पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद रिजवान के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज के दौरान पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी पीसीबी ने रिजवान सहित कुल सात खिलाड़ियों को अचानक स्वदेश लौटने का निर्देश दिया था। घर वापसी के बाद रिजवान और सलामी बल्लेबाज इमाम उल हक को साइबर अपराध जांच से जुड़े अधिकारियों के सामने हाजिर होना पड़ा। इन गंभीर परिस्थितियों के बीच अब क्रिकेट बोर्ड ने रिजवान के मीडिया से बातचीत करने पर सख्त पाबंदी लगा दी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस और बातचीत की इजाजत खारिज
जांच के घेरे में आने के बाद मोहम्मद रिजवान ने अपना पक्ष रखने के मकसद से पिछले हफ्ते दो अलग-अलग मौकों पर पीसीबी से संपर्क साधा था। उन्होंने पत्रकारों और मीडिया संस्थानों से बात करने की औपचारिक अनुमति मांगी थी, मगर बोर्ड प्रबंधन ने दोनों ही बार उनकी इस मांग को सिरे से ठुकरा दिया। इंग्लैंड दौरे के मध्य से अपने वरिष्ठ साथी खिलाड़ियों इमाम उल हक और सलमान अली आगा के साथ अचानक बुलाए जाने के बाद से ही रिजवान लगातार चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। बोर्ड के इस कड़े रुख के कारण वह फिलहाल सार्वजनिक तौर पर कोई भी सफाई नहीं दे पा रहे हैं।
फोन जब्त और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल
नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी एनसीसीआईए ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए से संबंधित एक गंभीर मामले में रिजवान से सघन पूछताछ की है। इस जांच के तहत उनके तमाम वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड्स को बारीकी से खंगाला जा रहा है। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए दूसरे टेस्ट मैच के दौरान ही जांच एजेंसियों ने मोहम्मद रिजवान और इमाम उल हक, दोनों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए थे। अब एनसीसीआईए इन जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की विस्तृत फोरेंसिक जांच कर रही है ताकि सट्टेबाजी के संभावित संपर्कों और वित्तीय गतिविधियों का पूरा सच सामने लाया जा सके।
इमाम उल हक पर भी लगा अनुशासनात्मक आरोप
इस पूरे घटनाक्रम में केवल मोहम्मद रिजवान ही अकेले खिलाड़ी नहीं हैं जिन पर कार्रवाई की तलवार लटकी है। टीम के ओपनर इमाम उल हक भी गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच की अंतिम एकादश यानी प्लेइंग इलेवन में चुने जाने के बावजूद वह अपनी पारी खेलने के लिए मैदान पर बल्लेबाजी करने नहीं उतरे थे। इमाम पर यह आरोप लगाया गया था कि उन्होंने बल्लेबाजी से बचने के लिए चोटिल होने का झूठा बहाना बनाया था।
इन आरोपों को उस वक्त और बल मिला जब चोट का हवाला देकर बल्लेबाजी से दूर रहने वाले इमाम को उसी मैदान पर नेट में अभ्यास करते हुए देखा गया था। एक प्रमुख सलामी बल्लेबाज के मैदान में न उतरने का बहुत बड़ा खामियाजा पूरी पाकिस्तानी टीम को मैच के नतीजे के रूप में भुगतना पड़ा। लॉर्ड्स के उस मुकाबले में पाकिस्तान की टीम को एक बेहद करारी और शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद से दोनों खिलाड़ियों पर जांच का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।



















