फारस की खाड़ी के रणनीतिक जलमार्ग पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'ट्रंप स्ट्रेट' नाम देने की वकालत कीमेटा ने कर्मचारियों के मूल्यांकन नियमों में किया बदलाव, नए स्वायत्त हैच AI टूल की टेस्टिंग शुरूयश की फिल्म 'टॉक्सिक' का 8वें दिन का कलेक्शन घटा, अब तक हुई 319.44 करोड़ रुपये की वर्ल्डवाइड कमाईसाथ रहने पर भी पार्टनर से दूरियां महसूस होती हैं? रिश्ते में प्यार और बातचीत का दौर दोबारा शुरू करने के लिए अपनाएं ये 5 असरदार उपायचीन की सर्विस PMI बढ़कर 51.4 पर पहुंची, जानिए AUD, गोल्ड और बिटकॉइन पर क्या पड़ा असरबिना गैस जलाए बनाएं जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के भोग के लिए स्वादिष्ट काजू-पिस्ता पेड़ाराजस्थान के थोर पातड़ी की अनोखी रेसिपी, कांटों वाले पौधे से तैयार होती है सेहतमंद और खट्टी-चटपटी सब्जीजन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल के लिए बनाएं स्वादिष्ट बेसन पाक, 15 मिनट की भुनाई से तैयार होगी शुद्ध मिठाईक्रिप्टो बाजार में हलचल: $86,000 पर बिक्री दबाव बढ़ा, $77,000 के स्तर पर बिटकॉइन का संघर्षभारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त होकर अभिनंदन वर्धमान ने शुरू की नई पारी, गोवा की क्षेत्रीय एयरलाइन फ्लाई91 में बनेंगे कमर्शियल पायलट
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघ के हमले से महिला सफाईकर्मी की मौत, पिंजरे का गेट खुलने पर उठे सुरक्षा सवालराजस्थान
3 सित॰ 2026, 7:21 am (22 मिनट पहले)· 2

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघ के हमले से महिला सफाईकर्मी की मौत, पिंजरे का गेट खुलने पर उठे सुरक्षा सवाल

जयपुर स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघ के हमले में महिला कर्मचारी सुगना देवी की जान चली गई। बाड़े का दरवाजा खुला रहने और सुरक्षा नियमों की अनदेखी को लेकर परिजनों ने हंगामा किया।

जयपुर के प्रसिद्ध आमेर किले के समीप स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहाँ बाघ के अचानक हमले में सफाईकर्मी सुगना देवी की मौके पर ही मौत हो गई। इस भयानक घटना के बाद पार्क परिसर में हड़कंप मच गया और वन्यजीव प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर संगीन सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के आक्रोशित परिजनों ने पार्क प्रशासन और केयरटेकर पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए शव लेने से साफ इनकार कर दिया है। पीड़ित परिवार के लोग पार्क के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए हैं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने पर्यटकों और कर्मचारियों की जानमाल की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता गहरी कर दी है।

बाघ के हमले का घटनाक्रम और जान बचाने की मशक्कत

हादसे के समय पार्क के बाड़े वाले हिस्से में कुल छह महिला सफाईकर्मी नियमित साफ-सफाई के काम में जुटी हुई थीं। प्रत्यक्षदर्शियों और वहां मौजूद सहकर्मियों के अनुसार, इसी दौरान वहां तैनात एक महिला गार्ड ने बाघ के पिंजरे का मुख्य गेट खोल दिया। जैसे ही दरवाजा खुला, बाघ अचानक बाहर निकल आया और सफाई में जुटी महिलाओं की तरफ झपटा। अवांछित स्थिति में बाघ को सामने देखकर वहां अफरा-तफरी मच गई और सभी कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

ये भी पढ़ें

हमले के दौरान खुद को बचाने के लिए सुगना देवी समेत पांच महिलाओं ने फौरन पास में स्थित एक पेड़ पर चढ़ने का प्रयास किया। चार महिलाएं तो किसी तरह पेड़ की ऊंची डालियों पर चढ़कर अपनी जान बचाने में कामयाब रहीं, लेकिन सुगना देवी बाघ के चंगुल में आ गईं। बाघ ने उन पर सीधा हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और उनकी जान चली गई। सहकर्मियों का कहना है कि यदि महिलाएं समय रहते पेड़ पर न चढ़तीं, तो यह हादसा और भी भीषण हो सकता था।

सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर उठे गंभीर सवाल

इस हादसे के बाद सबसे बुनियादी सवाल बाघ के पिंजरे के गेट को खोले जाने की प्रक्रिया पर उठ रहे हैं। नियम के मुताबिक जब भी बाड़े के भीतर या आसपास सफाईकर्मी काम कर रहे होते हैं, तब खूंखार वन्यजीवों को सुरक्षित रूप से बंद रखना अनिवार्य होता है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि कर्मचारियों की मौजूदगी के दौरान पिंजरे का गेट किस परिस्थिति में और किसके आदेश पर खोला गया। क्या गेट खोलने से पहले परिसर में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया था और सभी कर्मियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया था?

