भारतीय प्रीमियर लीग की जबरदस्त कामयाबी के बाद देश के विभिन्न राज्यों में टी20 लीग आयोजित करने का चलन तेजी से बढ़ा है। इन क्षेत्रीय टूर्नामेंटों के जरिए स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला दिखाने का शानदार मंच मिलता है, लेकिन इसके साथ ही इन मुकाबलों में भ्रष्ट गतिविधियों और मैच फिक्सिंग के साये ने भी पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई यानी एसीयू पूरी तरह सतर्क हो गई है। बोर्ड की यह विशेष टीम अब कई राज्य स्तर की टी20 लीगों से जुड़ी टीमों के मालिकों, प्रबंधकों और खिलाड़ियों की हरकतों पर पैनी नजर रख रही है, जिन पर नियमों के खिलाफ जाकर संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त होने का शक जताया जा रहा है।
सभी मैचों पर पहली बार रखी जा रही है सीधी नजर
बीसीसीआई के एक अंदरूनी सूत्र के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, एंटी-करप्शन एंड सिक्योरिटी यूनिट ने यह पाया है कि सट्टेबाजी से जुड़े लोग और अन्य संदेहास्पद पात्र सीधे तौर पर खिलाड़ियों, फ्रेंचाइजी मालिकों और आयोजकों के संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं, जो खेल की पवित्रता और आचार संहिता का खुला उल्लंघन है। यह पहली बार देखा जा रहा है कि एसीएसयू की टीम देश भर की राज्य स्तर की सभी लीगों के प्रत्येक मुकाबले को अपनी निगरानी में ले रही है। गौर करने वाली बात है कि इससे पहले इस तरह की व्यापक सुरक्षा व्यवस्था केवल अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैचों, आईपीएल और अन्य प्रमुख बड़े मुकाबलों तक ही सीमित रखी जाती थी।
होटल के कमरों और बैठकों पर भी पहरा
केवल खेल के मैदान और स्टेडियम तक ही नहीं, बल्कि एसीएसयू के सतर्क अधिकारी खिलाड़ियों और टीम अधिकारियों के ठहरने वाले होटलों पर भी कड़ी नजर बनाए हुए हैं। इन जगहों पर खिलाड़ियों से मिलने आने वाले बाहरी लोगों की गतिविधियों की भी लगातार जांच की जा रही है। जानकारों के अनुसार, यह ताजा कार्रवाई तमिलनाडु प्रीमियर लीग यानी टीएनपीएल के पिछले सत्र के दौरान सामने आई कुछ संदिग्ध घटनाओं के बाद शुरू की गई है। भ्रष्टाचार से जुड़ी इन गतिविधियों को देखते हुए एजेंसी को यह अंदेशा है कि इस तरह की गड़बड़ियां केवल तमिलनाडु तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य राज्यों की लीगों में भी फैल सकती हैं।
राज्यों की तमाम लीगों में बढ़ाए गए सुरक्षा घेरे
उल्लेखनीय है कि आईपीएल और राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित घरेलू टी20 टूर्नामेंट सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के अलावा, मुख्य घरेलू सत्र की शुरुआत से पहले यानी जून से अगस्त के बीच कई राज्यों में अपनी खुद की टी20 लीग्स खेली जाती हैं। इनमें मुंबई, सौराष्ट्र, बंगाल, आंध्र, कर्नाटक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, असम और झारखंड जैसे प्रमुख राज्य शामिल हैं, जहां इस दौरान क्रिकेट का रोमांच चरम पर होता है और सट्टेबाजों की नजरें इन पर टिकी रहती हैं।
टीएनपीएल में खिलाड़ी का फोन हुआ जब्त
इस पूरे मामले की गंभीरता तब जगजाहिर हुई जब पिछले शुक्रवार को भ्रष्टाचार रोधी प्रोटोकॉल के नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर एक खिलाड़ी को चल रहे टीएनपीएल सत्र के शेष बचे मुकाबलों से बाहर कर दिया गया। यह खिलाड़ी तमिलनाडु की तरफ से घरेलू क्रिकेट में हिस्सा लेता है और उसने पिछले सीजन में ही रणजी ट्रॉफी में पदार्पण किया था। तलाशी के दौरान इस खिलाड़ी के पास से एक ऐसा मोबाइल फोन बरामद किया गया जिसकी जानकारी छुपा कर रखी गई थी। सामने आई जानकारियों के मुताबिक यह कोई इकलौती घटना नहीं है, क्योंकि एसीएसयू की टीम ने अलग-अलग क्षेत्रीय लीगों के प्रतिबंधित क्षेत्रों के भीतर मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए कम से कम आधे दर्जन खिलाड़ियों को धर दबोचा है।



















