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राजस्थान के कोटा में चंबल किनारे बढ़े ऊदबिलाव, जलीय पर्यावरण में सुधार के मिल रहे स्पष्ट संकेतराजस्थान
29 अग॰ 2026, 6:40 am (1 घंटे पहले)· 3

राजस्थान के कोटा में चंबल किनारे बढ़े ऊदबिलाव, जलीय पर्यावरण में सुधार के मिल रहे स्पष्ट संकेत

कोटा में चंबल नदी और मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के समीप ऊदबिलावों का समूह कैमरे में कैद हुआ है, जहाँ वयस्क अपने शावकों को शिकार सिखाते दिखे। विशेषज्ञों के अनुसार नदी में करीब 20 ऊदबिलाव मौजूद हैं जिनकी संख्या 50 तक पहुँच सकती है।

राजस्थान के कोटा शहर से होकर गुजरने वाली चंबल नदी अब केवल जल आपूर्ति और दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं रही है। इस नदी का शांत वातावरण और स्वच्छ जल वन्यजीवों के लिए एक बेहतरीन आश्रय स्थल बनता जा रहा है। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व से सटे चंबल नदी के हिस्सों में दुर्लभ जलीय जीवों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में इस क्षेत्र में ऊदबिलावों के एक परिवार का वीडियो कैमरे में दर्ज किया गया है। इसमें वयस्क ऊदबिलाव अपने छोटे बच्चों को नदी के पानी में मछलियों का शिकार करने की तकनीक सिखाते हुए स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य नदी के प्राकृतिक वातावरण में आ रहे सकारात्मक बदलावों को उजागर करता है।

शिकार की ट्रेनिंग और प्राकृतिक जीवन चक्र

नदी के क्षेत्र में ऊदबिलावों का अपने बच्चों को शिकार सिखाना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि ऊदबिलाव यहाँ केवल भोजन की तलाश में कुछ समय के लिए नहीं आ रहे हैं, बल्कि उन्होंने चंबल को अपना स्थायी निवास बना लिया है। यहाँ उनका कुनबा प्राकृतिक रूप से वंश वृद्धि कर रहा है और अपना जीवन चक्र आगे बढ़ा रहा है। जलीय जीवों के व्यवहार का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, जब वयस्क जीव अपने बच्चों को शिकार की कला सिखाते हैं, तो यह उस प्रजाति के उस क्षेत्र में स्थायी रूप से बसने की पुष्टि करता है। चंबल का शांत और प्रदूषण मुक्त जल इनके प्रजनन और पालन-पोषण के लिए बेहद अनुकूल साबित हो रहा है।

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इकोसिस्टम का मजबूत संकेतक और बढ़ती संख्या

पर्यावरण और वन्यजीव शोधकर्ताओं के मुताबिक, किसी भी नदी में ऊदबिलावों का पाया जाना उस नदी के स्वस्थ जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) का सबसे बड़ा सबूत होता है। ऊदबिलाव केवल अत्यधिक स्वच्छ और मीठे पानी में ही रहना पसंद करते हैं, जहाँ उनका मुख्य आहार मछलियां और अन्य छोटे जलीय जीव प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हों। वर्तमान में मुकुंदरा और चंबल के इस क्षेत्र में लगभग 20 ऊदबिलावों की उपस्थिति का आकलन किया गया है। यदि प्राकृतिक परिस्थितियां इसी प्रकार अनुकूल बनी रहीं और मानवीय हस्तक्षेप सीमित रहा, तो आने वाले समय में चंबल में ऊदबिलावों की आबादी बढ़कर 50 तक पहुँच सकती है।

वाइल्डलाइफ टूरिज्म और मानसून की सुंदरता

चंबल में ऊदबिलावों के बढ़ते कुनबे का सीधा असर स्थानीय वाइल्डलाइफ टूरिज्म पर भी देखने को मिल रहा है। वन्यजीवों और फोटोग्राफी में रुचि रखने वाले लोग इन दुर्लभ जीवों की झलक पाने के लिए चंबल के किनारों पर पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही, मानसून के मौसम में चंबल का स्वरूप और भी मनमोहक हो गया है। नदी की ऊंची-नीची चट्टानी कराइयों से पानी के सुंदर झरने गिर रहे हैं, जिससे पर्यटकों को एक ही स्थान पर नदी, झरने, जंगल और वन्यजीवों का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। कोटा प्रशासन वाटर सफारी और जंगल सफारी को जोड़कर पर्यटन को नया बढ़ावा दे रहा है। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व और चंबल की यह संयुक्त प्राकृतिक धरोहर अब वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक नया और आकर्षण भरा केंद्र बन रही है।

सवाल-जवाब

कोटा में हाल ही में कैमरे में क्या दर्ज हुआ है?
चंबल नदी के किनारे ऊदबिलावों का एक परिवार कैमरे में कैद हुआ है, जिसमें वयस्क ऊदबिलाव अपने बच्चों को मछलियों का शिकार करना सिखा रहे थे।
चंबल नदी में वर्तमान में कितने ऊदबिलाव होने का अनुमान है?
विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल इस क्षेत्र में लगभग 20 ऊदबिलाव मौजूद हैं, जिनकी संख्या अनुकूल माहौल रहने पर 50 तक पहुँच सकती है।
नदी में ऊदबिलावों का होना क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?
ऊदबिलाव केवल स्वच्छ और मीठे पानी में रहते हैं, इसलिए उनकी मौजूदगी नदी के स्वस्थ और प्रदूषण मुक्त इकोसिस्टम का संकेत है।
यह घटना किस टाइगर रिजर्व के पास की है?
यह घटना कोटा में मुकुंदरा टाइगर रिजर्व से लगे चंबल नदी के हिस्से की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 मिनट पहले

चंबल नदी के किनारे ऊदबिलावों का इस तरह बसना और शावकों को शिकार सिखाना जलीय पर्यावरण में आए सुधार का स्पष्ट संकेत है। एक क्राइम संवाददाता के रूप में मेरा मानना है कि वन्यजीवों की बढ़ती यह आबादी इस बात की पुष्टि करती है कि यहाँ प्रदूषण नियंत्रण और प्राकृतिक संरक्षण के उपाय प्रभावी रहे हैं। यदि मुकुंदरा रिजर्व और चंबल के इस क्षेत्र में मानवीय दखल और अवैध शिकार जैसी गतिविधियों पर ऐसी ही कड़ी निगरानी बनी रही, तो आगामी दिनों में इनकी संख्या पचास तक पहुँचने का लक्ष्य पूरी तरह संभव है।

Rohan Verma@rohan-verma·6 मिनट पहले

चंबल नदी के इस क्षेत्र में ऊदबिलावों का स्थायी वास और शावकों को प्रशिक्षण देना यह साबित करता है कि यहाँ का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र काफी मजबूत हुआ है। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के पास मानवीय हस्तक्षेप और अवैध गतिविधियों पर यदि ऐसी ही सख्ती जारी रही, तो न केवल इनकी संख्या पचास तक पहुँचेगी, बल्कि यह क्षेत्र इको-टूरिज्म के एक बड़े केंद्र के रूप में भी स्थापित होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

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