टीम इंडिया के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर का कॉन्ट्रैक्ट 2027 वनडे विश्व कप तक है, मगर इतने लंबे कार्यकाल के बावजूद उनकी कोचिंग शैली पर कई बार सवाल खड़े हो चुके हैं. इसी माहौल में पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने साफ कर दिया है कि फिलहाल वह इस कुर्सी की दौड़ में शामिल होने के मूड में नहीं हैं, और इसके पीछे उन्होंने अपनी निजी मजबूरी भी गिनाई.
गंभीर की जगह किन नामों की चर्चा
गंभीर की कोचिंग पर उठते सवालों के बीच उनके विकल्प के तौर पर दिग्गज बल्लेबाज रहे वीवीएस लक्ष्मण का नाम बार-बार सामने आता रहा है. लक्ष्मण इन दिनों बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के चीफ की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और जरूरत पड़ने पर वह भारतीय टीम को कोचिंग भी दे चुके हैं. इसी लिस्ट में एक और नाम आशीष नेहरा का भी जुड़ा, जिन्हें कई बार हेड कोच पद का दावेदार बताया गया, हालांकि नेहरा ने इस पर पहले कभी खुलकर कुछ नहीं बोला था.
बंगाल क्रिकेट संघ के मंच से टूटी चुप्पी
बंगाल क्रिकेट संघ के एक अवॉर्ड कार्यक्रम में आशीष नेहरा ने आखिरकार इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि भारतीय टीम का कोच बनना उनके लिए गर्व की बात जरूर होगी, लेकिन अभी उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं है. गौरतलब है कि नेहरा इस वक्त इंडियन प्रीमियर लीग में गुजरात टाइटंस के हेड कोच हैं और उनकी अगुआई में यह फ्रेंचाइजी तीन बार फाइनल तक पहुंच चुकी है, जबकि एक सीजन में खिताब भी अपने नाम कर चुकी है.
पत्नी की मंजूरी और तलाक का डर
टीम इंडिया की कमान न लेने के पीछे नेहरा ने घर-परिवार से जुड़ी वजह को सबसे अहम बताया. उनका कहना था कि इस भूमिका में साल के 8 से 9 महीने परिवार से दूर बिताने पड़ते हैं, जो उनके लिए आसान नहीं है. इसी बात को मजाकिया अंदाज में रखते हुए नेहरा ने कहा, "मैं सबसे पहले अपने हाई कमिशन जो की मेरी वाइफ है उसकी मंजूरी लूंगा, नहीं तो वह मुझे तलाक दे देगी." इस टिप्पणी से साफ झलका कि लगातार घर से दूर रहने वाला शेड्यूल उनके फैसले में सबसे बड़ी अड़चन है.
3-4 साल लगातार ट्रैवलिंग की शर्त
नेहरा ने यह भी समझाया कि आज के दौर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हेड कोच बनने का मतलब है कम से कम तीन से चार साल तक टीम के साथ लगातार सफर करना. उनके मुताबिक यही मौजूदा वक्त की मांग बन चुकी है, और इतने लंबे समय तक घर-परिवार से कटे रहना किसी के लिए भी बड़ा त्याग है. यही वजह है कि फिलहाल वह इस दौड़ से खुद को दूर रखना चाहते हैं, भले ही उनका नाम लगातार चर्चाओं में बना रहे. साफ है कि जब तक ट्रैवलिंग शेड्यूल और परिवार के बीच संतुलन नहीं बनता, तब तक नेहरा इस बड़ी जिम्मेदारी से दूरी बनाए रखेंगे.



















