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मुस्कान के पीछे का दर्द: भारतीय क्रिकेटर स्मृति मंधाना ने बताया मैदान की हार और अकेलेपन में आंसुओं का सचक्रिकेट
19 सित॰ 2026, 11:34 pm (22 मिनट पहले)· 0

मुस्कान के पीछे का दर्द: भारतीय क्रिकेटर स्मृति मंधाना ने बताया मैदान की हार और अकेलेपन में आंसुओं का सच

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने पॉडकास्ट में अपनी निजी भावनाओं और खेल की निराशाओं से निपटने के तौर-तरीकों पर खुलकर बात की है।

क्रिकेट पिच पर गेंदबाजों के पसीने छुड़ाने वाली और मैदान में हमेशा शांत व हंसमुख नजर आने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ओपनर बल्लेबाज स्मृति मंधाना का एक बेहद निजी और संजीदा पहलू सामने आया है। चौकों-छक्कों की चमक और प्रशंसकों की तालियों के बीच अक्सर एथलीटों के भीतर की भावनात्मक कशमकश छिप जाती है। भारतीय टीम की प्रमुख बल्लेबाज ने अब अपनी उस दुनिया का पर्दाफाश किया है जिसे वह अमूमन कैमरों और सार्वजनिक मंचों से पूरी तरह दूर रखती हैं। उनका कहना है कि वह मुश्किल पलों में अपनी भावनाओं को बहुत अधिक समय तक मन पर हावी नहीं होने देतीं, फिर भी कभी-कभार क्रिकेट के मैदान पर मिलने वाली दिल तोड़ने वाली हार उन्हें तन्हाई में रोने पर मजबूर कर देती है।

भावुकता की जगह व्यावहारिक नजरिया

राज शमानी के पॉडकास्ट शो 'फिगरिंग आउट' में अपनी मौजूदगी के दौरान जब स्मृति मंधाना से उनकी आंतरिक भावनाओं और आंसुओं को लेकर चर्चा की गई, तो उन्होंने बेहद दिलचस्प बातें साझा कीं। मंधाना ने स्पष्ट किया कि वह खुद को लगातार उदास रहने वाले या बात-बात पर रोने वाले इंसानों की श्रेणी में नहीं रखती हैं। उनका मानना है कि किसी भी कड़वी बात या घटना पर बेवजह घंटों मंथन करते रहना उन्हें कतई रास नहीं आता है। जब उनके आस-पास के लोग किसी स्थिति को लेकर गहरे जज्बाती हो जाते हैं, तब भी उनका रुख काफी व्यावहारिक बना रहता है। वह किसी भी तकलीफदेह अनुभव या गम में लंबे समय तक फंसे रहने की बजाय तेजी से उससे आगे निकल जाने को प्राथमिकता देती हैं।

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तन्हाई और आंसुओं का एकांत ठिकाना

व्यावहारिक सोच रखने के बावजूद स्मृति मंधाना ने इस सच्चाई को भी स्वीकारा कि आखिरकार वह भी एक इंसान हैं और उनकी आंखों में भी कभी-कभी आंसू आ जाते हैं। उन्होंने बातचीत के दौरान बताया कि जब भी वह खुद को बेहद भावुक पाती हैं, तो इसके लिए वह किसी सार्वजनिक स्थान के बजाय पूरी तन्हाई या फिर अपने बेहद चुनिंदा करीबी लोगों का साथ चुनती हैं। हल्के-फुल्के मजाकिया अंदाज में उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि कई बार वह वॉशरूम अथवा शॉवर में अपनी दबी हुई भावनाओं को पूरी तरह बाहर बह जाने देती हैं। इसके अतिरिक्त, जीवन में केवल एक या दो ऐसे बेहद खास और भरोसेमंद लोग हैं जिनके सामने वह बिना किसी हिचक के अपनी आंखें नम होने दे सकती हैं।

