घरेलू स्तर पर बंगाल और इंडियन प्रीमियर लीग में दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलने वाले युवा क्रिकेटर अभिषेक पोरेल को एक बड़े आपराधिक मामले में अदालत से फौरी राहत मिल गई है. दुष्कर्म के गंभीर आरोपों के तहत हिरासत में भेजे जाने के 36 दिन बाद उन्हें आखिरकार जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया गया है. चुंचुड़ा कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए इस क्रिकेटर की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है.
कर्नाटक की मेडिकल छात्रा ने लगाए थे गंभीर आरोप
इस पूरे मामले की शुरुआत कर्नाटक की एक मेडिकल छात्रा की शिकायत से हुई थी. शिकायतकर्ता का कहना था कि वह और अभिषेक पोरेल लगभग साढ़े तीन साल से एक दूसरे के साथ रिश्ते में थे. छात्रा ने अपने बयान में दावा किया कि रिश्ते के दौरान क्रिकेटर ने उससे शादी करने का स्पष्ट भरोसा दिया था. दोनों इस दौरान एक साथ विदेश यात्रा पर भी गए थे. हालांकि, बाद में पोरेल ने विवाह के वादे से साफ इंकार कर दिया, जिसके बाद पीड़िता ने कानूनी रास्ता अपनाते हुए पुलिस के पास जाने का फैसला किया.
मोगरा थाने में दर्ज हुआ था केस और हाई कोर्ट का दखल
पीड़िता ने 23 जून को मोगरा पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के अलावा धारा 311, 318 और कई अन्य धाराओं के साथ ही आईटी अधिनियम की धारा 66 और 72 के तहत मामला दर्ज किया. कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट के समक्ष पहुंचा था. कलकत्ता हाई कोर्ट ने पुलिस को क्रिकेटर के खिलाफ सीधी कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार करने का निर्देश जारी किया था, जिसके बाद 11 अगस्त को पोरेल को हिरासत में ले लिया गया था.
धमकी के आरोप और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जब्ती
अभिषेक पोरेल पर दर्ज इस मामले में शादी का झांसा देकर यौन शोषण के अलावा आपराधिक धमकी देने और अन्य अपराधों के आरोप भी शामिल रहे. अदालत ने शिकायतकर्ता की निजी तस्वीरों और वीडियो के सार्वजनिक रूप से प्रसारित होने की आशंकाओं को अत्यंत गंभीरता से लिया था. इसी आधार पर कोर्ट ने जांच अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि पोरेल के सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को तुरंत प्रभाव से जब्त कर लिया जाए ताकि किसी भी तरह के डिजिटल साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके.



















