स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में 29 जुलाई 1990 को जन्मीं एलिसाबेट अवरामिदू ग्रानलुंड को आज दुनिया एली अवराम के रूप में पहचानती है। शुरुआती दिनों से ही उनका झुकाव अभिनय, गायन और नृत्य की ओर रहा। काफी छोटी आयु में ही वह भारत और यहां के सिनेमा के प्रति आकर्षित होने लगी थीं। स्टॉकहोम के माहौल में पली-बढ़ी होने के बावजूद उन्होंने भारतीय कला और संस्कृति को अपने जीवन में एक खास स्थान दिया।
'देवदास' फिल्म बनी जीवन का सबसे बड़ा मोड़
उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 14 वर्ष की आयु में उन्होंने निर्देशक संजय लीला भंसाली की चर्चित रचना 'देवदास' देखी। लगभग चार घंटे के समय वाली इस फिल्म का उनके मस्तिष्क पर इतना तीव्र प्रभाव पड़ा कि वह शुरू से अंत तक पर्दे से दृष्टि नहीं हटा पाईं। इसके अलौकिक सेटों, सुंदर भारतीय पोशाकों, धुनों और मुख्य पात्रों के अभिनय ने उनके दिल में हिंदी सिनेमा के लिए अटूट प्रेम जगाया। उस समय उन्हें हिंदी बोलना नहीं आता था, फिर भी उन्होंने उसी क्षण निर्णय ले लिया था कि भविष्य में वह भारतीय फिल्मों का हिस्सा बनेंगी।
स्वीडन में शुरुआती तैयारी और अभिनय की शुरुआत
अपने इस लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने किशोरावस्था से ही तैयारियां शुरू कर दीं। 17 वर्ष की होने पर वह स्टॉकहोम में संचालित 'परदेसी डांस ग्रुप' नाम के नृत्य दल में शामिल हुईं और भारतीय गानों पर डांस करने लगीं। इसके साथ ही उन्होंने स्वीडन के कुछ स्थानीय अभिनय प्रोजेक्ट्स में भी काम किया। वर्ष 2008 के दौरान आई स्वीडिश फिल्म 'फॉर्बिडन फ्रूट' में भी उनकी भूमिका देखने को मिली, जिससे उनके अभिनय कौशल को निखरने का अवसर मिला।
2012 में मुंबई आगमन और संघर्ष का दौर
अपने करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से साल 2012 में अपने सपनों को साकार करने के इरादे से वह टूरिस्ट वीजा लेकर मुंबई पहुंचीं। उनका ध्येय केवल पर्यटन नहीं था, बल्कि भारतीय फिल्म जगत में अपनी एक विशिष्ट छाप छोड़ना था। अनजान देश, अनजान भाषा और जबरदस्त प्रतिस्पर्धा के वातावरण में उन्होंने हिंदी सीखने पर ध्यान दिया, नृत्य की विधिवत शिक्षा ली और निरंतर ऑडिशन की प्रक्रिया से गुजरीं।
'मिकी वायरस' और 'बिग बॉस 7' से मिली राष्ट्रीय पहचान
वर्ष 2013 में प्रदर्शित हुई फिल्म 'मिकी वायरस' से उन्हें पहला मुख्य अवसर मिला, जहां वह मनीष पॉल के संग नजर आईं। हालांकि यह फिल्म उन्हें वो मुकाम नहीं दे सकी जिसकी उन्हें आकांक्षा थी, मगर इसी वर्ष 'बिग बॉस 7' में उनकी भागीदारी ने उनकी किस्मत के द्वार खोल दिए। इस रियलिटी शो में उनकी मासूमियत और खास व्यक्तित्व ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और वह रातोंरात देश भर में चर्चित चेहरा बन गईं।
फिल्मों की श्रृंखला और बॉलीवुड में मुकाम
इसके पश्चात उन्होंने 'किस किसको प्यार करूं', 'नाम शबाना', 'पोस्टर बॉयज', 'बाजार', 'मलंग', 'कोई जाने ना', 'गुडबाय' तथा 'गणपत' जैसी कई फिल्मों में अभिनय का प्रदर्शन किया। आमिर खान के साथ फिल्माया गया उनका विशेष गीत 'हर फन मौला' भी सुर्खियों में रहा। वर्तमान में एली अवराम को ऐसे विदेशी कलाकारों में गिना जाता है जिन्होंने अपने समर्पण से बॉलीवुड में मुकाम हासिल किया।



















