मौसम में आ रहे लगातार बदलाव के कारण उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर क्षेत्र में छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल रहा है। इन दिनों बच्चों में वायरल इन्फेक्शन के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, जिनमें तेज बुखार, उल्टी का अहसास होना और दस्त (लूज मोशन) मुख्य लक्षण हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बच्चों में इन लक्षणों की अनदेखी करना भारी पड़ सकता है, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने से शरीर में पानी की गंभीर कमी हो सकती है।
लापरवाही बन सकती है गंभीर खतरा
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ देवराज यादव ने बताया कि अस्पताल में आने वाले अधिकांश बच्चे वायरल बुखार, वोमिटिंग और दस्त की शिकायत से ग्रस्त हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दस्त और उल्टी की स्थिति में बच्चे का शरीर तेजी से डिहाइड्रेट होने लगता है। यदि इस स्थिति पर तुरंत ध्यान न दिया जाए, तो बच्चे की हालत अत्यंत नाजुक हो सकती है। कई मामलों में अत्यधिक डिहाइड्रेशन होने के बाद डॉक्टरों के लिए स्थिति को नियंत्रित करना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसलिए किसी भी प्रकार के वायरल लक्षण सामने आते ही तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पर जाकर डॉक्टरी परामर्श लेना बेहद जरूरी है।
प्राथमिक उपचार में ORS और पैरासिटामोल की भूमिका
यदि तुरंत अस्पताल पहुंचना संभव न हो, तो घर पर ही बच्चों को प्राथमिक राहत देना आवश्यक होता है। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ देवराज यादव का सुझाव है कि बाजार और सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों (PHC व CHC) पर आसानी से उपलब्ध ORS का पाउडर घोल बनाकर बच्चे को बार-बार पिलाते रहना चाहिए। यह घोल शरीर में पानी और आवश्यक लवणों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही, बुखार को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार पैरासिटामोल सिरप दी जा सकती है। हालांकि, यह प्राथमिक उपाय केवल अस्थायी राहत के लिए है और जितनी जल्दी हो सके बच्चे की डॉक्टरी जांच कराई जानी चाहिए।
मेडिकल कॉलेज में 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध
स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करते हुए मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक (बाल रोग) वार्ड में चौबीसों घंटे इलाज की व्यवस्था की गई है। डॉक्टर देवराज यादव के अनुसार, "हमारे मेडिकल कॉलेज के पीडिया वार्ड और इमरजेंसी में बाल रोग विशेषज्ञ 24 घंटे तैनात रहते हैं।" यदि किसी बच्चे की तबीयत अधिक बिगड़ती दिखती है, तो अभिभावक बिना देर किए उसे सीधे मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में ला सकते हैं। डॉक्टरों की समर्पित टीम की देखरेख में मरीजों का संपूर्ण इलाज किया जा रहा है, और अधिकांश बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट रहे हैं।



















