श्रीलंका के महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने अपने लंबे और शानदार करियर के दौरान टेस्ट क्रिकेट में ऐसे कई मील के पत्थर स्थापित किए, जिन्हें आज तक कोई दूसरा गेंदबाज पार नहीं कर सका है। उन्होंने साल 1992 से 2010 के बीच कुल 133 टेस्ट मुकाबले खेले और अपनी फिरकी के दम पर 800 विकेट अपने नाम किए। यह इस फॉर्मेट में किसी भी गेंदबाज द्वारा लिए गए सबसे ज्यादा विकेटों का विश्व रिकॉर्ड है। इस दौरान उन्होंने पारी में 5 विकेट लेने का कारनामा 67 बार किया, जबकि पूरे मैच में यानी दोनों पारियों को मिलाकर 10 या उससे ज्यादा विकेट झटकने का करिश्मा 22 बार अंजाम दिया। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वह मैच की पहली पारी हो या दूसरी पारी, दोनों में लगातार विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखते थे और विकेट निकालते रहते थे। दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में दूसरे पायदान पर मौजूद गेंदबाज भी उनसे कोसों दूर है।
शेन वॉर्न और अन्य दिग्गजों का प्रदर्शन
इस प्रतिष्ठित सूची में ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज लेग स्पिनर शेन वॉर्न दूसरे स्थान पर काबिज हैं। शेन वॉर्न ने अपने करियर में 145 टेस्ट मैच खेले और 708 विकेट चटकाए। उन्होंने अपने टेस्ट सफर में 37 बार पारी में पांच विकेट लिए और 10 मुकाबलों में एक मैच में 10 विकेट लेने का गौरव हासिल किया। हालांकि, वह मुथैया मुरलीधरन के 22 बार के विशाल रिकॉर्ड से काफी पीछे छूट जाते हैं। इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि मुथैया मुरलीधरन का यह महारिकॉर्ड फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित है और निकट भविष्य में इसके टूटने की संभावना न के बराबर है।
न्यूजीलैंड और श्रीलंका के अन्य धुरंधर
इस एलीट लिस्ट में न्यूजीलैंड के महान तेज गेंदबाज सर रिचर्ड हैडली का नाम भी शामिल है। उन्होंने अपने करियर में सिर्फ 86 टेस्ट मैच खेले और 9 बार एक मैच में 10 विकेट लेने में सफलता प्राप्त की। उनके नाम कुल 431 टेस्ट विकेट दर्ज हैं। इसके अलावा, मुथैया मुरलीधरन के देशवासी और दिग्गज स्पिनर रंगना हेराथ ने भी 93 टेस्ट मैचों में मैदान पर उतरते हुए 9 बार एक मैच में 10 विकेट हासिल किए। रंगना हेराथ ने अपने करियर का अंत कुल 433 विकेटों के साथ किया। मुथैया मुरलीधरन के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद रंगना हेराथ ने श्रीलंका के स्पिन गेंदबाजी आक्रमण की कमान को बेहद शानदार तरीके से संभाला और अपनी टीम को कई मुकाबले जिताए।
भारतीय गेंदबाजों का शानदार योगदान
भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट इतिहास में रविचंद्रन अश्विन और अनिल कुंबले संयुक्त रूप से ऐसे गेंदबाज हैं जिन्होंने सबसे ज्यादा 8-8 बार एक टेस्ट मैच में 10 विकेट लेने का कारनामा किया है। रविचंद्रन अश्विन ने 106 टेस्ट मैच खेलते हुए 537 विकेट झटके हैं। उन्होंने अपने करियर में 37 बार पांच विकेट और 8 बार एक मैच में 10 विकेट अपने नाम किए। उन्होंने अपनी घरेलू पिचों के साथ-साथ विदेशों में आयोजित दौरों पर भी कई बार टीम इंडिया को अपनी शानदार गेंदबाजी के दम पर ऐतिहासिक मैच जिताए हैं।
अनिल कुंबले का ऐतिहासिक और यादगार स्पेल
भारत के पूर्व दिग्गज स्पिनर अनिल कुंबले ने 132 टेस्ट मैचों में भाग लेते हुए कुल 619 विकेट अपनी झोली में डाले। उनके नाम भी भारत की तरफ से 8 बार एक मैच में 10 विकेट लेने का रिकॉर्ड दर्ज है। अनिल कुंबले का सबसे अविस्मरणीय प्रदर्शन साल 1999 में दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच में आया था, जब उन्होंने पारी के सभी 10 विकेट (10/74) अकेले अपने नाम कर लिए थे। विश्व क्रिकेट के इतिहास में ऐसा जादुई कारनामा करने वाले वह दुनिया के केवल तीसरे गेंदबाज बने थे, जबकि टेस्ट क्रिकेट की एक पारी में सभी 10 विकेट हासिल करने वाले वह दुनिया के दूसरे गेंदबाज थे। इन दोनों भारतीय दिग्गजों ने देश को कई यादगार टेस्ट मुकाबले जिताए और लंबे समय तक भारतीय स्पिन गेंदबाजी की रीढ़ बनकर खड़े रहे। जहाँ रविचंद्रन अश्विन ने अपनी बेहतरीन विविधताओं और कूटनीतिक रणनीतियों से बल्लेबाजों को उलझाया, वहीं अनिल कुंबले ने अपनी गति, अतिरिक्त उछाल और सटीक लाइन-लेंथ के बूते विरोधी टीमों की बल्लेबाजी को नेस्तनाबूद कर दिया।



















