सिनेमा जगत के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के आकस्मिक निधन ने कला प्रेमियों को गहरे सदमे में डाल दिया है। उनके जाने का दर्द सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी उनके प्रशंसकों और खेल जगत की हस्तियों के बीच गहरा शोक देखा जा रहा है। खेल और कला की सीमाओं को लांघते हुए कई पाकिस्तानी क्रिकेटरों ने इस वरिष्ठ अभिनेता को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। पूर्व क्रिकेटर बासित अली ने एक वीडियो संदेश के जरिए दिवंगत अभिनेता के साथ अपने निजी संबंधों को याद किया और उन्हें एक आत्मीय भाई, सच्चा साथी तथा एक अमर लीजेंड के रूप में स्मरण किया। इसके साथ ही क्रिकेटर उमर अकमल ने भी सोशल मीडिया मंच पर नाना पाटेकर की तस्वीर साझा कर अपना दुख व्यक्त किया। उमर अकमल ने लिखा कि भले ही उनका सफर पूरा हो गया हो, परंतु उनका प्रभाव आने वाली कई पीढ़ियों तक गूंजता रहेगा।
गोवा में दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन
नाना पाटेकर 75 वर्ष के थे और उन्होंने गोवा में स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। गुरुवार तड़के उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा था। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। वहां मौजूद चिकित्सकों के दल ने उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए तकरीबन 45 मिनट से एक घंटे तक लगातार सीपीआर दिया और हर संभव आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया अपनाई। इन तमाम प्रयासों के बावजूद चिकित्सक उन्हें बचा नहीं सके। उनके इस अचानक चले जाने की सूचना मिलते ही दोनों देशों के चाहने वालों में निराशा और स्तब्धता छा गई।
साल 2019 में शुरू हुआ था आत्मीय संवाद
बासित अली ने नाना पाटेकर के साथ अपनी बातचीत के सफर को साझा करते हुए बताया कि दोनों के बीच संपर्क की शुरुआत साल 2019 में हुई थी। समय बीतने के साथ यह साधारण जान-पहचान एक बेहद आत्मीय और गहरे पारिवारिक रिश्ते में बदल गई। उन्होंने बताया कि पर्दे पर अत्यंत कड़क, गंभीर और उग्र दिखने वाले नाना पाटेकर असल जिंदगी में बिल्कुल विपरीत स्वभाव के थे। वे बेहद नर्म दिल, संवेदनशील और दूसरों की परवाह करने वाले इंसान थे। जब भी कोई व्यक्तिगत परेशानी सामने आती, वे एक मजबूत सहारे की तरह खड़े रहते थे।
मुश्किल दौर में हर हफ्ते फोन कर जानते थे मां का हाल
पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर ने उस दौर को याद किया जब उनकी मां गंभीर बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती थीं। बासित अली के मुताबिक, नाना पाटेकर उस नाजुक समय में हर हफ्ते फोन किया करते थे। फोन पर वे सिर्फ औपचारिक स्वास्थ्य का हाल नहीं लेते थे, बल्कि उनकी मां से देर तक बातें करते थे। बातचीत के दौरान वे उन्हें दिलासा देते, दुआएं पढ़ते और पुरानी कहानियां सुनाकर उनका हौसला बढ़ाते थे। जब उनकी मां का इंतकाल हो गया, तब भी नाना पाटेकर ने फोन करके बासित अली को सांत्वना दी और खुद की सेहत की देखभाल करने की खास ताकीद की थी।
हार्ट सर्जरी के बाद भी लगातार बनाए रखा संपर्क
स्वास्थ्य संबंधी संकट के दौरान नाना पाटेकर के आत्मीय व्यवहार का एक और उदाहरण देते हुए बासित अली ने बताया कि जब उनकी खुद की दिल की सर्जरी हुई थी और वे ठीक हो रहे थे, तब भी अभिनेता ने संदेश भेजा था। नाना पाटेकर ने संदेश में उनका हालचाल पूछा था और हिदायत दी थी कि पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही उन्हें कॉल करें। बासित अली ने बताया कि जब उन्होंने ठीक होने के बाद फोन मिलाया, तो नाना पाटेकर ने जिस गहराई, प्यार और फिक्र के साथ बातचीत की, उसने उनका दिल छू लिया। पर्दे पर भले ही उनकी संवाद अदायगी और रोबीली मौजूदगी दर्शकों को चकित करती थी, लेकिन निजी जिंदगी में उनका हास्यबोध और चुलबुलापन भी उतना ही अनोखा था। जब कभी बासित अली उनसे फिल्मों के दृश्यों के बारे में सवाल पूछते, तो वे हंसते हुए मजाकिया लहजे में कहते थे कि तुम क्या जानते हो, चुप रहो।
परिंदा और क्रांतिवीर से बनाई थी अमिट पहचान
नाना पाटेकर ने अपने लंबे और शानदार अभिनय करियर में भारतीय सिनेमा को कई ऐतिहासिक फिल्में दीं। परिंदा, क्रांतिवीर और सलाम बॉम्बे जैसी फिल्मों में निभाए गए उनके किरदारों ने अभिनय के नए प्रतिमान स्थापित किए। हिंदी सिनेमा के साथ-साथ मराठी सिनेमा में भी उनका योगदान असाधारण रहा। उनके संवाद बोलने का अनूठा अंदाज और अभिनय की तीव्रता दर्शकों के दिलों पर छा गई। बासित अली ने कहा कि नाना पाटेकर की कला और लोकप्रियता किसी भौगोलिक सीमा में बंधी नहीं थी। भारत की तरह ही पाकिस्तान में भी उनके काम को गहराई से चाहने वाले लोग मौजूद हैं। एक बड़े और वरिष्ठ कलाकार होने के बावजूद उन्होंने जिस सरलता और अपनेपन से रिश्ते निभाए, उसे शब्दों में समेटना मुमकिन नहीं है और उनका जाना पूरी कला दुनिया के लिए एक बड़ी क्षति है।



















