क्रिकेट मुकाबले के दौरान खिलाड़ियों का चोटिल होना एक सामान्य बात है, लेकिन कई मौकों पर क्रिकेटर्स ने अपनी टीम के लिए गंभीर चोट के बावजूद मैदान पर उतरकर अदम्य साहस का परिचय दिया है। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स मैदान पर जारी टेस्ट मैच के दौरान पाकिस्तान टीम के सलामी बल्लेबाज इमाम उल हक के एक कदम ने विवाद खड़ा कर दिया है। मैच के पहले दिन फील्डिंग करते समय इमाम उल हक को मामूली काफ इंजरी यानी पिंडली की चोट लग गई थी। इसके बाद जब टीम को बल्लेबाजी के दौरान उनकी सख्त जरूरत थी, तब वह मैदान पर आने के बजाय ड्रेसिंग रूम में ही बैठे रहे।
चोट के बावजूद खेलने वाले खिलाड़ियों की मिसाल
इमाम उल हक के इस फैसले के बाद क्रिकेट जगत में उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। फैंस और खेल प्रेमियों का मानना है कि राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करते समय खिलाड़ी को थोड़ी दर्दनाक परिस्थिति में भी जज्बा दिखाना चाहिए। अतीत में ऐसे कई ऐतिहासिक क्षण रहे हैं जब खिलाड़ियों ने असहनीय दर्द के बाद भी देश के लिए बल्लेबाजी की। भारत के खिलाफ एक टेस्ट मैच में इंग्लैंड के तेज गेंदबाज क्रिस वोक्स टूटे हुए कंधे के साथ बल्लेबाजी करने क्रीज पर आए थे। इसी तरह भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने टूटे अंगूठे के बावजूद टीम के लिए संघर्ष किया था। वहीं ऑस्ट्रेलिया के स्पिनर नाथन लायन ने पैर फ्रैक्चर होने के बाद भी क्रीज पर कदम रखकर सबका दिल जीता था।
शान मसूद ने संभाली ओपनिंग की जिम्मेदारी
पाकिस्तानी सलामी बल्लेबाज इमाम उल हक की अनुपस्थिति के कारण पाकिस्तान की पारी की शुरुआत करने के लिए शान मसूद को मैदान पर उतरना पड़ा। इमाम उल हक का मामूली चोट के कारण बल्लेबाजी के लिए न उतरना प्रशंसकों को निराश कर गया। सोशल मीडिया से लेकर खेल विशेषज्ञों तक, हर जगह उनकी खेल भावना और प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कई पूर्व क्रिकेट प्रेमियों का कहना है कि जब टीम कठिन दौर से गुजर रही हो, तब खिलाड़ियों को अपनी व्यक्तिगत सुविधा से ऊपर उठकर टीम के हित में सोचना चाहिए।


















