भारतीय क्रिकेट टीम ने श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में शानदार शुरुआत करते हुए पहले मुकाबले में 165 रनों की धमाकेदार जीत दर्ज की थी। इस जीत के साथ ही मेहमान टीम ने सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है। अब दोनों टीमों के बीच सीरीज का दूसरा और अंतिम टेस्ट मैच 23 अगस्त से कोलंबो के ऐतिहासिक एसएससी ग्राउंड पर खेला जाना है। इस अहम मुकाबले से पहले भारतीय टीम 21 अगस्त को कोलंबो पहुंची और मैदान पर जमकर अभ्यास सत्र में भाग लिया। हालांकि, पहले टेस्ट की प्लेइंग 11 में शामिल रहे बाएं हाथ के कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव के स्थान को लेकर खेल जगत में तरह-तरह के संशय व्यक्त किए जा रहे थे। इस स्थिति पर विराम लगाते हुए टीम इंडिया के स्पिन गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले ने मैच से दो दिन पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। साईराज बहुतुले ने साफ शब्दों में कहा कि टीम प्रबंधन को कुलदीप यादव की प्रतिभा पर पूरा भरोसा है और वह टीम की आगामी रणनीतियों का एक महत्वपूर्ण अंग बने हुए हैं।
गॉल टेस्ट की परिस्थितियां और पुरानी गेंद की चुनौती
प्रेस वार्ता के दौरान साईराज बहुतुले ने गॉल में खेले गए पहले टेस्ट मैच के दौरान कुलदीप यादव के प्रदर्शन का बचाव किया। उन्होंने बताया कि गॉल का मैदान और वहां की परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं, जिसकी वजह से कुलदीप को मैच के दौरान एक अलग रणनीतिक भूमिका निभानी पड़ी थी। गेंदबाजी कोच ने याद दिलाया कि कुलदीप हमेशा से ही भारतीय टीम के लिए एक प्रमाणित मैच विनर गेंदबाज रहे हैं और उनकी क्षमता पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। स्पिनरों को पुरानी और नरम गेंद से गेंदबाजी करने में आने वाली कठिनाइयों पर बात करते हुए बहुतुले ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू को उजागर किया।
उन्होंने समझाया कि जब मैच के दौरान गेंद पुरानी होकर नरम पड़ जाती है, तो मैदान पर मौजूद सभी स्पिन गेंदबाजों के लिए नियंत्रण बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हालांकि, उंगलियों से गेंद को टर्न कराने वाले फिंगर स्पिनरों यानी ऑफ स्पिनर या बाएं हाथ के आर्थोडॉक्स स्पिनरों के लिए ग्रिप बनाना फिर भी थोड़ा आसान होता है, क्योंकि वे अपनी उंगलियों की मदद से गेंद की दिशा तय करते हैं। इसके विपरीत, लेग स्पिनर या रिस्ट स्पिनर के लिए नरम गेंद से गेंदबाजी करना कहीं अधिक कठिन होता है। इसका मुख्य कारण यह है कि जैसे-जैसे गेंद पुरानी होती है, उसकी सीम दबकर नीचे चली जाती है। ऐसी स्थिति में कलाई के स्पिनर के लिए गेंद पर सही पकड़ बनाना, मनचाहा टर्न हासिल करना और पिच से उछाल प्राप्त करना काफी पेचीदा हो जाता है। गॉल में कुलदीप के स्पेल पर बात करते हुए साईराज बहुतुले ने स्पष्ट कहा, "एक मैच के प्रदर्शन से किसी गेंदबाज का आकलन नहीं किया जा सकता।"
मानव सुथार की प्रभावी गेंदबाजी और टीम में संतुलन
प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पिन कोच साईराज बहुतुले ने गॉल टेस्ट मैच में शानदार प्रदर्शन करने वाले युवा स्पिनर मानव सुथार की भी जमकर तारीफ की। मानव सुथार ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर पहले टेस्ट में कुल 10 विकेट झटके थे और टीम की जीत में मुख्य भूमिका निभाई थी। बहुतुले ने कहा कि मानव सुथार गेंद को बहुत अच्छी तरह टर्न कराते हैं और टीम के लिए एक बेहद भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरे हैं। उन्होंने सुथार के संयम की सराहना करते हुए कहा कि वह लगातार उसी सटीक लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करते हैं जिसकी रणनीति टीम प्रबंधन द्वारा तय की जाती है। यही वजह है कि उनकी गेंदबाजी में लगातार सुधार और परिपक्वता देखने को मिल रही है।
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से निर्णायक मुकाबला
कोलंबो में खेला जाने वाला यह दूसरा टेस्ट मैच भारतीय टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल की रेस में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिए भारत को यह मुकाबला जीतना या ड्रॉ कराना अनिवार्य है। ऐसे में टीम प्रबंधन मैदान की पिच और मौसम के मिजाज को देखते हुए ही अंतिम प्लेइंग 11 का चयन करेगा। साईराज बहुतुले के बयान से यह संकेत मिलता है कि कुलदीप यादव को टीम से बाहर करने की योजना नहीं है, बल्कि उन्हें परिस्थितियों के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ तरीके से इस्तेमाल करने पर ध्यान दिया जा रहा है।



















