टेस्ट क्रिकेट में मैच के आखिरी दिन चौथी पारी के दौरान बल्लेबाजी करना किसी भी टीम के लिए परीक्षा से कम नहीं होता। पांचवें दिन बिखरती हुई दरारें, असमान उछाल और खतरनाक तरीके से टर्न लेती गेंदे बल्लेबाजों का कड़ा इम्तिहान लेती हैं। अक्सर विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए मजबूत से मजबूत बल्लेबाजी क्रम ताश के पत्तों की तरह बिखर जाते हैं। हालांकि, क्रिकेट के लंबे इतिहास में कुछ ऐसी असाधारण पारियां भी खेली गई हैं, जहां बल्लेबाजों ने न केवल नामुमकिन से दिखने वाले लक्ष्यों का निडर होकर मुकाबला किया, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के पन्नों पर अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया।
डरबन का 'टाइमलेस टेस्ट' और इंग्लैंड का अटूट कीर्तिमान
विश्व क्रिकेट के इतिहास में चौथी पारी में सर्वाधिक रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड इंग्लैंड के नाम दर्ज है। यह कारनामा वर्ष 1939 में डरबन के मैदान पर दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के बीच खेले गए उस ऐतिहासिक मुकाबले में हुआ था, जिसे 'टाइमलेस टेस्ट' यानी बिना किसी समय सीमा का मुकाबला कहा गया था। इस मैच में मेजबान दक्षिण अफ्रीका ने इंग्लैंड को जीत के लिए 696 रनों का विशालकाय लक्ष्य दिया था। इतने बड़े पहाड़ जैसे लक्ष्य के सामने इंग्लैंड की टीम ने हार मानने के बजाय अद्भुत धैर्य का परिचय दिया।
इंग्लैंड की टीम ने 218.2 ओवरों तक बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट के नुकसान पर 654 रन ठोक दिए। उस दौर में एक ओवर में आठ गेंदे फेंकी जाती थीं। इंग्लैंड का रन रेट यद्यपि 2.24 का रहा, लेकिन उनका जज्बा तारीफ़ के काबिल था। यह ऐतिहासिक मुकाबला अंततः बिना किसी नतीजे के ड्रॉ पर समाप्त हुआ, क्योंकि इंग्लैंड के खिलाड़ियों को अपने वतन वापस लौटने के लिए पानी का जहाज पकड़ना था। यदि जहाज छूटने की मजबूरी न होती, तो शायद यह स्कोर और भी अधिक विशाल हो सकता था। आज 87 साल बीत जाने के बाद भी यह रिकॉर्ड कोई तोड़ नहीं सका है।
वेस्टइंडीज का जुझारूपन: क्राइस्टचर्च में क्रैम्पटन पार्क की लड़ाई
चौथी पारी में पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा करने की सूची में वेस्टइंडीज की टीम का नाम भी प्रमुखता से शामिल है। क्राइस्टचर्च के मैदान पर न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए एक मुकाबले में कैरेबियाई टीम के सामने 531 रनों का विशाल लक्ष्य रखा गया था। पांचवीं पारी की बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने सूझबूझ और आक्रामक रवैये का बेहतरीन संतुलन पेश किया।
वेस्टइंडीज ने पूरे 163.3 ओवरों तक बल्लेबाजी करते हुए 2.79 की रन गति से 6 विकेट पर 457 रन बनाए। कैरेबियाई बल्लेबाजों के इस साहसिक खेल की बदौलत टीम निश्चित हार को टालने में सफल रही और मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ। यह पारी जुझारू क्रिकेट के बेहतरीन उदाहरणों में गिनी जाती है।
नाथन एस्टल का दोहरा शतक और न्यूजीलैंड का साहसिक प्रयास
क्राइस्टचर्च के ही मैदान पर वर्ष 2002 में न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच एक और अविश्वसनीय मुकाबला देखने को मिला था। इस मैच में इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड के सामने जीत दर्ज करने के लिए 550 रनों का कठिन लक्ष्य रखा था। ज्यादातर टीमें इतने बड़े लक्ष्य के सामने केवल मैच बचाने का प्रयास करती हैं, लेकिन न्यूजीलैंड ने आक्रामक रुख अपनाने का फैसला किया।
न्यूजीलैंड के धाकड़ बल्लेबाज नाथन एस्टल ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए ऐतिहासिक दोहरा शतक जमाया। कीवी टीम ने 4.82 के अभूतपूर्व रन रेट से रन बनाते हुए 93.3 ओवरों में 451 रन बनाए। हालांकि पूरी टीम 451 रनों पर ऑलआउट हो गई और न्यूजीलैंड यह मुकाबला हार गया, लेकिन चौथी पारी में बिना ड्रॉ की परवाह किए इतने आक्रामक अंदाज में 451 रन बनाना टेस्ट इतिहास के सबसे साहसिक प्रयासों में गिना जाता है।
वांडरर्स पर दक्षिण अफ्रीका का भारत के खिलाफ थ्रिलर ड्रा
वर्ष 2013 में जोहान्सबर्ग के वांडरर्स मैदान पर दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच खेला गया मुकाबला भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को चौथी पारी में जीत के लिए 458 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य दिया था। वांडरर्स की तेज और उछालभरी पिच पर इस लक्ष्य को हासिल करना बेहद कठिन माना जा रहा था।
दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण का डटकर मुकाबला किया और 136 ओवरों में 3.30 की रन गति से 7 विकेट खोकर 450 रन बना लिए। मैच के आखिरी लम्हों में दोनों ही टीमों के पास जीत दर्ज करने का मौका था, लेकिन अंततः यह मैच टेस्ट क्रिकेट के सबसे रोमांचक ड्रॉ मुकाबलों में से एक बनकर समाप्त हुआ।
गाबा में असद शफीक की शतकीय पारी और पाकिस्तान का संघर्ष
वर्ष 2016 में ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच गुलाबी गेंद से डे-नाइट टेस्ट मैच खेला गया था। ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान के सामने 490 रनों का विशाल लक्ष्य रखा। गाबा में रोशनी के नीचे चौथी पारी में इतने बड़े लक्ष्य का सामना करना नामुमकिन जैसा लग रहा था।
लेकिन असद शफीक के शानदार शतक और निचले क्रम के बल्लेबाजों के बेहतरीन योगदान की मदद से पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को कड़ी टक्कर दी। पाकिस्तान की टीम ने 145 ओवरों तक संघर्ष किया और 3.10 के रन रेट से 450 रन बनाए। हालांकि पाकिस्तान की पूरी टीम ऑलआउट हो गई और वे लक्ष्य से महज 39 रन पीछे रह गए, लेकिन उनकी यह जुझारू पारी आज भी यादगार मानी जाती है।



















