राजस्थान के कोटा शहर से होकर गुजरने वाली चंबल नदी अब केवल जल आपूर्ति और दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं रही है। इस नदी का शांत वातावरण और स्वच्छ जल वन्यजीवों के लिए एक बेहतरीन आश्रय स्थल बनता जा रहा है। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व से सटे चंबल नदी के हिस्सों में दुर्लभ जलीय जीवों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में इस क्षेत्र में ऊदबिलावों के एक परिवार का वीडियो कैमरे में दर्ज किया गया है। इसमें वयस्क ऊदबिलाव अपने छोटे बच्चों को नदी के पानी में मछलियों का शिकार करने की तकनीक सिखाते हुए स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य नदी के प्राकृतिक वातावरण में आ रहे सकारात्मक बदलावों को उजागर करता है।
शिकार की ट्रेनिंग और प्राकृतिक जीवन चक्र
नदी के क्षेत्र में ऊदबिलावों का अपने बच्चों को शिकार सिखाना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि ऊदबिलाव यहाँ केवल भोजन की तलाश में कुछ समय के लिए नहीं आ रहे हैं, बल्कि उन्होंने चंबल को अपना स्थायी निवास बना लिया है। यहाँ उनका कुनबा प्राकृतिक रूप से वंश वृद्धि कर रहा है और अपना जीवन चक्र आगे बढ़ा रहा है। जलीय जीवों के व्यवहार का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, जब वयस्क जीव अपने बच्चों को शिकार की कला सिखाते हैं, तो यह उस प्रजाति के उस क्षेत्र में स्थायी रूप से बसने की पुष्टि करता है। चंबल का शांत और प्रदूषण मुक्त जल इनके प्रजनन और पालन-पोषण के लिए बेहद अनुकूल साबित हो रहा है।
इकोसिस्टम का मजबूत संकेतक और बढ़ती संख्या
पर्यावरण और वन्यजीव शोधकर्ताओं के मुताबिक, किसी भी नदी में ऊदबिलावों का पाया जाना उस नदी के स्वस्थ जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) का सबसे बड़ा सबूत होता है। ऊदबिलाव केवल अत्यधिक स्वच्छ और मीठे पानी में ही रहना पसंद करते हैं, जहाँ उनका मुख्य आहार मछलियां और अन्य छोटे जलीय जीव प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हों। वर्तमान में मुकुंदरा और चंबल के इस क्षेत्र में लगभग 20 ऊदबिलावों की उपस्थिति का आकलन किया गया है। यदि प्राकृतिक परिस्थितियां इसी प्रकार अनुकूल बनी रहीं और मानवीय हस्तक्षेप सीमित रहा, तो आने वाले समय में चंबल में ऊदबिलावों की आबादी बढ़कर 50 तक पहुँच सकती है।
वाइल्डलाइफ टूरिज्म और मानसून की सुंदरता
चंबल में ऊदबिलावों के बढ़ते कुनबे का सीधा असर स्थानीय वाइल्डलाइफ टूरिज्म पर भी देखने को मिल रहा है। वन्यजीवों और फोटोग्राफी में रुचि रखने वाले लोग इन दुर्लभ जीवों की झलक पाने के लिए चंबल के किनारों पर पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही, मानसून के मौसम में चंबल का स्वरूप और भी मनमोहक हो गया है। नदी की ऊंची-नीची चट्टानी कराइयों से पानी के सुंदर झरने गिर रहे हैं, जिससे पर्यटकों को एक ही स्थान पर नदी, झरने, जंगल और वन्यजीवों का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। कोटा प्रशासन वाटर सफारी और जंगल सफारी को जोड़कर पर्यटन को नया बढ़ावा दे रहा है। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व और चंबल की यह संयुक्त प्राकृतिक धरोहर अब वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक नया और आकर्षण भरा केंद्र बन रही है।




















