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सूटकेस में भर गया था पानी, फिर भी गांगुली से नहीं टूटी सचिन की यारी, जानें कैंप वाला किस्साक्रिकेट
5 जुल॰ 2026, 9:43 am (24 दिन पहले)· 4

सूटकेस में भर गया था पानी, फिर भी गांगुली से नहीं टूटी सचिन की यारी, जानें कैंप वाला किस्सा

इंदौर के अंडर-15 कैंप में सचिन तेंदुलकर ने जतिन परांजपे और केदार गोडबोले के साथ मिलकर सौरव गांगुली के कमरे में पानी भरकर उनके सूटकेस तैरा दिए थे, यही शरारत आगे चलकर क्रिकेट की सबसे मशहूर दोस्तियों में से एक की नींव बनी.

जून की तपती दोपहरी में इंदौर के एक अंडर-15 क्रिकेट कैंप के कमरे में सौरव गांगुली गहरी नींद में सोए हुए थे, उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि बाहर उनके साथी कोई बड़ी शरारत करने की तैयारी में हैं. थोड़ी देर बाद जब उनकी आंख खुली तो कमरे में पानी भर चुका था और उनके सूटकेस उसी पानी में तैर रहे थे. यह शरारत किसी और ने नहीं बल्कि सचिन तेंदुलकर ने अपने साथियों जतिन परांजपे और केदार गोडबोले के साथ मिलकर की थी, और आज साढ़े तीन दशक बाद भी यह किस्सा उनकी दोस्ती की सबसे प्यारी यादों में शुमार है.

इंदौर के कैंप की वो शरारत भरी रात

सचिन तेंदुलकर, जतिन परांजपे और केदार गोडबोले ने योजना बनाकर सौरव गांगुली के कमरे के दरवाजे के नीचे से बाल्टी भर-भरकर पानी उड़ेलना शुरू किया. देखते ही देखते पूरा कमरा पानी से भर गया और सूटकेस पानी की सतह पर तैरने लगे. नींद से जागे सौरव को पहले समझ ही नहीं आया कि यह सपना है या हकीकत. जब उन्हें पता चला कि यह सचिन और उनके दोस्तों की करतूत है, तो गुस्सा होने की बजाय पूरा कमरा हंसी से गूंज उठा. यह वाकया महज एक बचकानी मस्ती भर नहीं था, बल्कि यही वह नींव थी जिस पर आगे चलकर भारतीय क्रिकेट के इतिहास को बदलने वाली एक दोस्ती खड़ी हुई.

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कानपुर में मुलाकात, इंदौर में गहरी हुई दोस्ती

सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली की दोस्ती को साढ़े तीन दशक से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन आज भी यह उतनी ही ताजा और गहरी है. इस लंबे सफर में सचिन ने सौरव को कई रूपों में देखा है, कभी घुंघराले बालों वाले शर्मीले किशोर के रूप में, कभी मैदान पर आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करने वाले महाराजा के रूप में, कभी भारतीय टीम के साहसी कप्तान के तौर पर, तो कभी बीसीसीआई के व्यस्त प्रशासक के रूप में. लेकिन सचिन के लिए इन तमाम पहचानों से ऊपर सौरव हमेशा एक सच्चे और बेहद करीबी दोस्त रहे हैं. इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहने के बरसों बाद भी जब यह दोनों दिग्गज मिलते हैं, तो उम्र और वक्त का हर फासला मिट जाता है और वे फिर से इंदौर के कैंप वाले उन्हीं शरारती लड़कों में बदल जाते हैं. दोनों की पहली मुलाकात कानपुर में हुए एक जूनियर टूर्नामेंट में हुई थी, लेकिन इंदौर में दिवंगत वासु परांजपे की देखरेख में लगे कैंप ने उन्हें एक-दूसरे को करीब से जानने-समझने का मौका दिया.

क्रीज पर उतरते ही कांप जाते थे गेंदबाज

यह दोस्ती मैदान के बाहर के हंसी-मजाक तक सीमित नहीं रही, बल्कि मैदान पर उतरकर इसने पूरी दुनिया के क्रिकेट में तहलका मचा दिया. जब सचिन और सौरव सलामी जोड़ीदार के रूप में क्रीज पर उतरते थे, तो विपक्षी गेंदबाजों के माथे पर पसीना आ जाता था. इस जोड़ी ने वनडे क्रिकेट में रिकॉर्ड 26 बार शतकीय साझेदारियां कीं, जिनमें से 21 बार उन्होंने पारी की शुरुआत करते हुए विरोधी टीमों के हौसले पस्त किए. सचिन तेंदुलकर ने एक बार बताया था कि जब दोनों मैदान पर होते थे, तो उनका सिर्फ एक ही मकसद होता था, भारत को जीत दिलाना. उस दौर में न तो आज जैसे मोबाइल फोन थे और न ही सोशल मीडिया, फिर भी 1991-92 के दौरों के बाद जब दोनों अलग-अलग रास्तों पर चले, तब भी उनके दिलों की दूरी कभी नहीं बढ़ी. आपसी समझ और गहरे तालमेल ने ही उनकी दोस्ती को हर इम्तिहान में पास कराया.

