आंध्र प्रदेश स्थित विश्व प्रसिद्ध श्रीवारी मंदिर के सामने सोशल मीडिया रील बनाने और फिल्मी धुनों पर नृत्य करने का मामला सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। तिरुपति तिरुमला देवस्थानम (TTD) ट्रस्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तिरुमला पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। इसके साथ ही, रील शूटिंग के समय मौके पर मौजूद रहने के बावजूद इसे न रोकने वाले सुरक्षा कर्मचारियों को भी उनकी ड्यूटी से हटा दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पवित्र धाम की मर्यादा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
नियमों का उल्लंघन कर बनाई गई थी रील
मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार की रील, शॉर्ट वीडियो या मनोरंजक रिकॉर्डिंग करने पर पहले से ही पूर्ण प्रतिबंध लागू है। इसके बावजूद कुछ श्रद्धालुओं ने परिसर के नियमों को दरकिनार कर दिया। उन्होंने मंदिर के ठीक सामने फिल्मी गानों पर थिरकते हुए वीडियो रिकॉर्ड किए और बाद में इन्हें विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर भी कर दिया। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, मंदिर प्रबंधन के संज्ञान में पूरा मामला आ गया।
लापरवाह कर्मचारियों पर गाज
इस घटनाक्रम में केवल रील बनाने वालों पर ही नहीं, बल्कि मंदिर की सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों पर भी गाज गिरी है। रिकॉर्ड किए गए वीडियो में देखा गया कि जब कुछ जोड़े मंदिर के पास रील शूट कर रहे थे, तब वहां तैनात कर्मचारी पास से गुजरे लेकिन उन्होंने इस गतिविधि को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया। मंदिर प्रशासन ने इसे अपने कर्तव्यों में घोर लापरवाही माना और तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारियों से बेदखल कर दिया।
मर्यादा और गरिमा बनाए रखने की अपील
टीटीडी प्रशासन ने दुनिया भर से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं से भावुक और स्पष्ट अपील जारी की है। प्रशासन का कहना है कि तिरुपति बालाजी मंदिर केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर का वातावरण सदैव गोविंदा के पवित्र जयकारों और अलौकिक शांति से परिपूर्ण रहता है। ऐसे में फिल्मी गानों पर डांस करना या लाइक्स के लिए रील बनाना इस पावन स्थल की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
धार्मिक स्थलों पर बढ़ता सोशल मीडिया का प्रभाव
हाल के दिनों में देश के विभिन्न प्रमुख धार्मिक स्थलों से सोशल मीडिया रील बनाने के कई मामले सामने आए हैं। तिरुपति मंदिर प्रशासन के इस कड़े रुख ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि आस्था के केंद्रों पर मोबाइल और कैमरे के उपयोग की सीमाएं क्या होनी चाहिए। तीर्थयात्री यहां दूर-दूर से शांति, दर्शन और आत्मिक संतोष पाने आते हैं, इसलिए हर व्यक्ति का यह नैतिक और कानूनी दायित्व है कि वह परिसर के नियमों और अन्य श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करे। TTD ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य में भी ऐसे किसी भी उल्लंघन पर सीधी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।


















