चेन्नई में खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में ईशान किशन ने शानदार बल्लेबाजी का मुजायरा पेश किया है। उन्होंने साउथ जोन के गेंदबाजों के खिलाफ खेलते हुए दो सौ सत्तर रनों की मैराथन पारी खेली और ईस्ट जोन को बेहद मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है। इस धमाकेदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने अपने करियर के मुश्किल दौर और मानसिक बदलाव को लेकर खुलकर बात की है। उनका कहना है कि करियर के कठिन समय ने उन्हें यह सिखाया है कि मैदान पर बेवजह की उम्मीदें रखने और ज्यादा सोचने से बचना चाहिए। अब उनका एकमात्र उद्देश्य टीम के लिए रन बनाना और मैच जिताना रह गया है।
मानसिक स्थिति में आए बदलाव पर क्या बोले ईशान किशन
अपनी इस विशाल पारी को अपने स्वभाव में आए सकारात्मक बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण बताते हुए ईशान किशन ने दिन का खेल समाप्त होने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने अपने व्यवहार में बदलाव लाने के लिए कोई कृत्रिम प्रयास नहीं किया है, बल्कि यह परिवर्तन समय के साथ खुद ब खुद आया है। जब उन्हें भारतीय टीम से बाहर होना पड़ा, तब उन्हें यह गहराई से समझ आया कि एक खिलाड़ी के रूप में उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी सिर्फ रन बनाना है। यही वह एकमात्र जरिया है जो किसी भी खिलाड़ी के करियर को स्थिरता और दिशा दे सकता है।
बेवजह के दबाव से बचने की जरूरत
ईशान किशन ने इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी अन्य बात पर अनावश्यक विचार करना खिलाड़ी की मानसिक स्थिति को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है और उस पर बेमतलब का मानसिक दबाव पैदा करता है। उन्हें यह अहसास हो चुका है कि इन बाहरी और अतिरिक्त विचारों के लिए खेल में कोई जगह नहीं है। खिलाड़ी का मुख्य दायित्व मैदान पर उतरकर अपने खेल का प्रदर्शन करना और टीम की जीत में योगदान देना होता है। समय के बीतने के साथ इंसान अपने आप को अधिक परिपक्वता से समझने लगता है और जब मस्तिष्क में किसी प्रकार की दुविधा नहीं रहती, तो इस स्तर का प्रदर्शन करना बहुत आसान हो जाता है।
कठिन दौर और घरेलू क्रिकेट में वापसी
गौरतलब है कि वर्ष 2023 के दौरान ईशान किशन उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल थे जो भारतीय टीम के लिए क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में खेल रहे थे। हालांकि, इसके बाद कुछ अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव आए जिनके चलते उनका करियर एक मुश्किल दौर से गुजरा और उन्हें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के केंद्रीय अनुबंध से भी हाथ धोना पड़ा। इस झटके के बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और घरेलू क्रिकेट में लगातार पसीना बहाया। उन्होंने दो हजार पच्चीस से दो हजार छब्बीस के रणजी ट्रॉफी सत्र में बेहतरीन शतक जड़े और झारखंड को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इस टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने कुल पांच सौ सत्रह रन बनाए, जिसमें दो शानदार शतक भी शामिल थे।
वर्तमान रणनीति और भविष्य की सोच
अपने मौजूदा खेल दृष्टिकोण के बारे में बात करते हुए ईशान किशन ने बताया कि वर्तमान में वह जो सबसे अच्छी आदत अपना रहे हैं, वह किसी भी बात पर अत्यधिक चिंतन न करना है। एक बल्लेबाज के तौर पर उनका मूल काम सिर्फ मैदान पर कदम रखना और प्रत्येक गेंद की मेरिट के अनुसार त्वरित प्रतिक्रिया देना है। उन्होंने खुद से किसी भी प्रकार की फालतू की अपेक्षाएं रखना बिल्कुल बंद कर दिया है, जिससे उन्हें अपनी बल्लेबाजी पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल रही है।



















