श्रीलंका के आगामी क्रिकेट दौरे पर घरेलू स्पिन चुनौती से निपटने के लिए भारतीय टीम प्रबंधन ने अपनी तैयारियों को बेहद मजबूत कर दिया है। उप-कप्तान शुभमन गिल के विशेष सुझाव के बाद, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे दो युवा स्पिनरों, तनुष कोटियन और हर्ष दुबे को नेट गेंदबाज के रूप में टीम के साथ जोड़ने का फैसला किया है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को भी नेट बॉलर के रूप में चुना गया था। इस नए कदम का मुख्य उद्देश्य श्रीलंकाई स्पिनरों की विविधताओं और वहां की टर्निंग पिचों का मुकाबला करने के लिए भारतीय बल्लेबाजों को पर्याप्त अभ्यास प्रदान करना है।
टर्निंग पिचों के लिए रणनीति और शुभमन गिल का सुझाव
श्रीलंका की पिचों पर हमेशा से धीमी गति की गेंदों और जबरदस्त टर्न का बोलबाला रहा है। उपमहाद्वीप की इन परिस्थितियों में किसी भी मेहमान टीम के बल्लेबाजों के लिए आगे बढ़कर या बैक-फुट पर जाकर स्पिनरों का सामना करना एक बड़ी चुनौती साबित होता है। इस मुश्किल से उबरने के लिए टीम इंडिया ने अपनी नेट सेशन रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। उप-कप्तान और मुख्य बल्लेबाजों में शामिल शुभमन गिल ने प्रबंधन और चयनकर्ताओं को सलाह दी थी कि मैच की वास्तविक परिस्थितियों से निपटने के लिए टीम को नेट पर लगातार ऐसे गेंदबाजों का सामना करना चाहिए जो श्रीलंकाई आक्रमण से मेल खाते हों।
गिल की सोच यह थी कि श्रीलंका के मुख्य स्पिनरों जैसे प्रमोद जयसूर्या, दुनिथ वेलालागे और रंजित के गेंदबाजी एक्शन और विविधताओं का सामना यदि भारतीय बल्लेबाज नेट सत्र में पहले से कर लेंगे, तो मैदान पर फैसला लेना कहीं अधिक आसान हो जाएगा। इस दूरदर्शी योजना पर तुरंत अमल करते हुए चयनकर्ताओं ने तनुष कोटियन और हर्ष दुबे की किस्मत का दरवाजा खोल दिया।
तनुष कोटियन: मुंबई के हरफनमौला खिलाड़ी की चमक
तनुष कोटियन ने हाल के घरेलू सत्रों में मुंबई के लिए न केवल अपनी ऑफ-स्पिन गेंदबाजी से बल्कि अपनी दबाव में खेली गई उपयोगी पारियों से भी गहरा प्रभाव छोड़ा है। वे इससे पहले ऑस्ट्रेलिया का दौरा करने वाली टीम के साथ भी सफर कर चुके हैं, जिससे उनके पास अंतरराष्ट्रीय माहौल में रहने का अनुभव है। रणजी ट्रॉफी और अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने निचले क्रम में आकर मैच जिताऊ पारियां खेली हैं और जरूरत के समय अहम विकेट भी निकाले हैं।
श्रीलंका में ऑफ-स्पिनरों का प्रभाव हमेशा से निर्णायक रहता है। ऐसे में तनुष कोटियन का नेट पर गेंदबाजी करना भारतीय बल्लेबाजों को ऑफ-स्पिन के खिलाफ अपने फुटवर्क और शॉट चयन को सुधारने में बेहद मदद करेगा।
हर्ष दुबे: विदर्भ के बाएं हाथ के स्पिनर का कमाल
विदर्भ के युवा बाएं हाथ के स्पिनर हर्ष दुबे अपनी सटीक लाइन-लेंथ और गजब की विविधताओं के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन से बड़े-बड़े बल्लेबाजों को काफी परेशान किया है। श्रीलंकाई टीम में हमेशा से बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाजों का दबदबा देखने को मिलता है।
हर्ष दुबे की टीम के साथ मौजूदगी से भारतीय बल्लेबाजों को दुनिथ वेलालागे और प्रमोद जयसूर्या जैसे बाएं हाथ के श्रीलंकाई गेंदबाजों की कोण और टर्न से निपटने की तैयारी करने का शानदार अवसर मिलेगा। नेट पर दुबे की गेंदों का सामना करके बल्लेबाज मैच के दौरान अपनी रक्षात्मक तकनीक और आक्रामक शॉट्स के बीच सही संतुलन बना सकेंगे।
नेट बॉलर से मुख्य टीम तक का सफर और बड़ा मौका
भारतीय क्रिकेट में नेट गेंदबाज के रूप में टीम के साथ जाना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। तनुष कोटियन और हर्ष दुबे के लिए यह दौरा सिर्फ मुख्य टीम के बल्लेबाजों को गेंद कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ड्रेसिंग रूम का हिस्सा बनने, मुख्य कोच और वरिष्ठ खिलाड़ियों से मार्गदर्शन प्राप्त करने और अपने कौशल को निखारने का एक सुनहरा अवसर है।
अतीत में भी ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जहां नेट बॉलर्स ने अपनी लगन से मुख्य टीम का टिकट हासिल किया। टी. नटराजन और उमरान मलिक जैसे गेंदबाजों ने बतौर नेट बॉलर दौरे की शुरुआत की थी और फिर अपनी रफ्तार व सटीक गेंदबाजी के दम पर मुख्य भारतीय टीम में जगह बनाई थी। यह दौरा इन दोनों युवा स्पिनरों के करियर के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकता है और साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय टीम श्रीलंका में स्पिन के चक्रव्यूह को ध्वस्त करने के लिए पूरी तरह तैयार है।



















