अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में लगातार बढ़ रहे फ्रेंचाइजी टूर्नामेंट्स के कारण खेल का पारंपरिक ढांचा बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ा है। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग का मानना है कि दुनिया भर में टी20 प्रतियोगिताओं के तेज विस्तार की वजह से वनडे प्रारूप एक गंभीर संकट की ओर बढ़ रहा है। व्यस्त होते शेड्यूल में 50 ओवर का यह प्रारूप अपनी पुरानी चमक और जगह खोता जा रहा है। पोंटिंग ने आशंका जताई है कि आने वाले सालों में जैसे-जैसे नई टी20 लीग सामने आएंगी, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वनडे मैचों की संख्या काफी घट जाएगी। हालांकि, उनका यह भी मानना है कि टेस्ट क्रिकेट को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मुख्य देश इस पारंपरिक प्रारूप को बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
फ्रैंचाइजी क्रिकेट का बढ़ता दायरा और वनडे की चुनौती
विश्व क्रिकेट में टी20 लीग का प्रभाव हर गुजरते महीने के साथ बढ़ता जा रहा है। विश्व चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स में ऑस्ट्रेलिया चैंपियंस फ्रेंचाइजी के सह मालिक रिकी पोंटिंग ने कहा कि जैसे-जैसे समय बीतेगा और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में नए टी20 टूर्नामेंट शुरू होंगे, 50 ओवर का क्रिकेट खेलने की गुंजाइश अपने आप कम होती जाएगी। पोंटिंग के अनुसार यह बदलाव अब अपरिहार्य हो चुका है। खिलाड़ियों और क्रिकेट बोर्ड्स दोनों के लिए फ्रेंचाइजी प्रतियोगिताओं का वित्तीय आकर्षण इतना अधिक है कि अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में इनके लिए विशेष विंडो बनाना मजबूरी बन गया है। इस वजह से द्विपक्षीय सीरीज के लिए दिन कम पड़ रहे हैं और इसका सीधा नुकसान 50 ओवर के मैच को उठाना पड़ रहा है।
'बिग फोर' के दम पर सुरक्षित रहेगा टेस्ट प्रारूप
अपने करियर में 13,704 वनडे रन बनाने वाले रिकी पोंटिंग खुद इस प्रारूप के बड़े प्रशंसकों में से एक रहे हैं। उनका कहना है कि खेल के व्यस्त शेड्यूल के बीच किसी न किसी प्रारूप को तो अपनी जगह छोड़नी ही पड़ेगी। पोंटिंग ने स्पष्ट किया कि जब तक भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे चार बड़े देश टेस्ट क्रिकेट में निवेश जारी रखेंगे और इसे मजबूत बनाने की इच्छा रखेंगे, तब तक टेस्ट प्रारूप को कोई खतरा नहीं होगा। लेकिन टेस्ट को सुरक्षित रखने की इस कवायद में 50 ओवर के क्रिकेट की बलि चढ़ना तय माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय दौरों पर वनडे मैचों की संख्या सीमित होकर केवल तीन या दो मैचों तक रह सकती है या फिर यह प्रारूप केवल विश्व कप जैसे बड़े आईसीसी आयोजनों तक सीमित हो सकता है।
फुटबॉल तर्ज पर क्लब मॉडल की ओर बढ़ता खेल
खिलाड़ियों पर बढ़ते कार्यभार और लगातार होते मैचों के सवाल पर पोंटिंग ने माना कि कैलेंडर में फ्रेंचाइजी टूर्नामेंट्स के लिए जगह बनाना समय की मांग बन चुका है। इसी विषय पर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर का मानना है कि भविष्य में क्रिकेट का पूरा ढांचा यूरोपीय क्लब फुटबॉल के मॉडल जैसा हो सकता है। क्लब फुटबॉल की तरह खिलाड़ी साल के ज्यादातर हिस्से में निजी क्लबों और फ्रेंचाइजी टीमों के लिए खेलेंगे, जबकि अंतरराष्ट्रीय मैच कुछ खास विंडो में ही आयोजित किए जाएंगे। हालांकि वार्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने के रास्ते में अभी कई प्रशासनिक और संविदात्मक बाधाएं मौजूद हैं।



















