अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मैदान पर अपनी पैनी समझ के लिए पहचाने जाने वाले रविचंद्रन अश्विन ने भारतीय टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के खेलने के तरीके पर सवाल खड़े किए हैं। हाल ही में समाप्त हुई श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में पंत के प्रदर्शन और विशेष तौर पर उनके गलत शॉट चयन को लेकर अश्विन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय टीम प्रबंधन ने इस दो मैचों की श्रृंखला में विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी पूरी तरह पंत को सौंपी थी। इस दौरान उन्होंने कुल 168 रन बनाए जिसमें दो अर्धशतकीय पारियां भी शामिल थीं, लेकिन इसके बावजूद उनकी बल्लेबाजी का तरीका चर्चा का विषय बन गया है।
अश्विन ने अपनी बात को विस्तार से रखते हुए अपने डिजिटल मंच पर इस बात पर निराशा जताई कि ऋषभ पंत से जैसी उम्मीदें थीं, वे अभी पूरी नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने तुलना करते हुए सोनल दिनुशा का जिक्र किया जिनका स्ट्राइक रेट भी बेहतरीन था, लेकिन दोनों के बीच मुख्य अंतर इरादे और फैसलों का था। पंत का बल्लेबाजी अंदाज अत्यधिक जोखिम भरा होता है। जब खेल पूरी तरह नियंत्रण में हो, तब केवल यह कह देना कि खिलाड़ी का स्वभाव ही ऐसा है, कोई ठोस तर्क नहीं माना जा सकता। असली मुद्दा यह है कि ठीक उसी समय टीम की क्या मांग थी।
मैच की परिस्थिति को न भांप पाने की समस्या पर बात करते हुए खेल समीक्षकों और जानकारों का मानना है कि केवल आक्रामक रुख को हर गलती का ढाल नहीं बनाया जा सकता। टेस्ट फॉर्मेट में यह बेहद जरूरी है कि खिलाड़ी अपनी स्वाभाविक शैली के साथ-साथ मैदान के हालात और स्कोरबोर्ड की स्थिति को भी समझे। जब मुकाबला किसी बेहद नाजुक मोड़ पर हो, तब गैर-जरूरी बड़े शॉट खेलना टीम पर भारी पड़ सकता है।
अश्विन ने अतीत की कुछ यादगार पारियों का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि सिडनी और ब्रिस्बेन जैसे ऐतिहासिक मैदानों पर मिली सफलता में वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर जैसे अन्य खिलाड़ियों का भी अहम योगदान था। किसी भी टेस्ट मैच को जीतने के लिए पूरी एकादश के योगदान की जरूरत होती है, जबकि हार के लिए केवल एक खराब फैसला ही काफी होता है।
वीरेंद्र सहवाग और एडम गिलक्रिस्ट जैसे दिग्गजों के साथ पंत की तुलना किए जाने के दावों को भी अश्विन ने सिरे से खारिज किया। उन पूर्व खिलाड़ियों ने भी अपने समय में अत्यंत आक्रामक रुख अपनाया था, लेकिन सवाल यह है कि मैच फंसा होने के बावजूद लगातार जोखिम क्यों लिया जाए। उन्होंने साफ किया कि उनका विरोध आक्रामकता से नहीं बल्कि कठिन परिस्थितियों में लिए जाने वाले गलत निर्णयों से है।
इस बात पर भी आपत्ति जताई गई कि केवल ‘एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाला खिलाड़ी’ कहकर किसी एक नाम के साथ विशेष बर्ताव किया जाए। यदि किसी युवा को उसकी प्रतिभा के आधार पर लगातार मौके और समर्थन दिए जाते हैं, तो ऐसा ही नजरिया यशस्वी जायसवाल जैसे अन्य प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के साथ भी अपनाया जाना चाहिए। किसी एक को ही असाधारण मानकर बाकी टीम की अनदेखी करना सही नहीं है।
पंत को लेकर यह भी स्पष्ट किया गया कि अब वह कोई शुरुआती दौर के खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि पचास से अधिक टेस्ट मैच खेल चुके हैं। इस अनुभव के स्तर पर पहुँचने के बाद उनसे पूरी जिम्मेदारी और परिपक्वता के साथ मैदान पर उतरने की उम्मीद की जाती है, न कि बचकानी गलतियों की।



















