैंड एक्सपो में असली प्राकृतिक फूलों से बनी हैंडमेड ज्वेलरी ग्राहकों को खूब आकर्षित कर रही है। पहाड़ों और कश्मीर के फूलों को रेजिन में ढालकर तैयार किए गए इन गहनों की शुरुआती कीमत मात्र ₹150 है।

ताजे फूलों की कोमलता और प्राकृतिक रंग हर किसी का मन मोह लेते हैं, मगर समय के साथ उनकी ताजगी मुरझा जाना स्वाभाविक माना जाता है। राजधानी दिल्ली के बाबा खड़क सिंह मार्ग पर आयोजित ग्रैंड एक्सपो में इसी धारणा को बदलकर फूलों की खूबसूरती को गहनों के रूप में सहेजकर पेश किया गया है। प्रदर्शनी में विक्रेता सोनू प्राकृतिक फूलों से तैयार की गई विशेष ज्वेलरी के साथ पहुंचे हैं। इन आभूषणों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें असली फूलों की बनावट और रंगों को ज्यों का त्यों संभालकर झुमके, इयररिंग्स और पेंडेंट तैयार किए जाते हैं, जिससे फूलों का आकर्षण लंबे समय तक बरकरार रहता है।

पहाड़ों और कश्मीर के प्राकृतिक फूलों का चयन

इस अनूठी ज्वेलरी की बनावट और उसमें प्रयुक्त सामग्री के बारे में सोनू बताते हैं कि गहनों को तैयार करने के लिए ज्यादातर पहाड़ी इलाकों के फूलों का उपयोग किया जाता है। इनमें खासतौर पर कश्मीर और अन्य पहाड़ी घाटियों से लाए गए फूल शामिल रहते हैं। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक देसी भारतीय फूलों को भी गहनों का आधार बनाया जाता है। कारीगरी की शुरुआत में हर फूल की पंखुड़ियों को बेहद सावधानीपूर्वक अलग किया जाता है, जिसके बाद उन्हें विशेष तकनीक से प्रेस करके सुखाया जाता है ताकि शिल्पकार उन्हें मनचाहे आभूषण के ढांचे के अनुसार संतुलित आकार दे सकें।

ये भी पढ़ें

रेजिन की मदद से तैयार होती है टिकाऊ बनावट

फूलों को गहनों में तब्दील करने की पूरी प्रक्रिया काफी बारीक और व्यवस्थित है। सबसे पहले चुने हुए फूलों को प्रेस करने के बाद आवश्यकतानुसार काटा जाता है। इसके पश्चात इन पंखुड़ियों को पारदर्शी रेजिन के भीतर सुरक्षित ढंग से व्यवस्थित किया जाता है। फ्रेम के डिजाइन के मुताबिक उन्हें अंतिम रूप दिया जाता है, जिससे फूल का मूल प्राकृतिक स्वरूप कांच जैसी चमक में सुरक्षित बंद हो जाता है। सोनू के अनुसार, इस पूरी कलाकारी में काफी समय लगता है और किसी एक प्रदर्शनी के लिए पर्याप्त स्टॉक तैयार करने में ही लगभग 3 से 4 महीने तक का समय लग जाता है।

₹150 से शुरुआत और इयररिंग्स की सर्वाधिक पसंद

कीमत के लिहाज से यह ज्वेलरी आम खरीदारों की जेब के काफी अनुकूल रखी गई है। स्टॉल पर गहने मुख्य रूप से ₹150, ₹250 और ₹350 के दाम में उपलब्ध हैं। कुछ बेहद बारीक और विशेष डिजाइन वाले आभूषणों की कीमत ₹350 से ₹400 तक भी जाती है। सोनू बताते हैं कि आने वाले खरीदारों में सबसे ज्यादा रुझान इयररिंग्स की ओर देखने को मिलता है। प्रकृति का सीधा जुड़ाव होने के कारण यह सामान्य कृत्रिम गहनों से एकदम अलग दिखते हैं। हालांकि, ग्राहकों की व्यक्तिगत पसंद और खरीदारी के समय होने वाले मोलभाव के अनुसार कीमतों में हल्का बदलाव भी संभव रहता है।

देशभर की प्रमुख प्रदर्शनियों तक सीधी पहुंच

सोनू अपने इन शिल्पों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए प्रमुख व्यापारिक आयोजनों पर भरोसा करते हैं। वह दिल्ली हाट, सूरजकुंड मेला, प्रगति मैदान और भारत के अलग-अलग शहरों में आयोजित होने वाले सरकारी व सांस्कृतिक एक्सपो में अपनी दुकानें लगाते हैं। वर्तमान में उनका कारोबार पूरी तरह प्रत्यक्ष प्रदर्शनियों पर ही आधारित है और वह ऑनलाइन माध्यमों से बिक्री नहीं करते हैं। सोनू के अनुसार, इस पूरे कार्य में मुनाफे का दायरा करीब 60 फीसदी तक रहता है, जो आभूषण के डिजाइन, निर्माण में आई लागत और ग्राहकों को दी जाने वाली छूट के आधार पर तय होता है।

सवाल-जवाब

यह प्रदर्शनी दिल्ली में किस जगह आयोजित की जा रही है?
यह प्रदर्शनी दिल्ली में बाबा खड़क सिंह मार्ग पर चल रहे ग्रैंड एक्सपो में आयोजित हो रही है।
इस ज्वेलरी को बनाने के लिए किस प्रकार के फूलों का उपयोग होता है?
इसमें मुख्य रूप से कश्मीर और पहाड़ी क्षेत्रों के फूलों के अलावा देसी भारतीय फूलों का उपयोग किया जाता है।
फूलों को खराब होने से बचाने के लिए क्या तरीका अपनाया जाता है?
फूलों को पहले सावधानी से सुखाकर प्रेस किया जाता है और फिर उन्हें पारदर्शी रेजिन में डालकर सील किया जाता है।
इन गहनों की शुरुआती कीमत कितनी है?
इन गहनों की शुरुआती कीमत ₹150 है, जबकि अन्य डिजाइन ₹250, ₹350 और ₹400 तक उपलब्ध हैं।
प्रदर्शनी में किस उत्पाद की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है?
विक्रेता के अनुसार ग्राहकों के बीच सबसे अधिक मांग इयररिंग्स की देखी जा रही है।
क्या यह ज्वेलरी ऑनलाइन खरीदी जा सकती है?
नहीं, यह ज्वेलरी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है और इसे केवल दिल्ली हाट, सूरजकुंड और प्रगति मैदान जैसी प्रदर्शनियों से ही खरीदा जा सकता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp