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श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में बारिश के दौरान बोले रविंद्र जडेजा, निचले क्रम में बल्लेबाजी मिलने से गिरता था मनोबलक्रिकेट
16 अग॰ 2026, 3:17 pm (1 दिन पहले)· 2

श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में बारिश के दौरान बोले रविंद्र जडेजा, निचले क्रम में बल्लेबाजी मिलने से गिरता था मनोबल

गॉल में श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट के दूसरे दिन बारिश के दौरान रविंद्र जडेजा ने ब्रॉडकास्टर से बात करते हुए बताया कि शुरुआती करियर में निचले क्रम में बल्लेबाजी मिलने से उनका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ था।

श्रीलंका के खिलाफ गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच के दूसरे दिन जब बारिश की वजह से मुकाबले को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा, तब भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा ने अपने करियर से जुड़े एक बेहद भावुक और महत्वपूर्ण पहलू पर खुल कर चर्चा की। लाल गेंद क्रिकेट में बल्ले और गेंद दोनों से लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले जडेजा ने स्वीकार किया कि अपने करियर के शुरुआती वर्षों में उन्हें बल्लेबाजी के उतने अवसर नहीं मिले जितने के वे हकदार थे। ब्रॉडकास्टर के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह निचले बल्लेबाजी क्रम में भेजे जाने के कारण उनका आत्मविश्वास बार-बार टूटता था और वे अपनी ही स्थापित बल्लेबाजी प्रतिभा पर संदेह करने के लिए मजबूर हो जाते थे।

घरेलू क्रिकेट में बेहतरीन रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियां

रविंद्र जडेजा ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान कॉमेंटेटर संजय मांजरेकर से संवाद के दौरान अपने शुरुआती क्रिकेट सफर को याद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी करियर की शुरुआत की थी, तब वे नियमित रूप से नंबर 4 के महत्वपूर्ण स्थान पर बल्लेबाजी करते थे। रणजी ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित भारतीय घरेलू टूर्नामेंटों में उनका प्रदर्शन असाधारण रहा था, जहां उन्होंने 60 से अधिक की शानदार बल्लेबाजी औसत बनाए रखी थी। जडेजा का मानना था कि घरेलू स्तर पर तीन तिहरे शतक और लगातार 60 से ऊपर का औसत यह साबित करने के लिए पर्याप्त था कि उनमें एक विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में रन बनाने की पूरी क्षमता मौजूद है।

हालांकि, जब उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय टीम में कदम रखा, तो परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। अंतरराष्ट्रीय टीम के संतुलन और स्थापित मध्यक्रम के कारण उन्हें वह बल्लेबाजी स्थान नहीं मिल सका जिसके वे आदी थे। जडेजा ने दर्द बयां करते हुए कहा कि एक खिलाड़ी जब घरेलू स्तर पर लगातार ऊपरी क्रम में रन बनाकर आता है और अचानक उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत नीचे बल्लेबाजी के लिए भेजा जाता है, तो उसके लिए मानसिक तालमेल बिठाना काफी कठिन हो जाता है। यही वह दौर था जिसने उनके भीतर अपनी क्षमताओं को लेकर शंकाएं पैदा कीं।

निचले क्रम में बल्लेबाजी और गिरता हुआ मनोबल

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए रविंद्र जडेजा ने बताया कि भारतीय टीम में कई बार ऐसी स्थितियां आईं जब उन्हें नंबर 8 या नंबर 9 जैसी बहुत निचली पोजीशन पर बल्लेबाजी करने के लिए मैदान में उतारा गया। इतना ही नहीं, कई मुकाबलों में तो उन्हें मुख्य स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के बाद भी बल्लेबाजी क्रम में जगह दी गई। इतने निचले स्थान पर बल्लेबाजी करने से उनके मनोबल पर गहरा नकारात्मक असर पड़ता था।

जडेजा ने इस बात का विस्तार से जिक्र किया कि कैसे ड्रेसिंग रूम के माहौल का असर खिलाड़ी की मानसिकता पर पड़ता है। जब कोई खिलाड़ी पैड पहनकर अपनी बल्लेबाजी की बारी का इंतजार कर रहा होता है और उसी समय उसके बगल में बैठा कोई मुख्य तेज गेंदबाज अपनी गेंदबाजी की तैयारी में गेंद का चयन कर रहा होता है, तो यह दृश्य किसी भी बल्लेबाज का आत्मविश्वास गिराने के लिए काफी होता है। जडेजा के अनुसार, जब तेज गेंदबाज गेंद चुनने लगता था, तो स्पष्ट संदेश मिलता था कि टीम प्रबंधन बहुत जल्द विरोधी टीम को आउट करने या अपनी पारी घोषित कर गेंदबाजी की ओर देख रहा है, जिससे उन्हें लगता था कि उनसे रनों की कोई खास उम्मीद नहीं की जा रही है।

टीम के भरोसे की कमी का अहसास और मानसिक संघर्ष

ड्रेसिंग रूम की उस स्थिति को याद करते हुए रविंद्र जडेजा ने कहा कि पैड पहनकर बैठने के बावजूद जब साथी गेंदबाज यह सोचने लगता था कि अब गेंदबाजी आने वाली है, तो उनके मन में यह सवाल बार-बार कौंधता था कि क्या टीम को उनकी बल्लेबाजी पर जरा भी भरोसा नहीं है। इस तरह के अनुभव किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद हताशाजनक होते थे, क्योंकि एक तरफ वे घरेलू क्रिकेट के स्थापित आंकड़े लेकर आए थे, तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय टीम में उन्हें एक विशुद्ध निचले क्रम के पुछल्ले बल्लेबाज की तरह देखा जा रहा था।

गॉल टेस्ट के दौरान बारिश के इस ब्रेक में जडेजा का यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में केवल शारीरिक कौशल ही नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति और टीम प्रबंधन का भरोसा कितना मायने रखता है। लंबे समय तक नंबर 8 और नंबर 9 पर बल्लेबाजी करने के बावजूद जडेजा ने बाद के वर्षों में भारत के लिए कई यादगार पारियां खेलीं और टेस्ट क्रिकेट में खुद को एक मैच विजेता ऑलराउंडर के रूप में स्थापित किया। इसके बावजूद, अपने करियर के शुरुआती संघर्ष और बल्लेबाजी क्रम को लेकर छलका यह दर्द दिखाता है कि एक विश्व स्तरीय खिलाड़ी के लिए भी टीम में अपनी सही भूमिका और विश्वास पाना कितना चुनौतीपूर्ण सफर रहा है।

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सवाल-जवाब

गॉल टेस्ट के दौरान रविंद्र जडेजा ने अपनी बल्लेबाजी को लेकर क्या खुलासा किया?
रविंद्र जडेजा ने बताया कि भारतीय टीम के शुरुआती दिनों में निचले क्रम में बल्लेबाजी मिलने से उनका आत्मविश्वास प्रभावित होता था और वे अपनी क्षमता पर संदेह करने लगते थे।
घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट में रविंद्र जडेजा का बल्लेबाजी रिकॉर्ड कैसा रहा है?
रविंद्र जडेजा के अनुसार, रणजी ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी सहित पूरे प्रथम श्रेणी करियर में उनका बल्लेबाजी औसत 60 से अधिक रहा है, जहां वे नंबर 4 पर बल्लेबाजी करते थे।
भारतीय टीम में जडेजा को किस नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा जाता था?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें अक्सर 8वें या 9वें नंबर पर भेजा जाता था, और कई बार रविचंद्रन अश्विन से भी नीचे बल्लेबाजी के लिए उतारा जाता था।
ड्रेसिंग रूम के किस दृश्य से जडेजा का मनोबल गिरता था?
ड्रेसिंग रूम में पैड पहनकर बैठना और पास में तेज गेंदबाज को नई गेंद चुनते देखना उन्हें यह अहसास कराता था कि टीम को उनकी बल्लेबाजी पर पूरा भरोसा नहीं है और अब गेंदबाजी की बारी है।
गॉल टेस्ट में जडेजा ने यह बातचीत किस मौके पर की?
श्रीलंका के खिलाफ गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच के दूसरे दिन जब बारिश के कारण खेल रुका था, तब उन्होंने ब्रॉडकास्टर के साथ यह अनुभव साझा किया।
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