वनडे क्रिकेट के इतिहास में एक ऐसा मुकाबला भी दर्ज है, जो टी20 मैच से भी कम समय में खत्म हो गया था। साल 2020 में नेपाल और अमेरिका के बीच कीर्तिपुर में खेला गया यह मैच सिर्फ 104 गेंदों में निपट गया था, और आज भी यह वनडे इतिहास के सबसे छोटे रनचेज के तौर पर याद किया जाता है।
अमेरिका की पारी 12 ओवर में सिमटी
पहले बल्लेबाजी करने उतरी अमेरिका की टीम नेपाली गेंदबाजों के सामने पूरी तरह बिखर गई। संदीप लामिछाने और सुशान भारी की जोड़ी ने ऐसी घातक गेंदबाजी की कि अमेरिका की पूरी टीम 12 ओवरों के भीतर महज 35 रन पर ऑल आउट हो गई। संदीप लामिछाने ने अकेले 6 विकेट चटकाए, जबकि सुशान भारी ने 4 बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। अमेरिका की तरफ से सिर्फ ओपनर जेवियर मार्शल ही ऐसे बल्लेबाज रहे जो दहाई का आंकड़ा पार कर सके, उन्होंने 16 रन बनाए। बाकी पूरी टीम मिलकर सिर्फ 19 रन ही जोड़ पाई, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नेपाल के गेंदबाजों ने कैसा कहर बरपाया था।
नेपाल ने 32 गेंद में भेद डाला लक्ष्य
महज 36 रन का लक्ष्य मिलने के बाद भी नेपाल की शुरुआत आसान नहीं रही। टीम के दोनों ओपनर बल्लेबाज सिर्फ 2 रन के स्कोर पर ही आउट हो गए, जिससे कुछ पल के लिए लगा कि अमेरिका की टीम मैच में वापसी कर सकती है। लेकिन इसके बाद क्रीज पर उतरे पारस खड़का और दीपेंद्र सिंह ऐरी ने कोई मौका नहीं गंवाया। दोनों बल्लेबाजों ने बिना कोई गलती किए सिर्फ 5.2 ओवरों में 36 रन बनाकर टीम को जीत दिला दी। इस तरह नेपाल ने महज 32 गेंदों में ही टारगेट को हासिल कर लिया। नेपाल ने यह मुकाबला 8 विकेट से अपने नाम किया और 268 गेंदें खेले बिना ही मैच खत्म हो गया।
टी20 से भी तेज खत्म हुआ वनडे मैच
क्रिकेट में इस समय तीन फॉर्मेट खेले जाते हैं, टेस्ट, वनडे और टी20। टेस्ट मैच पांच दिनों तक चलता है और हर दिन कम से कम 90 ओवर का खेल होना जरूरी होता है। वनडे मुकाबला 50-50 ओवरों का होता है, जबकि टी20 सिर्फ 20-20 ओवरों में खेला जाता है। मौजूदा दौर में क्रिकेट फैंस को टी20 फॉर्मेट सबसे ज्यादा पसंद आता है, क्योंकि कम समय में इसमें भरपूर रोमांच देखने को मिलता है। इसी टी20 फॉर्मेट की लोकप्रियता के चलते वनडे और टेस्ट क्रिकेट को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी में भी लगातार कमी देखी गई है। लेकिन नेपाल और अमेरिका के बीच हुआ यह मुकाबला इसका अपवाद साबित हुआ। दोनों टीमों ने मिलकर सिर्फ 104 गेंदें खेलीं, जो एक टी20 मैच में डाली जाने वाली औसत गेंदों से भी काफी कम है। यही वजह है कि इस मैच को आज भी वनडे इतिहास के सबसे छोटे और सबसे तेज रनचेज के तौर पर याद किया जाता है।


















