भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जब भी एक ही ओवर की लगातार 6 गेंदों पर 6 छक्के लगाने की बात आती है, तो ज्यादातर फैंस के जेहन में सबसे पहले साल 2007 के T20 वर्ल्ड कप में युवराज सिंह द्वारा बनाया गया रिकॉर्ड उभरता है। साउथ अफ्रीका की धरती पर इंग्लैंड के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड के खिलाफ युवराज सिंह का वह आक्रामक रूप क्रिकेट प्रेमियों की यादों में आज भी ताजा है। हालांकि, बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि एक ओवर में 6 छक्के जड़ने वाले युवराज सिंह पहले भारतीय बल्लेबाज नहीं थे। उनसे 22 साल पहले ही एक दिग्गज भारतीय ऑलराउंडर ने घरेलू क्रिकेट में यह अभूतपूर्व उपलब्धि अपने नाम दर्ज करा ली थी।
1985 की रणजी ट्रॉफी में रवि शास्त्री का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
वर्ष 1985 में मुंबई और बड़ौदा के बीच खेले गए रणजी ट्रॉफी के एक बेहद रोमांचक मुकाबले के दौरान भारतीय क्रिकेट का पहला 6 छक्कों का रिकॉर्ड बना था। मुंबई की तरफ से बल्लेबाजी कर रहे रवि शास्त्री ने मैच की चौथी पारी में अपनी तूफानी बल्लेबाजी का नजारा पेश किया था। उन्होंने बड़ौदा के गेंदबाज के खिलाफ एक ही ओवर की सभी छह गेंदों पर हवाई शॉट खेलते हुए बाउंड्री पार कराई और इतिहास रच दिया।
जिस गेंदबाज के ओवर में रवि शास्त्री ने लगातार 6 छक्के लगाए थे, उनका नाम तिलक राज था। तिलक राज बड़ौदा टीम के बाएं हाथ के स्पिनर थे। हालांकि उस दौर में क्रिकेट मैचों का सीधा प्रसारण या आधुनिक ब्रॉडकास्टिंग तकनीक आज जैसी सुलभ नहीं थी। टीवी और डिजिटल मीडिया का विस्तार सीमित होने के कारण यह खबर आम फैंस तक उस तेजी से नहीं पहुंच सकी, जिस तरह आज के दौर में पहुंचती है। इसके बावजूद आधिकारिक क्रिकेट रिकॉर्ड्स में रवि शास्त्री का नाम प्रथम श्रेणी क्रिकेट में लगातार 6 छक्के लगाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी के रूप में दर्ज हो गया।
2007 T20 वर्ल्ड कप में युवराज सिंह का यादगार प्रदर्शन
रवि शास्त्री के इस ऐतिहासिक कारनामे के ठीक 22 साल बाद साल 2007 में भारत के युवा बल्लेबाज युवराज सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस कारनामे को दोहराया। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित T20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम मुख्य रूप से युवा खिलाड़ियों के भरोसे मैदान में उतरी थी। टूर्नामेंट के शुरुआती चरण में टीम को जीत का मुख्य दावेदार नहीं माना जा रहा था।
इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए महत्वपूर्ण मुकाबले में युवराज सिंह ने स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ही ओवर में 6 गगनचुंबी छक्के जड़कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। लाइव टेलीविजन ब्रॉडकास्ट के माध्यम से दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों ने पहली बार किसी भारतीय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 6 गेंदों पर 6 छक्के लगाते हुए देखा। इस ओवर ने न केवल मैच का रुख बदला, बल्कि भारतीय टीम के भीतर एक नया आत्मविश्वास भी भरा, जिसकी बदौलत भारत ने अंततः 2007 का T20 वर्ल्ड कप अपने नाम किया। युवराज सिंह क्रिकेट के किसी भी फॉर्मेट में यह उपलब्धि हासिल करने वाले दूसरे भारतीय बने।
बड़ौदा के स्पिनर तिलक राज का क्रिकेट करियर
रवि शास्त्री के हाथों एक ओवर में 6 छक्के खाने वाले बड़ौदा के गेंदबाज तिलक राज के करियर पर नजर डालें तो वे भारत के पूर्व घरेलू क्रिकेटर रहे हैं। तिलक राज मुख्य रूप से बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स स्पिन गेंदबाज थे, लेकिन अपने खेल जीवन में वे गेंदबाजी से ज्यादा अपनी बल्लेबाजी कौशल के लिए पहचाने जाते थे। उन्होंने अपना पूरा घरेलू क्रिकेट बड़ौदा की टीम की ओर से खेला, हालांकि उन्हें कभी भारतीय राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का अवसर नहीं मिल सका।
तिलक राज के घरेलू करियर के आंकड़ों को देखें तो उन्होंने अपने करियर में कुल 26 फर्स्ट क्लास मैच और 3 लिस्ट ए मैच खेले थे। फर्स्ट क्लास क्रिकेट की बात करें तो उन्होंने 26 मैचों में 936 रन बनाने के साथ-साथ कुल 5 विकेट हासिल किए थे। वहीं लिस्ट ए मैचों में उनके नाम 27 रन और 2 विकेट दर्ज हैं। भले ही उनका गेंदबाजी आंकड़ा बहुत बड़ा न रहा हो, लेकिन रवि शास्त्री के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के साथ उनका नाम हमेशा के लिए क्रिकेट इतिहास के पन्नों में जुड़ गया।
क्रिकेट में रिकॉर्ड्स और गेंदबाजों की वापसी की क्षमता
क्रिकेट के खेल में किसी एक ओवर की सभी छह गेंदों पर छक्के पड़ जाना किसी भी गेंदबाज की प्रतिभा या उसकी संपूर्ण काबिलियत का अंत नहीं माना जाता। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक खराब ओवर से न तो किसी गेंदबाज का करियर आंका जा सकता है और न ही केवल एक ओवर के आधार पर किसी बल्लेबाज की महानता का अंतिम फैसला होता है। वही गेंदबाज अगले मैचों में लगातार 3 गेंदों पर 3 विकेट लेकर हैट्रिक जैसी शानदार उपलब्धि भी हासिल कर सकता है।
इसके बावजूद क्रिकेट के सांख्यिकी इतिहास में रिकॉर्ड्स का अपना एक विशेष महत्व होता है। रवि शास्त्री का 1985 में बनाया गया यह रिकॉर्ड भारतीय क्रिकेट इतिहास का पहला ऐसा क्षण था, जिसने आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। युवराज सिंह ने बाद में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोहराकर इस उपलब्धि को वैश्विक पहचान दिलाई।



















