आमतौर पर समाज में यही माना जाता है कि दुनिया के तौर-तरीके और समझदारी बड़ों से ही बच्चों में आती है। हालांकि अगर गौर से देखा जाए, तो बच्चों की दिनचर्या और उनका दृष्टिकोण बड़ों को भी जीवन का एक नया फलसफा सिखा सकता है। बच्चे दुनिया को किसी जटिल चश्मे से नहीं देखते, बल्कि उनके जीने का अंदाज बेहद सहज, ऊर्जावान और सकारात्मक होता है। बड़ों की व्यस्त जिंदगी में जो मानसिक खिंचाव और अकेलापन भर जाता है, उसे दूर करने के लिए बच्चों के व्यवहार से कई अहम सबक लिए जा सकते हैं।
वर्तमान क्षण में जीना और हर पल का आनंद लेना
वयस्कों की सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि वे या तो बीते हुए समय की गलतियों को लेकर परेशान रहते हैं या फिर आने वाले कल की जिम्मेदारियों में उलझे रहते हैं। इसके उलट, एक छोटा बच्चा कभी कल की चिंता नहीं करता। वह जिस पल में होता है, उस पल को पूरी शिद्दत से जीता है। अगर बड़े भी काम और जिम्मेदारियों के दबाव के बीच केवल उस पल पर ध्यान देना शुरू कर दें जिसमें वे अभी मौजूद हैं, तो मानसिक तनाव काफी हद तक अपने आप कम हो सकता है।
नाराजगी भुलाकर तुरंत सामान्य हो जाने की क्षमता
अक्सर घरों और पार्कों में देखा जाता है कि बच्चे एक पल खिलौने के लिए लड़ते हैं और अगले ही पल सब कुछ भुलाकर फिर से साथ में हंसने-खेलने लगते हैं। उनके दिल में किसी के प्रति लंबे समय तक मैल, ईर्ष्या या कड़वाहट नहीं ठहरती। इसके विपरीत, बड़े लोग छोटी-छोटी बातों को वर्षों तक मन में बांधकर रखते हैं, जिससे संबंध खराब होते हैं। रिश्तों को टूटने से बचाने और उन्हें लंबे समय तक सहज बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि पिछली शिकायतों को भुला दिया जाए।
सदा कुछ नया जानने और सीखने की लगन
बच्चों के पास हर बात के लिए अनगिनत सवाल होते हैं। उनकी यह कुदरती जिज्ञासा उन्हें दुनिया की हर अनजान चीज को बारीकी से देखने और समझने की प्रेरणा देती है। यही ललक उनके मानसिक विकास की सबसे बड़ी ताकत बनती है। बड़े होते-होते लोग सवाल पूछना बंद कर देते हैं और खुद को सीमित कर लेते हैं। जीवन के किसी भी पड़ाव पर सीखने की इस आदत को जिंदा रखकर कोई भी व्यक्ति अपने ज्ञान और सोच का दायरा लगातार बढ़ा सकता है।
नन्ही-नन्ही बातों में तलाशें सच्ची मुस्कान
बच्चों को खुश करने के लिए किसी बड़े आयोजन की जरूरत नहीं होती। एक सामान्य सा खिलौना, दादी की सुनाई कोई कहानी या फिर गली में दोस्तों संग दौड़ लगाना ही उनके चेहरे पर चमक लाने के लिए काफी होता है। बड़े हमेशा किसी बहुत बड़ी उपलब्धि, महंगे सामान या खास मौके के इंतजार में अपनी मुस्कान टालते रहते हैं। अगर दिनभर में मिलने वाली छोटी-छोटी उपलब्धियों और पलों को महत्व दिया जाए, तो जिंदगी का भारीपन खत्म होने लगता है।
लगातार गिरकर भी दोबारा खड़े होने का हौसला
जब कोई बच्चा अपने पैरों पर चलना शुरू करता है, तो वह अनगिनत बार लड़खड़ाता है और जमीन पर गिरता है। इसके बावजूद वह कभी हार मानकर बैठता नहीं, बल्कि हर बार उठकर दोबारा कदम बढ़ाता है और आखिरकार चलना सीख जाता है। जीवन में चाहे करियर हो, पढ़ाई हो या कोई व्यक्तिगत चुनौती, बार-बार की असफलताओं से घबराने के बजाय पुनः प्रयास करते रहना ही सफलता तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है।
बनावट से दूर अपनी मूल पहचान में रहना
बच्चे कभी किसी को प्रभावित करने के लिए झूठा आवरण नहीं ओढ़ते। वे भीतर से जैसे महसूस करते हैं, बाहर भी दुनिया के सामने बिल्कुल वैसे ही नजर आते हैं। आज के सामाजिक दौर में बड़े लोग अक्सर समाज की उम्मीदों और दिखावे के दबाव में अपनी असलियत छिपाने की कोशिश करते हैं, जो मानसिक बेचैनी का बड़ा कारण बनता है। खुद को अपनी सभी खूबियों और कमियों के साथ स्वीकार करना ही वास्तविक आत्मविश्वास और शांति प्रदान करता है।
बिना झिझक के अपनापन और स्नेह जाहिर करना
छोटे बच्चे अपने माता-पिता, भाई-बहनों और दोस्तों को गले लगाने या प्यार जताने में कोई औपचारिकता या संकोच नहीं बरतते। उम्र बढ़ने के साथ लोग अपनी भावनाओं को भीतर दबाने लगते हैं और खुलकर प्यार व्यक्त करने से कतराते हैं। पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में गर्मजोशी बनाए रखने के लिए जरूरी है कि अपनी भावनाओं को बिना किसी झिझक के सामने रखा जाए।
















