राजस्थान के बांसवाड़ा जिले स्थित कुशलगढ़ क्षेत्र में वन्यजीव के हमले का एक बेहद खौफनाक मामला सामने आया है। कुशलगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सूरजकुंड गांव में अपने घर के बाहर शांति से बैठी 75 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला पर अचानक एक खूंखार पैंथर ने झपट्टा मार दिया। इस अचानक हुए हिंसक हमले में पैंथर ने महिला के चेहरे को अपने नुकीले पंजों से बुरी तरह जख्मी कर दिया। इस अप्रत्याशित हमले के चलते महिला को खुद को बचाने या संभलने तक का अवसर नहीं मिल सका, जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ी। इस सनसनीखेज घटना के बाद से ही सूरजकुंड और आसपास के पूरे इलाके में भारी दहशत का वातावरण बन गया है।
घर के बाहर बैठी थीं कस्तूरी, अचानक सामने आ गया हिंसक जानवर
प्राप्त विवरण के अनुसार, सूरजकुंड गांव की रहने वाली 75 वर्षीय कस्तूरी, पत्नी नाथिया डामोर, रोजमर्रा की तरह अपने घर के बाहरी हिस्से में बैठी हुई थीं। उसी दौरान बस्ती के करीब पहुंचे एक पैंथर की नजर उन पर पड़ी और वह पलक झपकते ही उन पर कूद पड़ा। पैंथर ने कस्तूरी के चेहरे को निशाना बनाते हुए अपने पंजों से ताबड़तोड़ कई प्रहार किए। इन हमलों के कारण महिला का पूरा चेहरा बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया और चारों तरफ खून फैल गया। जानलेवा हमले से घबराकर बुजुर्ग महिला जोर-जोर से चीखने-चिल्लाने लगीं।
चीख-पुकार सुनकर दौड़े परिजन और ग्रामीण, पैंथर जंगल की ओर भागा
बुजुर्ग महिला की दर्दनाक चीखें सुनकर घर के अंदर मौजूद उनके परिवार के सदस्य और पास-पड़ोस के लोग बिना एक पल गंवाए मौके की तरफ दौड़े। भारी संख्या में लोगों को शोर मचाते हुए अपनी ओर आते देखकर पैंथर घबरा गया और महिला को छोड़कर तुरंत वहां से भाग निकला। परिजनों ने तत्परता दिखाते हुए गंभीर रूप से घायल कस्तूरी को संभाला और आनन-फानन में उन्हें उपचार के लिए सीधे जिला अस्पताल पहुंचाया। चेहरे पर गहरे और गंभीर घाव होने की वजह से अस्पताल लाते समय महिला की शारीरिक स्थिति बेहद नाजुक और चिंताजनक बनी हुई थी।
गंभीर घावों के चलते चिकित्सकों को लगाने पड़े 50 से ज्यादा टांके
जिला अस्पताल पहुंचते ही ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों के दल ने बिना समय गंवाए कस्तूरी का आपातकालीन उपचार शुरू किया। पैंथर के पंजों से चेहरे पर मांस फटने और अत्यंत गहरे घाव होने की वजह से चिकित्सकों को सर्जरी व मरहम-पट्टी के दौरान चेहरे पर 50 से अधिक टांके लगाने पड़े। सघन प्राथमिक उपचार और रक्तस्राव रोके जाने के बाद उन्हें अस्पताल के इनडोर वार्ड में भर्ती कर लिया गया है। वर्तमान में डॉक्टरों की विशेष निगरानी में उनका सघन उपचार जारी है और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है।
सूरजकुंड और आसपास के गांवों में खौफ, सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
इस दिल दहला देने वाले हमले के बाद सूरजकुंड और पास के ग्रामीण इलाकों में पैंथर की आमद को लेकर लोगों के मन में गहरा खौफ बैठ गया है। स्थानीय ग्रामीणों में इस बात का डर सता रहा है कि पैंथर दोबारा आबादी वाले हिस्से का रुख कर सकता है। इसी डर के कारण ग्रामीणों ने अपने घरों से बाहर निकलना बेहद सीमित कर दिया है और रास्तों पर आवाजाही के दौरान लोग सहमे हुए हैं। विशेष रूप से छोटे बच्चों और बुजुर्गों की हिफाजत को लेकर परिवार अत्यधिक चिंतित दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि आवासीय क्षेत्रों के करीब जंगली जीवों की चहलकदमी पर कड़ी नजर रखी जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे जानलेवा हमलों से ग्रामीणों की जान-माल की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।






















