राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लाजपत नगर क्षेत्र से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा के मामले में एक बड़ा पर्दाफाश हुआ है। मामले की पड़ताल कर रही पुलिस टीम ने तकनीकी सुरागों और गहन छानबीन के सहारे इस सनसनीखेज हत्याकांड की परतें खोल दी हैं। इस मामले में युवराज की पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स और उसके सहयोगी संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपियों को संबंधित अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस की टीमें इस वारदात के पीछे छिपे मुख्य मकसद, हत्या के सटीक स्थान और घटनाक्रम की कड़ियों को पूरी तरह जोड़ने में जुटी हुई हैं।
शॉपिंग के बीच गुरुग्राम मीटिंग का कहकर निकला था युवक
जांच अधिकारियों से प्राप्त विवरण के मुताबिक, 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा सरिता विहार के निवासी थे। 6 सितंबर के दिन वह अपनी बहन के साथ लाजपत नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में खरीदारी करने के मकसद से पहुंचे थे। बाजार में खरीदारी पूरी करने के उपरांत दोनों लाजपत नगर-2 के के-ब्लॉक में मौजूद गोल्डन ड्रैगन रेस्टोरेंट में भोजन के लिए गए।
उसी दौरान शाम करीब 4 बजे युवराज ने अपनी बहन को जानकारी दी कि उसे एक जरूरी मीटिंग के सिलसिले में गुरुग्राम जाना है। उसने परिवार को आश्वस्त किया था कि वह अपना काम निपटाकर रात लगभग 10 बजे तक घर लौट आएगा। इसके पश्चात वह रेस्टोरेंट से गुरुग्राम के लिए रवाना हो गया, लेकिन देर रात तक भी जब वह अपने निवास पर नहीं पहुंचा, तो परिजनों की चिंता गहराने लगी।
फोन बंद होने पर परिजनों ने दर्ज कराई गुमशुदगी
परिजनों ने युवराज से संपर्क साधने के लिए बार-बार उसके मोबाइल नंबर पर कॉल किए, लेकिन उसका हैंडसेट पूरी तरह बंद पाया गया। शुरुआत में परिवार ने अपने व्यक्तिगत संपर्कों और परिचितों के जरिए उसकी तलाश की पूरी कोशिश की। हर संभावित ठिकाने पर पता लगाने के बाद भी जब युवराज का कोई सुराग नहीं मिला, तब उसकी बहन ने 11 सितंबर की शाम लाजपत नगर पुलिस स्टेशन पहुंचकर औपचारिक गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।
परिजनों से मिली तहरीर के आधार पर लाजपत नगर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की आधिकारिक जांच शुरू कर दी। जांच दल ने सबसे पहले युवक के मोबाइल फोन का डाटा खंगालना और उसके हालिया संपर्कों का ब्योरा जुटाना शुरू किया, जिससे कई अहम जानकारियां सामने आने लगीं।
सीडीआर और आईपीडीआर से मिला पूर्व सहकर्मी का सुराग
तफ्तीश को वैज्ञानिक दिशा देते हुए पुलिस टीम ने युवराज के मोबाइल से जुड़े कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (आईपीडीआर) का बारीकी से विश्लेषण किया। इस डिजिटल पड़ताल से यह तथ्य उजागर हुआ कि गायब होने से ठीक पहले युवराज की अंतिम बातचीत उसकी पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स के साथ हुई थी। परिजनों से पूछताछ में भी इस बात की पुष्टि हुई कि युवराज ने गुरुग्राम में अन्या से मुलाकात करने की बात कही थी।
इसके बाद पुलिस ने अन्या की पड़ताल शुरू की, तो पता चला कि युवराज के साथ-साथ अन्या का भी मोबाइल फोन अचानक स्विच ऑफ हो गया था। शक गहराने पर पुलिस ने लाजपत नगर के रास्तों समेत संभावित इलाकों की सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके साथ ही दोनों के दफ्तर से जुड़े कर्मचारियों और स्थानीय लोगों से विस्तृत पूछताछ की गई, जिससे जांच का पूरा दायरा अन्या वत्स के इर्द-गिर्द सिमट गया।
नए सिम कार्ड की लोकेशन ने उत्तराखंड तक पहुंचाया
पुलिस को चकमा देने की कोशिश में अन्या लगातार अपनी पहचान और संपर्क सूत्र बदल रही थी। इसी बीच जांच एजेंसियों को तकनीकी निगरानी के दौरान पता चला कि अन्या ने एक नया मोबाइल नंबर चालू किया है। पुलिस ने तत्काल इस नए नंबर के कॉल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन को ट्रैक करना शुरू किया।
लगातार निगरानी के बाद पुलिस को अन्या के नए नंबर की लोकेशन उत्तराखंड में ट्रेस हुई। लोकेशन मिलते ही लाजपत नगर थाने की विशेष टीम ने उत्तराखंड में दबिश दी। वहां घेराबंदी करते हुए पुलिस ने अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को धर दबोचा और उन्हें हिरासत में लेकर सीधे दिल्ली ले आई।
पूछताछ में कुबूल किया जुर्म, नाले में मिला था शव
दिल्ली लाकर जब दोनों से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उन्होंने युवराज सिंह मनचंदा की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली। आरोपियों ने बताया कि हत्या को अंजाम देने के बाद उन्होंने शव को ठिकाने लगाने के लिए गुरुग्राम में अपने घर के पास स्थित एक नाले में फेंक दिया था। इस इकबालिया बयान के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने गुरुग्राम पुलिस से संपर्क साधा।
पड़ताल में सामने आया कि 10 सितंबर को ही गुरुग्राम के बादशाहपुर थाना अंतर्गत एक नाले से लावारिस हालत में एक शव बरामद किया गया था। दिल्ली पुलिस ने जब उस अज्ञात शव के चित्र युवराज के परिजनों को दिखाए, तो उन्होंने तुरंत उसकी पहचान अपने बेटे के रूप में की।
वारदात की पूरी साजिश खंगालने में जुटी पुलिस टीम
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब तक प्राप्त तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अन्या वत्स और संयम सचदेवा की हत्या करने तथा साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को नाले में फेंकने में सीधी भूमिका स्पष्ट हो चुकी है। कोर्ट से मिली 5 दिन की पुलिस कस्टडी के दौरान अब जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हत्या किस स्थान पर और किस समय की गई थी। साथ ही हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों, शव को नाले तक ले जाने के माध्यम और सबसे महत्वपूर्ण इस सनसनीखेज वारदात के पीछे के वास्तविक मकसद को तलाशने के लिए दोनों से गहन पूछताछ की जा रही है।



