जब सचिन ने गांगुली में देखा एक कप्तान का चेहरा

भारतीय क्रिकेट में एक ऐसा भी मोड़ आया जब सचिन तेंदुलकर ने कप्तानी छोड़ने का मन बना लिया था. साल 1999 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर सचिन ने सौरव के भीतर छिपे एक लीडर को पहचान लिया था. सचिन ने खुद चयनकर्ताओं और बोर्ड के सामने सौरव गांगुली को टीम का उपकप्तान बनाने का ठोस सुझाव दिया था. सचिन को पूरा यकीन था कि सौरव में भारतीय क्रिकेट को एक नई दिशा देने का दमखम है. जब सौरव ने कमान संभाली, उस वक्त भारतीय क्रिकेट बदलाव के दौर से गुजर रहा था और मैच फिक्सिंग के काले साए से जूझ रहा था. इतने नाजुक दौर में टीम को ऐसे खिलाड़ियों की दरकार थी जो बेखौफ होकर खेल सकें. सौरव एक कमाल के कप्तान साबित हुए क्योंकि उन्हें बखूबी पता था कि टीम में संतुलन कैसे बिठाया जाता है. वह खिलाड़ियों को अपने हुनर का पूरा प्रदर्शन करने की आजादी देते थे, लेकिन साथ ही उन्हें उनकी जिम्मेदारियों का अहसास भी कराते रहते थे.

सहवाग से नेहरा तक, गांगुली ने खड़ी की नई फौज

सचिन के इस भरोसे को सौरव ने पूरी तरह सही साबित किया. गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम को वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, जहीर खान, हरभजन सिंह और आशीष नेहरा जैसे मैच जिताने वाले खिलाड़ी मिले. यह सभी युवा खिलाड़ी बेहद प्रतिभाशाली थे, लेकिन करियर के शुरुआती दौर में इन्हें जिस सहारे और भरोसे की जरूरत थी, वह सौरव गांगुली ने दिल खोलकर दिया. सौरव ने इन युवाओं को बिना किसी डर के खुलकर खेलने की आजादी दी, जिसके दम पर भारत ने विदेशी जमीन पर मैच जीतना शुरू किया. सौरव ने भारतीय टीम को एक आक्रामक और जुझारू दल में बदल दिया, जिसने लॉर्ड्स की बालकनी में टी-शर्ट लहराने की हिम्मत तक दिखाई.

आज भी उतनी ही मजबूत है दोनों की यारी

आज जब सौरव गांगुली अपनी जिंदगी के एक और पड़ाव पर हैं, सचिन तेंदुलकर पुरानी यादों में डूबकर गर्व से मुस्कुराते हैं. वे कहते हैं कि कप्तान बनने के बाद सौरव ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और उनकी उपलब्धियां आज पूरी दुनिया के सामने हैं. कानपुर के एक साधारण जूनियर टूर्नामेंट से शुरू हुआ यह सफर, इंदौर के कैंप में सूटकेस भिगोने वाली उस शरारत से गुजरता हुआ, आज क्रिकेट के सबसे यादगार पन्नों में दर्ज हो चुका है. यह कहानी सिर्फ रनों और शतकों की नहीं, बल्कि दो दोस्तों के अटूट भरोसे, कप्तानी के दौर में एक-दूसरे के प्रति सम्मान और भारतीय क्रिकेट को शिखर तक पहुंचाने वाले उस जज्बे की है, जो आज की युवा पीढ़ी के लिए एक बेमिसाल मिसाल बन चुकी है.

सवाल-जवाब

कहां हुई थी सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली की पहली मुलाकात?
दोनों की पहली मुलाकात कानपुर में हुए एक जूनियर टूर्नामेंट में हुई थी.
सूटकेस वाली शरारत किसने और कहां की थी?
सचिन तेंदुलकर ने जतिन परांजपे और केदार गोडबोले के साथ मिलकर इंदौर के अंडर-15 कैंप में सौरव गांगुली के कमरे में यह शरारत की थी.
सचिन-सौरव की जोड़ी ने वनडे क्रिकेट में कितनी बार शतकीय साझेदारी की?
इस जोड़ी ने रिकॉर्ड 26 बार शतकीय साझेदारियां कीं, जिनमें से 21 बार उन्होंने पारी की शुरुआत करते हुए ऐसा किया.
सौरव गांगुली को उपकप्तान बनाने का सुझाव किसने दिया था?
सचिन तेंदुलकर ने खुद 1999 के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद चयनकर्ताओं और बोर्ड के सामने यह सुझाव दिया था.
गांगुली की कप्तानी में कौन-कौन से खिलाड़ी उभर कर सामने आए?
वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, जहीर खान, हरभजन सिंह और आशीष नेहरा जैसे मैच जिताने वाले खिलाड़ी गांगुली की कप्तानी में निखरे.
गांगुली ने कमान संभाली, उस वक्त भारतीय क्रिकेट किस दौर से गुजर रहा था?
गांगुली ने ऐसे नाजुक दौर में कमान संभाली जब भारतीय क्रिकेट मैच फिक्सिंग के काले साए से जूझ रहा था.
इंदौर वाला कैंप किसकी देखरेख में लगा था?
यह कैंप दिवंगत वासु परांजपे की देखरेख में आयोजित हुआ था.
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