ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव को छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कुछ ही हफ्तों में तेहरान का निजाम बदलने की उम्मीद लगाए वाशिंगटन को अब तक नाकामी ही हाथ लगी है। भारी सैन्य दबाव और अरबों डॉलर खर्च करने के बावजूद न तो युद्ध समाप्त हो सका है और न ही ईरान की सत्ता संरचना में कोई बदलाव आया है। इसके विपरीत, लंबे खिंचते संघर्ष ने अमेरिकी रणनीतिकारों के सामने कई गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
सैन्य ठिकानों और नौसेना को भारी नुकसान
इस टकराव के दौरान अरब देशों में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ईरान की ओर से करारा नुकसान पहुंचाया गया है। इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना के कुछ प्रमुख विमानवाहक पोत भी इस संघर्ष में प्रभावित हुए हैं। युद्ध के प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा दिया है। संसाधन झोंकने के बाद भी मैदान पर वांछित परिणाम हासिल नहीं हो सके हैं।
तेहरान में एकजुटता मार्च और नागरिकों की लामबंदी
ईरान की राजधानी तेहरान की सड़कों पर हजारों नागरिकों ने उतरकर शक्ति प्रदर्शन किया है। इस एकजुटता मार्च में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने खुद शिरकत की। मार्च के दौरान पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाएं भी हथियारों से लैस नजर आईं। प्रदर्शनकारियों ने अंतिम क्षण तक मुकाबला जारी रखने का संकल्प दोहराया, जिससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि जनसमर्थन के दम पर ईरानी नेतृत्व पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है।



