सिनेमाई कहानियों का गहरा असर

पॉडकास्ट में जब स्मृति से यह सवाल किया गया कि वह पिछली बार किस मौके पर रोई थीं, तो उनके जवाब ने कई लोगों को हैरत में डाल दिया। स्टार बल्लेबाज ने खुलासा किया कि वास्तविक जीवन के उतार-चढ़ावों की तुलना में सिनेमा और फिल्मों की कहानियां उनके मन पर कहीं अधिक गहरा जज्बाती असर छोड़ती हैं। उन्होंने इस संदर्भ में एक वाकया साझा करते हुए बताया कि हाल ही में 'मुसाफिर कैफे' देखते हुए वह बेहद भावुक हो उठी थीं और उस दौरान उनकी आंखों से आंसू टपक पड़े थे। यह दिखाता है कि भले ही वह अपनी निजी जिंदगी में भावनाओं पर नियंत्रण रखती हों, मगर कला और कहानियों के मार्मिक दृश्य उनके दिल को तुरंत छू लेते हैं।

विश्व कप की वो हार जो आज भी चुभती हैं

मैदान पर करियर के दौरान मिलने वाले झटकों और असफलताओं पर बात करते हुए स्मृति मंधाना ने खुलकर माना कि अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की कुछ पराजयों ने उन्हें भीतर तक हिलाकर रख दिया था। उन्होंने विशेष तौर पर वर्ष 2024 के दुबई टी20 विश्व कप का उल्लेख किया, जिसकी हार उनके जेहन में एक गहरा घाव छोड़ गई। इसके साथ ही वर्ष 2026 के टी20 विश्व कप का जिक्र भी आया, जहां भारतीय टीम का सेमीफाइनल की दहलीज तक भी न पहुंच पाना उनके लिए अत्यंत निराशाजनक और पीड़ादायी रहा था। स्मृति ने अपनी बात पूरी करते हुए साफ तौर पर रेखांकित किया कि हर गहरे दर्द की अभिव्यक्ति आंसुओं से ही हो यह आवश्यक नहीं है। कई मौकों पर मुकाबले के तुरंत बाद उनकी आंखों से आंसू नहीं बहते, लेकिन मैच गंवाने की वह टीस और कसक लंबे समय तक उनके अंतर्मन में समाई रहती है।

सवाल-जवाब

स्मृति मंधाना ने अपनी निजी भावनाओं को लेकर किस पॉडकास्ट में बात की?
स्मृति मंधाना ने राज शमानी के लोकप्रिय पॉडकास्ट 'फिगरिंग आउट' में अपने आंसुओं और भावनात्मक पलों पर खुलकर बात की।
स्मृति मंधाना अपनी भावनाएं बाहर निकालने के लिए किस जगह को चुनती हैं?
उन्होंने बताया कि वह अक्सर वॉशरूम या शॉवर में अकेले रहकर अपनी भावनाएं बाहर आने देती हैं अथवा एक-दो बेहद करीबी लोगों के सामने रोती हैं।
स्मृति मंधाना को हाल ही में किस फिल्म को देखकर रोना आया था?
स्मृति मंधाना ने बताया कि हाल ही में 'मुसाफिर कैफे' देखते समय वह भावुक हो गई थीं और उनकी आंखों में आंसू आ गए थे।
क्रिकेट के किन टूर्नामेंटों की हार ने स्मृति मंधाना को सबसे ज्यादा आहत किया?
उन्होंने खास तौर पर 2024 के दुबई टी20 विश्व कप और 2026 के टी20 विश्व कप में सेमीफाइनल तक न पहुंच पाने के दर्द का जिक्र किया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 मिनट पहले

स्मृति मंधाना का यह स्वीकार करना कि शीर्ष स्तर के खेल दबाव में मानसिक संघर्ष और एकांत में आंसू शामिल होते हैं, महिला क्रिकेटरों के मानसिक स्वास्थ्य पर एक अहम बहस छेड़ता है। एथलीटों के जीवन में सार्वजनिक सफलता और निजी संघर्ष का यह संतुलन दिखाता है कि उच्च-प्रदर्शन वाले खेलों में मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन अब कितना अनिवार्य हो गया है।

Neha Verma@neha-verma·5 मिनट पहले

स्मृति मंधाना का यह साझा करना कि वह अपने तनाव को शॉवर या तन्हाई में बाहर निकालती हैं, आधुनिक महिला एथलीटों के जीवन में मानसिक दबाव और कार्य-जीवन संतुलन के एक नए पहलू को उजागर करता है। आज के समय में जब महिला क्रिकेट और खिलाड़ियों की ब्रांड वैल्यू तेजी से बढ़ रही है, मैदान के बाहर की इस संवेदनशीलता को समझना उनके संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास के लिए बेहद आवश्यक है।

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