सुगना देवी के पति और बेटों का सीधा आरोप है कि यह महज एक इत्तेफाक या अनजाने में हुई चूक नहीं है, बल्कि पिंजरे का गेट जानबूझकर खोला गया था। परिजनों का कहना है कि सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने वाले अधिकारियों और लापरवाह केयरटेकर के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। जब तक दोषियों को चिन्हित कर सजा नहीं दी जाती, वे अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह हादसा पूरी तरह से मानवीय लापरवाही का नतीजा था या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी वजह थी।

राजस्थान में पहले भी हो चुके हैं बाघों के जानलेवा हमले

राजस्थान के विभिन्न संरक्षित वन क्षेत्रों और उनसे सटे रिहायशी इलाकों में बाघों के हमले की घटनाएं पहले भी कई बार सामने आ चुकी हैं। जून 2025 में सवाई माधोपुर स्थित प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व के ऐतिहासिक रणथंभौर किले के समीप वन रक्षक राधेश्याम माली पर एक बाघ ने हमला कर दिया था, जिसमें उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। इससे ठीक एक महीने पहले, मई 2025 में रणथंभौर के ज़ोन-3 में ड्यूटी पर तैनात रेंजर देवेंद्र चौधरी पर भी बाघ ने अचानक हमला किया था और इस हादसे में भी अधिकारी को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

इसी तरह अलवर-खैरथल तिजारा जिले के सरिस्का क्षेत्र में अगस्त 2024 के दौरान बाघ ST-2303 अपने निर्धारित रिजर्व क्षेत्र से बाहर निकल आया था। इसके बाद उसने हरियाणा और राजस्थान की सीमा से जुड़े कई गांवों में चहलकदमी करते हुए अनेक लोगों पर हमले किए थे, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था। इसके पूर्व जनवरी 2024 में भिवाड़ी के पास खेत में काम कर रहे एक बुजुर्ग किसान को बाघ ने लहूलुहान कर दिया था। वहीं नवंबर 2024 में रणथंभौर से सटे उलियाना गांव में बाघ के हमले से एक स्थानीय ग्रामीण की मौत हो गई थी। उस दौरान भड़के ग्रामीणों के उग्र विरोध और आपसी संघर्ष के बीच हमलावर बाघ की भी जान चली गई थी।

पर्यटकों की सुरक्षा और पार्क प्रबंधन की जवाबदेही

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में देश और दुनिया भर से हर साल लाखों पर्यटक वन्यजीवों को देखने के लिए पहुंचते हैं। यह स्थल आमेर किले के काफी करीब होने के कारण पर्यटन के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण स्थान पर यदि कर्मचारियों के काम करने के क्षेत्र में बाघ का गेट खुल जाता है, तो यह आम पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले हादसों के बाद भी यदि सुरक्षा व्यवस्था में ठोस बदलाव नहीं किए गए, तो यह बेहद गंभीर विषय है। क्या पूर्व में हुए बाघ हमलों के बाद चिड़ियाघर और पार्क प्रशासन ने अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की थी? क्या कर्मचारियों को आपात स्थिति से निपटने का उचित प्रशिक्षण दिया गया था? इन तमाम सवालों के पारदर्शी जवाब सामने आना बेहद जरूरी है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की टीमें मामले की निष्पक्ष जांच की बात कह रही हैं, ताकि सुगना देवी की मौत की सटीक वजहों का खुलासा किया जा सके।

सवाल-जवाब

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में क्या घटना हुई?
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघ के पिंजरे का गेट खुलने से बाघ ने हमला कर दिया, जिसमें महिला सफाईकर्मी सुगना देवी की मौत हो गई।
घटना के समय पिंजरे के पास कितने कर्मचारी मौजूद थे?
घटना के समय छह महिला सफाईकर्मी पार्क में सफाई के काम में जुटी हुई थीं।
अन्य महिला कर्मचारियों ने अपनी जान कैसे बचाई?
अन्य पांच महिला कर्मचारियों ने दौड़कर पास स्थित पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाई।
मृतका के परिवार वाले क्या मांग कर रहे हैं?
परिवार वाले पार्क प्रशासन और केयरटेकर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और विरोध स्वरूप पार्क के गेट पर धरने पर बैठे हैं।
क्या राजस्थान में पहले भी बाघों के हमले की घटनाएं हुई हैं?
हां, रणथंभौर और सरिस्का क्षेत्रों में जून 2025 में वन रक्षक राधेश्याम माली और मई 2025 में रेंजर देवेंद्र चौधरी समेत कई लोगों पर बाघों के जानलेवा हमले हो चुके हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·8 मिनट पहले

यह दर्दनाक घटना जयपुर के इस पार्क में वन्यजीव प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल की गंभीर चूक को उजागर करती है। कर्मचारियों के बाड़े में होने के बावजूद पिंजरे का गेट खुलना मानव भूल है या बड़ी प्रशासनिक लापरवाही, इसकी उच्चस्तरीय जाँच जरूरी है। पीड़ित परिवार का विरोध और न्याय की माँग तब तक जायज है जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती।

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 मिनट पहले

यह हादसा सिर्फ एक कर्मचारी की मौत नहीं, बल्कि वन्यजीव प्रबंधन के बुनियादी नियमों की धज्जियाँ उड़ने का गंभीर मामला है। खूंखार जानवरों वाले जोन में सफाई कार्य के दौरान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन न होना आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में केवल औपचारिकता निभाता है या उन जिम्मेदार अधिकारियों व गार्ड पर भारतीय न्याय संहिता के तहत गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज होता है, जिनकी वजह से एक बेकसूर महिला को जान गंवानी पड़ी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR