भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज अनिल कुंबले टेस्ट इतिहास के सबसे बेहतरीन गेंदबाजों में शुमार हैं। उन्होंने भारत के लिए 132 टेस्ट मैचों में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 619 विकेट झटके हैं। टेस्ट क्रिकेट में वह भारत की ओर से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज भी हैं। अनिल कुंबले ने साल 1990 में भारत के लिए अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की थी। खेल की शुरुआत में वह एक विशेषज्ञ स्पिनर की भूमिका निभाते थे, लेकिन उनके भीतर एक सक्षम बल्लेबाज की काबिलियत भी छिपी हुई थी।
निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी और ऐतिहासिक शतक
यही वजह रही कि अपने खेल के मध्य दौर में अनिल कुंबले ने भारतीय टीम के लिए कई ऐसी पारियां खेलीं, जो आज भी यादगार हैं। इसमें इंग्लैंड के खिलाफ लंदन में खेला गया वह मुकाबला भी शामिल है, जिसमें उन्होंने नाबाद 110 रनों की शानदार पारी खेली थी। कुंबले के टेस्ट करियर का यह इकलौता शतक था, लेकिन इस बेहतरीन उपलब्धि के साथ उनके नाम एक ऐसा अनचाहा रिकॉर्ड भी जुड़ गया, जो उनके लंबे करियर का एक अलग पहलू बन गया।
डेब्यू से लेकर पहले शतक तक का सबसे लंबा सफर
भले ही अनिल कुंबले को कभी शीर्ष क्रम के बल्लेबाज के रूप में नहीं देखा गया, लेकिन निचले क्रम पर आकर वह अपनी बल्लेबाजी से मैच की दिशा बदलने का हुनर रखते थे। अनिल कुंबले ने अपने पूरे टेस्ट सफर के दौरान 38.82 के स्ट्राइक रेट से कुल 2507 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से एक शतक और पांच अर्धशतक निकले। हालांकि, उनके करियर का यह एकमात्र शतक उनकी 151वीं पारी में आया था। इसी वजह से अनिल कुंबले के नाम टेस्ट डेब्यू के बाद अपने पहले शतक के लिए सबसे लंबा इंतजार करने का अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज हो गया।
वनडे क्रिकेट में भी रहा शानदार सफर
जिस तरह का दबदबा अनिल कुंबले का टेस्ट मैचों में रहा, वैसा ही उनका वनडे करियर भी बेहद शानदार रहा है। भारतीय टीम के लिए खेलते हुए अनिल कुंबले ने 271 एकदिवसीय मुकाबलों में हिस्सा लिया। इस छोटे और तेज प्रारूप में भी उनके नाम 337 विकेट दर्ज हैं। वनडे क्रिकेट में उनका सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन महज 12 रन देकर 6 विकेट लेना रहा है। अपने पूरे वनडे करियर के दौरान उन्होंने कुल दो बार पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा किया। गेंदबाजी के अलावा उन्होंने वनडे प्रारूप में भी उपयोगी योगदान देते हुए 938 रन बनाए।





















